विजय देवरकोंडा के रिसेप्शन में राम चरण के नंगे पैर और काले कपड़ों ने खींचा ध्यान, जानिए इससे जुड़ा आध्यात्मिक कारण?

अभिनेता विजय देवरकोंडा और उनकी पत्नी रश्मिका मंदाना ने 4 मार्च, 2026 को हैदराबाद में भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया था. जिसमें फिल्म जगत की तमाम हस्तियां शामिल हुईं. लेकिन इस भव्य स्वागत में सारी लाइम लाइट राम चरण ने चुरा ली. दरअसल उन्हें समारोह स्थल पर नंगे पैर और काले रंग के कपड़ों में देखा गया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. हालांकि इसके पीछे की असल वजह आध्यात्म से जु़ड़ी है.  बड़े भाई से पहले छोटे की शादी क्यों मानी जाती है अशुभ? श्रीराजेंद्र दास महाराज ने बताया धार्मिक रहस्य! अभिनेता कार्यक्रम में नंगे पैर थे राम चरण और उनकी पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला के साथ रिसेप्शन में शामिल हुए. अभिनेता ने काले रंग का एक शानदार कुर्ता पहना था. उनका स्टाइलिश लुक उनके चाहने वालों को काफी पसंद आया, लेकिन यहां गौर करने वाले बात ये है कि, वे पूरे कार्यक्रम के दौरान नंगे पैर थे. पहली नजर में उनके प्रशंसकों को लगा कि, यह उनकी नई जीवनशैली हो सकती है, लेकिन असल में यह उनके द्वारा लिए जा रहे धार्मिक व्रत से जुड़ा है.           View this post on Instagram                       A post shared by Pallav Paliwal (@pallav_paliwal) नंगे पैर रहने का आध्यात्मिक कारण दरअसल राम चरण वर्तमान में अय्यप्पा दीक्षा का पालन कर रहे हैं, जो भगवान अय्यप्पा के भक्तों द्वारा प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में जाने से पहले ली जाने वाली एक पवित्र आध्यात्मिक प्रतिज्ञा है. इस आध्यात्मिक प्रतिज्ञा को अनुशासन की अवधि माना जाता है. भक्तों को कठोर अनुशासन का पालन करना होता है और सादगी भरा जीवन जीना होता है. अय्यप्पा दीक्षा सामान्य 41 से 48 दिनों तक चलती है. अय्यप्पा दीक्षा के दौरान पालन किए जाने वाले नियम अय्यप्पा दीक्षा के दौरान भक्त साधारण वस्त्र पहनते हैं, आमतौर पर काले, नीले या केसरिया रंग के कपड़े, कई श्रद्धालु विनम्रता और भक्ति के प्रतीक के रूप में नंगे पैर चलना भी पसंद करते हैं. खाने में शाकाहारी भोजन और शराब व  विलासितापूर्ण जीवन शैली से दूर रहना होता है.  अय्यप्पा दीक्षा में दैनिक साधना और ध्यान करना भी जरूरी है. भक्त इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और आमतौर पर बाल-दाढ़ी नहीं कटवाते हैं. इन नियमों का उद्देश्य अनुशासन भरा जीवन जीना है और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Mar 6, 2026 - 10:30
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विजय देवरकोंडा के रिसेप्शन में राम चरण के नंगे पैर और काले कपड़ों ने खींचा ध्यान, जानिए इससे जुड़ा आध्यात्मिक कारण?

अभिनेता विजय देवरकोंडा और उनकी पत्नी रश्मिका मंदाना ने 4 मार्च, 2026 को हैदराबाद में भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया था. जिसमें फिल्म जगत की तमाम हस्तियां शामिल हुईं. लेकिन इस भव्य स्वागत में सारी लाइम लाइट राम चरण ने चुरा ली.

दरअसल उन्हें समारोह स्थल पर नंगे पैर और काले रंग के कपड़ों में देखा गया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. हालांकि इसके पीछे की असल वजह आध्यात्म से जु़ड़ी है. 

बड़े भाई से पहले छोटे की शादी क्यों मानी जाती है अशुभ? श्रीराजेंद्र दास महाराज ने बताया धार्मिक रहस्य!

अभिनेता कार्यक्रम में नंगे पैर थे

राम चरण और उनकी पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला के साथ रिसेप्शन में शामिल हुए. अभिनेता ने काले रंग का एक शानदार कुर्ता पहना था. उनका स्टाइलिश लुक उनके चाहने वालों को काफी पसंद आया, लेकिन यहां गौर करने वाले बात ये है कि, वे पूरे कार्यक्रम के दौरान नंगे पैर थे.

पहली नजर में उनके प्रशंसकों को लगा कि, यह उनकी नई जीवनशैली हो सकती है, लेकिन असल में यह उनके द्वारा लिए जा रहे धार्मिक व्रत से जुड़ा है.

 
 
 
 
 
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नंगे पैर रहने का आध्यात्मिक कारण

दरअसल राम चरण वर्तमान में अय्यप्पा दीक्षा का पालन कर रहे हैं, जो भगवान अय्यप्पा के भक्तों द्वारा प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में जाने से पहले ली जाने वाली एक पवित्र आध्यात्मिक प्रतिज्ञा है. इस आध्यात्मिक प्रतिज्ञा को अनुशासन की अवधि माना जाता है.

भक्तों को कठोर अनुशासन का पालन करना होता है और सादगी भरा जीवन जीना होता है. अय्यप्पा दीक्षा सामान्य 41 से 48 दिनों तक चलती है.

अय्यप्पा दीक्षा के दौरान पालन किए जाने वाले नियम

अय्यप्पा दीक्षा के दौरान भक्त साधारण वस्त्र पहनते हैं, आमतौर पर काले, नीले या केसरिया रंग के कपड़े, कई श्रद्धालु विनम्रता और भक्ति के प्रतीक के रूप में नंगे पैर चलना भी पसंद करते हैं. खाने में शाकाहारी भोजन और शराब व  विलासितापूर्ण जीवन शैली से दूर रहना होता है. 

अय्यप्पा दीक्षा में दैनिक साधना और ध्यान करना भी जरूरी है. भक्त इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और आमतौर पर बाल-दाढ़ी नहीं कटवाते हैं. इन नियमों का उद्देश्य अनुशासन भरा जीवन जीना है और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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