'स्कूलों के 20 हजार प्राइवेट टीचर्स को रेगुलर किया जाएगा, बशर्ते... ', इस राज्य की सरकार ने कर दिया ऐलान

केरल सरकार ने बुधवार (18 फरवरी, 2026) को घोषणा की कि वह सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत लगभग 20,000 शिक्षकों को नियमित करेगी, बशर्ते सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों में अंतिम निर्णय आ जाए. सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, कहा कि यह कदम दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण लागू करने और राज्य के सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियों की मंजूरी से संबंधित लंबित कानूनी जटिलताओं को हल करने के उद्देश्य से उठाया गया है. यह महत्वपूर्ण घोषणा शिवनकुट्टी की ओर से राज्य विधानसभा में यह कहने के कुछ हफ्तों बाद आई है कि एलडीएफ सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी रूप से हर संभव प्रयास कर रही है कि एनएसएस स्कूलों में सामान्य श्रेणी के शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश सभी सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधनों पर लागू हो. चुनावी राज्य केरल में वाम सरकार के इस ताजा फैसले को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. हाल ही में यह मुद्दा विभिन्न सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधन संस्थाओं, जिनमें ईसाई संगठन भी शामिल हैं, के विरोध प्रदर्शनों का कारण बना था. इन संगठनों ने सरकार पर अदालत के निर्देशों को लागू करने के बहाने सामान्य वर्ग की नियुक्तियों को रोकने का आरोप लगाया है. शिवनकुट्टी ने कहा कि यह मामला सहायता प्राप्त स्कूलों में दिव्यांगजनों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण लागू करने से संबंधित है, जैसा कि ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2017’ के तहत अनिवार्य किया गया है. इससे पहले 1996 के कानून के तहत तीन प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था. उन्होंने बताया कि सहायता प्राप्त स्कूलों में आरक्षण को लागू करने में हुई देरी के कारण कानूनी विवाद उत्पन्न हुए हैं. उच्च न्याय की एकल पीठ ने वर्ष 1996 से आरक्षण को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू करने का आदेश दिया था. सरकार का तर्क है कि ऐसा करने से हजारों वर्तमान शिक्षकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने बताया कि इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी. उन्होंने कहा कि खंड पीठ के फैसले के बाद वर्ष 2021 के बाद नियुक्त किए गए शिक्षकों को कथित तौर पर दैनिक वेतनभोगी (डेली-वेज) कर दिया गया. हालांकि, एक प्रमुख सामुदायिक संगठन नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) की ओर से दायर एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग की नियुक्तियों को मंजूरी देने की अनुमति दी,हालांकि दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पदों को इससे बाहर रखा. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर कर एनएसएस स्कूलों को दी गई सुविधा को अन्य समान स्थिति वाले सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधन संस्थानों तक विस्तारित करने का अनुरोध किया है. हालांकि, उन्होंने बताया कि इस मामले की सुनवाई अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई है.

Feb 18, 2026 - 20:30
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'स्कूलों के 20 हजार प्राइवेट टीचर्स को रेगुलर किया जाएगा, बशर्ते... ', इस राज्य की सरकार ने कर दिया ऐलान

केरल सरकार ने बुधवार (18 फरवरी, 2026) को घोषणा की कि वह सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत लगभग 20,000 शिक्षकों को नियमित करेगी, बशर्ते सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों में अंतिम निर्णय आ जाए.

सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, कहा कि यह कदम दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण लागू करने और राज्य के सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियों की मंजूरी से संबंधित लंबित कानूनी जटिलताओं को हल करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

यह महत्वपूर्ण घोषणा शिवनकुट्टी की ओर से राज्य विधानसभा में यह कहने के कुछ हफ्तों बाद आई है कि एलडीएफ सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी रूप से हर संभव प्रयास कर रही है कि एनएसएस स्कूलों में सामान्य श्रेणी के शिक्षकों की नियुक्ति के संबंध में हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश सभी सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधनों पर लागू हो.

चुनावी राज्य केरल में वाम सरकार के इस ताजा फैसले को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. हाल ही में यह मुद्दा विभिन्न सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधन संस्थाओं, जिनमें ईसाई संगठन भी शामिल हैं, के विरोध प्रदर्शनों का कारण बना था. इन संगठनों ने सरकार पर अदालत के निर्देशों को लागू करने के बहाने सामान्य वर्ग की नियुक्तियों को रोकने का आरोप लगाया है.

शिवनकुट्टी ने कहा कि यह मामला सहायता प्राप्त स्कूलों में दिव्यांगजनों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण लागू करने से संबंधित है, जैसा कि ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2017’ के तहत अनिवार्य किया गया है. इससे पहले 1996 के कानून के तहत तीन प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था.

उन्होंने बताया कि सहायता प्राप्त स्कूलों में आरक्षण को लागू करने में हुई देरी के कारण कानूनी विवाद उत्पन्न हुए हैं. उच्च न्याय की एकल पीठ ने वर्ष 1996 से आरक्षण को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू करने का आदेश दिया था. सरकार का तर्क है कि ऐसा करने से हजारों वर्तमान शिक्षकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने बताया कि इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी.

उन्होंने कहा कि खंड पीठ के फैसले के बाद वर्ष 2021 के बाद नियुक्त किए गए शिक्षकों को कथित तौर पर दैनिक वेतनभोगी (डेली-वेज) कर दिया गया. हालांकि, एक प्रमुख सामुदायिक संगठन नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) की ओर से दायर एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग की नियुक्तियों को मंजूरी देने की अनुमति दी,हालांकि दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पदों को इससे बाहर रखा.

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर कर एनएसएस स्कूलों को दी गई सुविधा को अन्य समान स्थिति वाले सहायता प्राप्त स्कूल प्रबंधन संस्थानों तक विस्तारित करने का अनुरोध किया है. हालांकि, उन्होंने बताया कि इस मामले की सुनवाई अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई है.

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