यमन के आतंकियों ने AI से बनाई मिसाइल, Anthropic का चौंकाने वाला खुलासा
तकनीक की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला मामला सामने आया है. अब तक हम सभी जानते थे कि एआई इंसानों के काम को आसान बना रहा है, लेकिन अब इसका इस्तेमाल खतरनाक हथियारों को बनाने में भी होने लगा है. हाल ही में Anthropic ने अपनी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि यमन के एक थ्रेट एक्टर यानी आतंकी गुट ने इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जगह उनके एआई टूल Claude AI का इस्तेमाल करके मिसाइल प्रोग्राम के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया. इस खबर के सामने आने के बाद पूरी दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञों और टेक जगत में खलबली मच गई है. तीन बड़े मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर चल रहा था काम Anthropic की सुरक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी यमन के एक सक्रिय सेल ने क्लोड एआई का इस्तेमाल तीन अलग-अलग हथियारों के प्रोग्राम को एक साथ चलाने के लिए किया. यह गुट एक गाइडेड रॉकेट, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल और आर-2000 नाम की मिसाइल सीरीज पर काम कर रहा था, जिसमें एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी शामिल है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गुट ने किसी इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मदद नहीं ली, बल्कि Claude AI के कई अकाउंट्स को एक साथ मिलाकर एक पूरी टीम की तरह काम पर लगा दिया. एआई अकाउंट्स को बांट दी गई थी जिम्मेदारी इस आतंकी सेल ने एआई का इस्तेमाल करने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया. उन्होंने Claude AI के अलग-अलग अकाउंट को एक सीनियर इंजीनियर की तरह काम सौंप दिया. इनमें से एक एआई अकाउंट मिसाइल का कोड लिख रहा था, दूसरा अकाउंट जरूरी रिसर्च कर रहा था और तीसरा अकाउंट पहले अकाउंट द्वारा लिखे गए कोड की कमियों को चेक कर रहा था. इस तरह बिना किसी इंसानी दिमाग के ही एआई ने मिलकर मिसाइल की दिशा तय करने वाला बेहद जटिल सॉफ्टवेयर तैयार कर दिया. चालाकी से बायपास किए गए सुरक्षा फीचर्स हैरानी की बात यह है कि इस काम के लिए उन्होंने किसी बहुत महंगे कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि आम लोगों के काम आने वाले छोटे डिवाइस पर ही ओपन-सोर्स ऑटोपायलट सिस्टम को इंटीग्रेट करने के लिए क्लोड एआई की मदद ली. एआई ने न सिर्फ इस सिस्टम के लिए कोड लिखा, बल्कि उसकी सेटिंग्स तय कीं और कंप्यूटर के अंदर ही इसकी उड़ानों का डिजिटल ट्रायल यानी फ्लाइट सिमुलेशन भी करके देख लिया. कंपनी के सुरक्षा फिल्टर ने कई संदिग्ध रिक्वेस्ट को ब्लॉक भी किया, लेकिन इस गुट ने अपने असली मकसद को छुपाए रखा और काम को छोटे टुकड़ों में बांट दिया, जिससे एआई को कभी पता ही नहीं चल पाया कि उससे मिसाइल का सॉफ्टवेयर बनवाया जा रहा है.. यह भी पढ़ें: Meta के नए हेडसेट का लुक आया सामने, जानें खासियत टेस्ट फेल होने पर पकड़ी गई आतंकियों की चालाकी हालांकि, कंपनी का कहना है कि उनके पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह आतंकी गुट पूरी तरह से काम करने वाला हथियार जमीन पर तैयार कर पाया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गुट ने एक गाइडेड रॉकेट का फील्ड टेस्ट किया था जो पूरी तरह फेल हो गया. इस टेस्ट के फेल होने के कुछ ही घंटों के भीतर यह गुट दोबारा क्लोड एआई के पास पहुंच गया और रॉकेट के फेल होने के बाद मिले डेटा को एआई के सामने रखकर खराबी का पता लगाने की कोशिश करने लगा. इसी हरकत की वजह से एंथ्रोपिक कंपनी को इस पूरे खेल की भनक लगी. अकाउंट बैन होने पर भी कम नहीं हुआ खतरा जैसे ही कंपनी को इस घटना का पता चला, उसने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस सेल से जुड़े सभी क्लोड अकाउंट्स को हमेशा के लिए बैन कर दिया और इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को बताई गई. लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बैन लगने से पहले ही इस गुट ने अपना काम काफी हद तक पूरा कर लिया था. उन्होंने मिसाइल सिस्टम का एक ऐसा डिजिटल मॉडल तैयार कर लिया है, जो अब बिना क्लोड एआई और बिना इंटरनेट के भी सीधे कंप्यूटर पर काम कर सकता है. इसका मतलब है कि एआई का एक्सेस छिन जाने के बाद भी वे इस मिसाइल प्रोग्राम पर आगे का काम जारी रख सकते हैं. यह भी पढ़ें: Siri का सबसे बड़ा AI अपडेट हुआ शुरू! iPhone यूजर्स को मिलेंगे ये धांसू फीचर्स
तकनीक की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला मामला सामने आया है. अब तक हम सभी जानते थे कि एआई इंसानों के काम को आसान बना रहा है, लेकिन अब इसका इस्तेमाल खतरनाक हथियारों को बनाने में भी होने लगा है.
