शिक्षा के मंदिर को बनाया नशे का अड्डा, ड्रग्स बनाने के आरोप में 3 लोग गिरफ्तार, जानें पूरा मामला

हैदराबाद के बोइनपल्ली इलाके में एक बंद पड़े निजी स्कूल के अंदर चल रही अवैध अल्पाज़ोलम (Alprazolam) निर्माण इकाई का ईगल (EAGLE) टीम ने भंडाफोड़ किया है. इस सनसनीखेज छापे से इलाके में हड़कंप मच गया है, क्योंकि मेधा हाई स्कूल (Medha High School) की इमारत को गुपचुप तरीके से नशीले पदार्थों के अड्डे में बदल दिया गया था. ईगल टीम ने इस मामले में स्कूल के मालिक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 21 करोड़ रुपये की 3.5 किलो अल्पाज़ोलम के साथ-साथ 21 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं. यह नकद राशि कथित तौर पर सिर्फ दो दिन की बिक्री से कमाई गई थी. कौन हैं गिरफ्तार आरोपीगिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान स्कूल के मालिक जय प्रकाश गौड़, ड्राइवर पी. उदय साई और ट्रांसपोर्टर जी. मुरली के रूप में हुई है. जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि जहां एक तरफ इस स्कूल में लगभग 110 बच्चे नामांकित थे, वहीं जय प्रकाश इसी परिसर में गुपचुप तरीके से ड्रग्स इकाई चला रहा था. छापेमारी में क्या-क्या मिलाछापेमारी के दौरान, अधिकारियों ने मुख्य इमारत के पीछे एक सुनसान कमरे और तहखाने (cellar) को अल्पाज़ोलम बनाने के लिए इस्तेमाल होते पाया. पुलिस ने उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के ड्रम, एक स्टोव और एक छोटा रिएक्टर भी जब्त किया. अधिकारियों ने बताया कि यह रिएक्टर एक बार में 5 किलो तक अल्पाज़ोलम बना सकता था. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जय प्रकाश पहले महबूबनगर में ताड़ी (toddy) के कारोबार में शामिल था. आरोप है कि वह ताड़ी अड्डों (toddy compounds) को अल्पाज़ोलम की आपूर्ति करता था और हाल के महीनों में वह बड़े पैमाने पर उत्पादन में लग गया था. कई कंपनियां ईगल की निगरानी मेंपुलिस अब इस अवैध उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों के स्रोत का पता लगा रही है. बी2बी (B2B) और बी2सी (B2C) मॉडल पर काम करने वाली कई कंपनियां ईगल की निगरानी में हैं, क्योंकि इन कंपनियों की कच्चे माल की आपूर्ति में संभावित भूमिका हो सकती है. अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जय प्रकाश का यह पहला दर्ज अपराध है. जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह ऑपरेशन कब से चल रहा था और क्या इसमें और भी लोग या नेटवर्क शामिल हैं. क्या इस रैकेट का कोई अंतरराष्ट्रीय संबंध भी है? ये सवाल अब भी जांच के दायरे में है. ये भी पढ़ें किसी ने बॉयकॉट की पैरवी तो किसी ने बताया इतिहास... एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर बढ़ा सियासी पारा!

Sep 14, 2025 - 15:30
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शिक्षा के मंदिर को बनाया नशे का अड्डा, ड्रग्स बनाने के आरोप में 3 लोग गिरफ्तार, जानें पूरा मामला

हैदराबाद के बोइनपल्ली इलाके में एक बंद पड़े निजी स्कूल के अंदर चल रही अवैध अल्पाज़ोलम (Alprazolam) निर्माण इकाई का ईगल (EAGLE) टीम ने भंडाफोड़ किया है. इस सनसनीखेज छापे से इलाके में हड़कंप मच गया है, क्योंकि मेधा हाई स्कूल (Medha High School) की इमारत को गुपचुप तरीके से नशीले पदार्थों के अड्डे में बदल दिया गया था.

ईगल टीम ने इस मामले में स्कूल के मालिक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और करीब 21 करोड़ रुपये की 3.5 किलो अल्पाज़ोलम के साथ-साथ 21 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं. यह नकद राशि कथित तौर पर सिर्फ दो दिन की बिक्री से कमाई गई थी.

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान स्कूल के मालिक जय प्रकाश गौड़, ड्राइवर पी. उदय साई और ट्रांसपोर्टर जी. मुरली के रूप में हुई है. जांचकर्ताओं ने खुलासा किया कि जहां एक तरफ इस स्कूल में लगभग 110 बच्चे नामांकित थे, वहीं जय प्रकाश इसी परिसर में गुपचुप तरीके से ड्रग्स इकाई चला रहा था.

छापेमारी में क्या-क्या मिला
छापेमारी के दौरान, अधिकारियों ने मुख्य इमारत के पीछे एक सुनसान कमरे और तहखाने (cellar) को अल्पाज़ोलम बनाने के लिए इस्तेमाल होते पाया. पुलिस ने उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के ड्रम, एक स्टोव और एक छोटा रिएक्टर भी जब्त किया. अधिकारियों ने बताया कि यह रिएक्टर एक बार में 5 किलो तक अल्पाज़ोलम बना सकता था. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जय प्रकाश पहले महबूबनगर में ताड़ी (toddy) के कारोबार में शामिल था. आरोप है कि वह ताड़ी अड्डों (toddy compounds) को अल्पाज़ोलम की आपूर्ति करता था और हाल के महीनों में वह बड़े पैमाने पर उत्पादन में लग गया था.

कई कंपनियां ईगल की निगरानी में
पुलिस अब इस अवैध उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों के स्रोत का पता लगा रही है. बी2बी (B2B) और बी2सी (B2C) मॉडल पर काम करने वाली कई कंपनियां ईगल की निगरानी में हैं, क्योंकि इन कंपनियों की कच्चे माल की आपूर्ति में संभावित भूमिका हो सकती है.

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जय प्रकाश का यह पहला दर्ज अपराध है. जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह ऑपरेशन कब से चल रहा था और क्या इसमें और भी लोग या नेटवर्क शामिल हैं. क्या इस रैकेट का कोई अंतरराष्ट्रीय संबंध भी है? ये सवाल अब भी जांच के दायरे में है.

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