सिर्फ एक रात की नींद बताएगी आपकी सेहत का राज! यह AI मॉडल पहले ही भांप लेता है बीमारियों का खतरा

AI Model: अब तक किसी बीमारी के खतरे का अंदाजा लगाने के लिए डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल टेस्ट और मरीज के पुराने रिकॉर्ड पर भरोसा करते रहे हैं. लेकिन अगर सिर्फ एक रात की नींद के दौरान शरीर से मिलने वाले संकेत ही भविष्य की बीमारियों के बारे में बता दें तो? अमेरिका की स्टैनफोर्ड मेडिसिन से जुड़े शोधकर्ताओं ने ऐसा ही एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तैयार किया है जो केवल एक रात की नींद के डेटा के आधार पर 100 से ज्यादा बीमारियों के खतरे का अनुमान लगा सकता है. SleepFM इस AI मॉडल का नाम SleepFM रखा गया है. इसे करीब 65 हजार लोगों की लगभग 6 लाख घंटे की नींद से जुड़े डेटा पर ट्रेन किया गया है. इस डेटा में दिमाग की गतिविधि, दिल की धड़कन, सांस लेने का पैटर्न, आंखों और पैरों की हलचल समेत शरीर से जुड़े कई अहम संकेत शामिल हैं जिन्हें रातभर अलग-अलग सेंसर की मदद से रिकॉर्ड किया गया. नींद पर AI रिसर्च क्यों है खास? स्टडी से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि AI के क्षेत्र में नींद पर अब तक बहुत कम काम हुआ है. जहां ज्यादातर रिसर्च दिल, कैंसर या दूसरी बीमारियों पर केंद्रित रही है, वहीं नींद को अक्सर नजरअंदाज किया गया. जबकि नींद के दौरान शरीर लगातार कई जरूरी संकेत देता है और करीब 7–8 घंटे तक इंसान पूरी तरह स्थिर अवस्था में रहता है जिससे बेहद समृद्ध डेटा मिलता है. कैसे तैयार किया गया SleepFM? SleepFM को तैयार करने के लिए स्टैनफोर्ड के स्लीप क्लिनिक में 1999 से 2024 के बीच इलाज कराने वाले करीब 35 हजार मरीजों का डेटा इस्तेमाल किया गया. इन मरीजों की उम्र 2 साल से लेकर 96 साल तक थी. करीब 5.85 लाख घंटे का स्लीप स्टडी डेटा मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड के साथ जोड़ा गया. इसके बाद इस डेटा को 5-5 सेकंड के छोटे हिस्सों में बांटा गया, ठीक वैसे ही जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल शब्दों के टुकड़ों पर ट्रेन होते हैं. ट्रेनिंग के बाद इस AI मॉडल को अलग-अलग कामों के लिए और बेहतर बनाया गया. बीमारियों की भविष्यवाणी में कितना कारगर? शुरुआती टेस्ट में SleepFM ने नींद के अलग-अलग चरण पहचानने और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं की गंभीरता बताने में अच्छा प्रदर्शन किया. इसके बाद इसे एक ज्यादा चुनौतीपूर्ण काम दिया गया भविष्य में होने वाली बीमारियों का अनुमान लगाना. शोध में 1,000 से ज्यादा बीमारियों का विश्लेषण किया गया जिनमें से SleepFM करीब 130 बीमारियों के जोखिम का सटीक अंदाजा लगाने में सफल रहा. किन बीमारियों में रहा सबसे असरदार? कैंसर के कई प्रकार, गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं, दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां और मानसिक विकारों के मामले में इस मॉडल ने काफी मजबूत नतीजे दिए. पार्किंसन रोग, डिमेंशिया, हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी हृदय बीमारी, हार्ट अटैक, प्रोस्टेट कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और यहां तक कि मृत्यु के जोखिम की भविष्यवाणी में भी इसका स्कोर काफी ऊंचा रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, 0.8 से ज्यादा का स्कोर क्लिनिकल इस्तेमाल के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. हेल्थकेयर में AI की बढ़ती दखल यह रिसर्च ऐसे समय सामने आई है जब AI कंपनियां तेजी से हेल्थकेयर सेक्टर में कदम बढ़ा रही हैं. हाल ही में कई बड़े AI प्लेटफॉर्म्स ने मेडिकल इस्तेमाल के लिए खास टूल्स लॉन्च किए हैं. हालांकि, इसके साथ डेटा प्राइवेसी और गलत या भ्रामक जानकारी मिलने का खतरा भी चिंता का विषय बना हुआ है. आगे क्या है योजना? शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में SleepFM को और बेहतर बनाने के लिए स्मार्टवॉच और दूसरे वियरेबल डिवाइस से मिलने वाले डेटा को भी इसमें जोड़ा जाएगा. साथ ही यह समझने पर भी काम किया जा रहा है कि AI आखिर किन संकेतों के आधार पर किसी खास बीमारी का अनुमान लगाता है. नींद बन सकती है सेहत की चाबी यह रिसर्च बताती है कि नींद सिर्फ आराम का जरिया नहीं, बल्कि शरीर की सेहत का आईना भी है. अगर आने वाले समय में ऐसी तकनीक आम हो जाती है तो संभव है कि एक रात की नींद ही हमें पहले से आगाह कर दे कि भविष्य में कौन सी बीमारी दस्तक दे सकती है. यह भी पढ़ें: अब Gemini में ही होगी शॉपिंग! Google ने AI चैट में जोड़ दिया खरीदारी वाला फीचर, जानिए कैसे करेगा काम