हाल ही में Anthropic ने अपनी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि यमन के एक थ्रेट एक्टर यानी आतंकी गुट ने इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जगह उनके एआई टूल Claude AI का इस्तेमाल करके मिसाइल प्रोग्राम के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया. इस खबर के सामने आने के बाद पूरी दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञों और टेक जगत में खलबली मच गई है.
तीन बड़े मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर चल रहा था काम
Anthropic की सुरक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी यमन के एक सक्रिय सेल ने क्लोड एआई का इस्तेमाल तीन अलग-अलग हथियारों के प्रोग्राम को एक साथ चलाने के लिए किया. यह गुट एक गाइडेड रॉकेट, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल और आर-2000 नाम की मिसाइल सीरीज पर काम कर रहा था, जिसमें एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी शामिल है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गुट ने किसी इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मदद नहीं ली, बल्कि Claude AI के कई अकाउंट्स को एक साथ मिलाकर एक पूरी टीम की तरह काम पर लगा दिया.
एआई अकाउंट्स को बांट दी गई थी जिम्मेदारी
इस आतंकी सेल ने एआई का इस्तेमाल करने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया. उन्होंने Claude AI के अलग-अलग अकाउंट को एक सीनियर इंजीनियर की तरह काम सौंप दिया. इनमें से एक एआई अकाउंट मिसाइल का कोड लिख रहा था, दूसरा अकाउंट जरूरी रिसर्च कर रहा था और तीसरा अकाउंट पहले अकाउंट द्वारा लिखे गए कोड की कमियों को चेक कर रहा था. इस तरह बिना किसी इंसानी दिमाग के ही एआई ने मिलकर मिसाइल की दिशा तय करने वाला बेहद जटिल सॉफ्टवेयर तैयार कर दिया.
चालाकी से बायपास किए गए सुरक्षा फीचर्स
हैरानी की बात यह है कि इस काम के लिए उन्होंने किसी बहुत महंगे कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि आम लोगों के काम आने वाले छोटे डिवाइस पर ही ओपन-सोर्स ऑटोपायलट सिस्टम को इंटीग्रेट करने के लिए क्लोड एआई की मदद ली. एआई ने न सिर्फ इस सिस्टम के लिए कोड लिखा, बल्कि उसकी सेटिंग्स तय कीं और कंप्यूटर के अंदर ही इसकी उड़ानों का डिजिटल ट्रायल यानी फ्लाइट सिमुलेशन भी करके देख लिया.
कंपनी के सुरक्षा फिल्टर ने कई संदिग्ध रिक्वेस्ट को ब्लॉक भी किया, लेकिन इस गुट ने अपने असली मकसद को छुपाए रखा और काम को छोटे टुकड़ों में बांट दिया, जिससे एआई को कभी पता ही नहीं चल पाया कि उससे मिसाइल का सॉफ्टवेयर बनवाया जा रहा है..
यह भी पढ़ें: Meta के नए हेडसेट का लुक आया सामने, जानें खासियत
टेस्ट फेल होने पर पकड़ी गई आतंकियों की चालाकी
हालांकि, कंपनी का कहना है कि उनके पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह आतंकी गुट पूरी तरह से काम करने वाला हथियार जमीन पर तैयार कर पाया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गुट ने एक गाइडेड रॉकेट का फील्ड टेस्ट किया था जो पूरी तरह फेल हो गया. इस टेस्ट के फेल होने के कुछ ही घंटों के भीतर यह गुट दोबारा क्लोड एआई के पास पहुंच गया और रॉकेट के फेल होने के बाद मिले डेटा को एआई के सामने रखकर खराबी का पता लगाने की कोशिश करने लगा. इसी हरकत की वजह से एंथ्रोपिक कंपनी को इस पूरे खेल की भनक लगी.
अकाउंट बैन होने पर भी कम नहीं हुआ खतरा
जैसे ही कंपनी को इस घटना का पता चला, उसने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस सेल से जुड़े सभी क्लोड अकाउंट्स को हमेशा के लिए बैन कर दिया और इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को बताई गई. लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बैन लगने से पहले ही इस गुट ने अपना काम काफी हद तक पूरा कर लिया था.
उन्होंने मिसाइल सिस्टम का एक ऐसा डिजिटल मॉडल तैयार कर लिया है, जो अब बिना क्लोड एआई और बिना इंटरनेट के भी सीधे कंप्यूटर पर काम कर सकता है. इसका मतलब है कि एआई का एक्सेस छिन जाने के बाद भी वे इस मिसाइल प्रोग्राम पर आगे का काम जारी रख सकते हैं.
यह भी पढ़ें: Siri का सबसे बड़ा AI अपडेट हुआ शुरू! iPhone यूजर्स को मिलेंगे ये धांसू फीचर्स
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