हिंदुस्तान के ब्रह्मोस पर दुनिया की नजर! खरीदने के लिए कतार में खड़े 14 देश, 'ऑपरेशन सिंदूर' में दिखा दम
Brahmos Demand: एक वक्त था जब भारत दुनिया के तमाम देशों से हथियार आयात करने के मामले में आगे था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत अब देश दुनिया का सबसे बड़ा डिफेंस एक्सपोर्टर बनकर उभरा है. रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38424 करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया, जो पिछले साल के 23622 करोड़ के मुकाबले 62.66% ज्यादा है. दुनिया में भारत के स्वदेशी उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है. इन्हीं में से एक है- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल. ब्रह्मोस की दिवानी हुई दुनिया 'ऑपरेशन सिंदूर' में शानदार प्रदर्शन के बाद ब्रह्मोस मिसाइल का रुतबा कई गुना बढ़ गया है. इसके चलते ग्लोबल लेवल पर इसकी डिमांड भी कई गुना बढ़ गई है. दुनिया में लगभग 14 ऐसे देश हैं, जिन्होंने भारत से ब्रह्मोस खरीदने की इच्छा जताई है. ब्रह्मोस को भारत और रूस ने मिलकर बनाया है, लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' में इसने जिस तरह से पाकिस्तान की धूल चटाई है उसे देखते हुए अब रूस ने भी इसे अपनी सेना में शामिल करने की इच्छा जताई है. इसे लेकर भारत की फिलीपींस के साथ भी 375 डॉलर की बड़ी डील हुई है. फिलीपींस के बाद वियतनाम ने भी भारत के साथ लगभग 629 मिलियन डॉलर (लगभग 12500 करोड़ रुपये) की बड़ी ब्रह्मोस डील साइन की है. वियतनाम में बाद अब इंडोनेशिया ने भी इसे खरीदने का फैसला लिया है. संयुक्त अरब अमीरात भी आया आगे मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपनी सेना को और मजबूत बनाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने भी भारत से आकाशतीर और ब्रह्मोस जैसे एयर डिफेंस सिस्टम्स को खरीदने की इच्छा जताई है. बातचीत भले ही अभी शुरुआती चरण में हैं, लेकिन इस पर तेजी से काम किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि थाइलैंड, मलेशिया, ओमान, चिली, ब्राजील, सऊदी अरब, मिस्र जैसे देश भी अब अपनी देश की सेना में ब्रह्मोस को शामिल करने की तैयारी में हैं. ब्रह्मोस में क्या है खास? ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस ने संयुक्त रूप से मिलकर बनाया है. इसकी गिनती दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में होती है. यह 2.8 से 3 मैक (ध्वनि की गति सेभी लगभग तेज गुना तेज) की रफ्तार से उड़ती है. इसकी गति 3700 किलोमीटर प्रति घंटा है. यही वजह है कि दुश्मन देश का रडार या एयर डिफेंस सिस्टम इसका पता लगाए, यह अपना काम कर निकल जाता है. यह जमीन से, हवा से, समुद्र की सतह से और समुद्र के नीचे पनडुब्बी से भी वार करने की क्षमता रखता है. ये भी पढ़ें: SpaceX क्रैश से हिला वॉल स्ट्रीट, 'CCC' रेटिंग मिलते ही ही निवेशकों में मची भगदड़; 50 लाख करोड़ डूबे
Brahmos Demand: एक वक्त था जब भारत दुनिया के तमाम देशों से हथियार आयात करने के मामले में आगे था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत अब देश दुनिया का सबसे बड़ा डिफेंस एक्सपोर्टर बनकर उभरा है.
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38424 करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया, जो पिछले साल के 23622 करोड़ के मुकाबले 62.66% ज्यादा है. दुनिया में भारत के स्वदेशी उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है. इन्हीं में से एक है- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल.
ब्रह्मोस की दिवानी हुई दुनिया
'ऑपरेशन सिंदूर' में शानदार प्रदर्शन के बाद ब्रह्मोस मिसाइल का रुतबा कई गुना बढ़ गया है. इसके चलते ग्लोबल लेवल पर इसकी डिमांड भी कई गुना बढ़ गई है. दुनिया में लगभग 14 ऐसे देश हैं, जिन्होंने भारत से ब्रह्मोस खरीदने की इच्छा जताई है.
ब्रह्मोस को भारत और रूस ने मिलकर बनाया है, लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' में इसने जिस तरह से पाकिस्तान की धूल चटाई है उसे देखते हुए अब रूस ने भी इसे अपनी सेना में शामिल करने की इच्छा जताई है. इसे लेकर भारत की फिलीपींस के साथ भी 375 डॉलर की बड़ी डील हुई है. फिलीपींस के बाद वियतनाम ने भी भारत के साथ लगभग 629 मिलियन डॉलर (लगभग 12500 करोड़ रुपये) की बड़ी ब्रह्मोस डील साइन की है. वियतनाम में बाद अब इंडोनेशिया ने भी इसे खरीदने का फैसला लिया है.
संयुक्त अरब अमीरात भी आया आगे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपनी सेना को और मजबूत बनाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात ने भी भारत से आकाशतीर और ब्रह्मोस जैसे एयर डिफेंस सिस्टम्स को खरीदने की इच्छा जताई है. बातचीत भले ही अभी शुरुआती चरण में हैं, लेकिन इस पर तेजी से काम किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि थाइलैंड, मलेशिया, ओमान, चिली, ब्राजील, सऊदी अरब, मिस्र जैसे देश भी अब अपनी देश की सेना में ब्रह्मोस को शामिल करने की तैयारी में हैं.
ब्रह्मोस में क्या है खास?
ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस ने संयुक्त रूप से मिलकर बनाया है. इसकी गिनती दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में होती है. यह 2.8 से 3 मैक (ध्वनि की गति सेभी लगभग तेज गुना तेज) की रफ्तार से उड़ती है. इसकी गति 3700 किलोमीटर प्रति घंटा है. यही वजह है कि दुश्मन देश का रडार या एयर डिफेंस सिस्टम इसका पता लगाए, यह अपना काम कर निकल जाता है. यह जमीन से, हवा से, समुद्र की सतह से और समुद्र के नीचे पनडुब्बी से भी वार करने की क्षमता रखता है.
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