Jan 19, 2026 - 17:30
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सिर्फ एक रात की नींद बताएगी आपकी सेहत का राज! यह AI मॉडल पहले ही भांप लेता है बीमारियों का खतरा

AI Model: अब तक किसी बीमारी के खतरे का अंदाजा लगाने के लिए डॉक्टर लक्षणों, मेडिकल टेस्ट और मरीज के पुराने रिकॉर्ड पर भरोसा करते रहे हैं. लेकिन अगर सिर्फ एक रात की नींद के दौरान शरीर से मिलने वाले संकेत ही भविष्य की बीमारियों के बारे में बता दें तो? अमेरिका की स्टैनफोर्ड मेडिसिन से जुड़े शोधकर्ताओं ने ऐसा ही एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तैयार किया है जो केवल एक रात की नींद के डेटा के आधार पर 100 से ज्यादा बीमारियों के खतरे का अनुमान लगा सकता है.

SleepFM

इस AI मॉडल का नाम SleepFM रखा गया है. इसे करीब 65 हजार लोगों की लगभग 6 लाख घंटे की नींद से जुड़े डेटा पर ट्रेन किया गया है. इस डेटा में दिमाग की गतिविधि, दिल की धड़कन, सांस लेने का पैटर्न, आंखों और पैरों की हलचल समेत शरीर से जुड़े कई अहम संकेत शामिल हैं जिन्हें रातभर अलग-अलग सेंसर की मदद से रिकॉर्ड किया गया.

नींद पर AI रिसर्च क्यों है खास?

स्टडी से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि AI के क्षेत्र में नींद पर अब तक बहुत कम काम हुआ है. जहां ज्यादातर रिसर्च दिल, कैंसर या दूसरी बीमारियों पर केंद्रित रही है, वहीं नींद को अक्सर नजरअंदाज किया गया. जबकि नींद के दौरान शरीर लगातार कई जरूरी संकेत देता है और करीब 7–8 घंटे तक इंसान पूरी तरह स्थिर अवस्था में रहता है जिससे बेहद समृद्ध डेटा मिलता है.

कैसे तैयार किया गया SleepFM?

SleepFM को तैयार करने के लिए स्टैनफोर्ड के स्लीप क्लिनिक में 1999 से 2024 के बीच इलाज कराने वाले करीब 35 हजार मरीजों का डेटा इस्तेमाल किया गया. इन मरीजों की उम्र 2 साल से लेकर 96 साल तक थी.

करीब 5.85 लाख घंटे का स्लीप स्टडी डेटा मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड के साथ जोड़ा गया. इसके बाद इस डेटा को 5-5 सेकंड के छोटे हिस्सों में बांटा गया, ठीक वैसे ही जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल शब्दों के टुकड़ों पर ट्रेन होते हैं. ट्रेनिंग के बाद इस AI मॉडल को अलग-अलग कामों के लिए और बेहतर बनाया गया.

बीमारियों की भविष्यवाणी में कितना कारगर?

शुरुआती टेस्ट में SleepFM ने नींद के अलग-अलग चरण पहचानने और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं की गंभीरता बताने में अच्छा प्रदर्शन किया. इसके बाद इसे एक ज्यादा चुनौतीपूर्ण काम दिया गया भविष्य में होने वाली बीमारियों का अनुमान लगाना. शोध में 1,000 से ज्यादा बीमारियों का विश्लेषण किया गया जिनमें से SleepFM करीब 130 बीमारियों के जोखिम का सटीक अंदाजा लगाने में सफल रहा.

किन बीमारियों में रहा सबसे असरदार?

कैंसर के कई प्रकार, गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं, दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां और मानसिक विकारों के मामले में इस मॉडल ने काफी मजबूत नतीजे दिए.

पार्किंसन रोग, डिमेंशिया, हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी हृदय बीमारी, हार्ट अटैक, प्रोस्टेट कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और यहां तक कि मृत्यु के जोखिम की भविष्यवाणी में भी इसका स्कोर काफी ऊंचा रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, 0.8 से ज्यादा का स्कोर क्लिनिकल इस्तेमाल के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है.

हेल्थकेयर में AI की बढ़ती दखल

यह रिसर्च ऐसे समय सामने आई है जब AI कंपनियां तेजी से हेल्थकेयर सेक्टर में कदम बढ़ा रही हैं. हाल ही में कई बड़े AI प्लेटफॉर्म्स ने मेडिकल इस्तेमाल के लिए खास टूल्स लॉन्च किए हैं. हालांकि, इसके साथ डेटा प्राइवेसी और गलत या भ्रामक जानकारी मिलने का खतरा भी चिंता का विषय बना हुआ है.

आगे क्या है योजना?

शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में SleepFM को और बेहतर बनाने के लिए स्मार्टवॉच और दूसरे वियरेबल डिवाइस से मिलने वाले डेटा को भी इसमें जोड़ा जाएगा. साथ ही यह समझने पर भी काम किया जा रहा है कि AI आखिर किन संकेतों के आधार पर किसी खास बीमारी का अनुमान लगाता है.

नींद बन सकती है सेहत की चाबी

यह रिसर्च बताती है कि नींद सिर्फ आराम का जरिया नहीं, बल्कि शरीर की सेहत का आईना भी है. अगर आने वाले समय में ऐसी तकनीक आम हो जाती है तो संभव है कि एक रात की नींद ही हमें पहले से आगाह कर दे कि भविष्य में कौन सी बीमारी दस्तक दे सकती है.

यह भी पढ़ें:

अब Gemini में ही होगी शॉपिंग! Google ने AI चैट में जोड़ दिया खरीदारी वाला फीचर, जानिए कैसे करेगा काम

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