‘शिक्षा में गैर-बराबरी को खत्म करने की बड़ी ताकत’, बोले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

VP Jagdeep Dhankhar in Amity University: ग्रेटर नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) की ओर से अपनी स्थापना के 99 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस भव्य आयोजन का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया. इस सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक कुलपति भौतिक रूप से और लगभग 200 कुलपति ऑनलाइन माध्यम से सम्मिलित हुए. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सम्मेलन को किया संबोधित सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “आज मैं शिक्षाविदों के बीच एक छात्र की तरह खड़ा हूं. मैं AIU को इसके 99 वर्ष पूरे होने पर हार्दिक बधाई देता हूं.” उन्होंने इस दिन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “यह अवसर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के साथ भी जुड़ा है. उन्होंने 1952 में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान का नारा दिया था, जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना.” उपराष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की निर्णयों को बताया ऐतिहासिक इस दौरान उपराष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370 और 35A के हटाए जाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को उनके मौलिक अधिकार दिलाए. उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति देश की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है और यह हमारी सभ्यता, संस्कृति और मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है. शिक्षा लोकतंत्र को जीवन देती है- उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, “शिक्षा में समानता लाने वाली सबसे बड़ी ताकत है. यह असमानताओं को समाप्त करती है और लोकतंत्र को जीवन देती है.” उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आईटी को उद्योग का दर्जा देने की पहल की भी सराहना की और कहा कि इससे प्रदेश में सकारात्मक विकास हुआ है. AI, क्वांटम साइंस जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व के लिए देश को रहना चाहिए तैयार- उपराष्ट्रपति अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आह्वान किया कि देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence/AI), जलवायु परिवर्तन, क्वांटम साइंस और डिजिटल एथिक्स जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार रहना चाहिए. विश्वविद्यालयों को ऐसा संस्थान बनाना होगा, जो युवाओं को साहसिक और असंभव विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करें.

Jun 23, 2025 - 20:30
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‘शिक्षा में गैर-बराबरी को खत्म करने की बड़ी ताकत’, बोले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

VP Jagdeep Dhankhar in Amity University: ग्रेटर नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) की ओर से अपनी स्थापना के 99 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस भव्य आयोजन का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया. इस सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक कुलपति भौतिक रूप से और लगभग 200 कुलपति ऑनलाइन माध्यम से सम्मिलित हुए.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सम्मेलन को किया संबोधित

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “आज मैं शिक्षाविदों के बीच एक छात्र की तरह खड़ा हूं. मैं AIU को इसके 99 वर्ष पूरे होने पर हार्दिक बधाई देता हूं.” उन्होंने इस दिन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “यह अवसर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के साथ भी जुड़ा है. उन्होंने 1952 में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान का नारा दिया था, जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना.”

उपराष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की निर्णयों को बताया ऐतिहासिक

इस दौरान उपराष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370 और 35A के हटाए जाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को उनके मौलिक अधिकार दिलाए. उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति देश की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है और यह हमारी सभ्यता, संस्कृति और मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है.

शिक्षा लोकतंत्र को जीवन देती है- उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, “शिक्षा में समानता लाने वाली सबसे बड़ी ताकत है. यह असमानताओं को समाप्त करती है और लोकतंत्र को जीवन देती है.” उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आईटी को उद्योग का दर्जा देने की पहल की भी सराहना की और कहा कि इससे प्रदेश में सकारात्मक विकास हुआ है.

AI, क्वांटम साइंस जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व के लिए देश को रहना चाहिए तैयार- उपराष्ट्रपति

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने आह्वान किया कि देश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence/AI), जलवायु परिवर्तन, क्वांटम साइंस और डिजिटल एथिक्स जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार रहना चाहिए. विश्वविद्यालयों को ऐसा संस्थान बनाना होगा, जो युवाओं को साहसिक और असंभव विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करें.

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