ब्रेस्ट मिल्क बेस्ट या फॉर्मूला मिल्क... मिशेल ओबामा ने छेड़ी बहस, क्या कहते हैं एक्सपर्ट और WHO?

Michelle Obama On Formula Milk: हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं, खासकर जब बात उसके खान-पान, पोषण और सेहत की हो. नवजात शिशु को मां का दूध देना बेहतर है या फॉर्मूला मिल्क. इस सवाल पर नई मांओं के बीच अक्सर बहस होती रहती है. इसी बीच अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामाने हाल ही में एक बातचीत में खुलासा किया कि वह खुद फॉर्मूला मिल्क पर पली-बढ़ी हैं. पॉडकास्ट कॉल हर डैडी के एक एपिसोड में, जिसे एलेक्स कूपर होस्ट करती हैं, उसमें मिशेल ओबामा ने कहा कि मैं एक फॉर्मूला बेबी हूं,मेरी लंबाई 5 फीट 11 इंच है और दिमाग बिल्कुल ठीक काम करता है." उनके इस बयान के बाद एक बार फिर फॉर्मूला मिल्क को लेकर चर्चा तेज हो गई. बेबी फॉर्मूला क्या होता है? एक्सपर्ट बताते हैं कि बेबी फॉर्मूला मां के दूध का विकल्प होता है, जिसे तब दिया जाता है जब मां किसी कारणवश बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा पाती. ये आमतौर पर गाय के दूध से बने होते हैं, लेकिन इन्हें इस तरह से प्रोसेस किया जाता है कि इनकी संरचना काफी हद तक मां के दूध जैसी हो. जब बच्चे को भूख लगती है, तो उबले हुए पानी में तय मात्रा में फॉर्मूला पाउडर मिलाकर उसे दिया जाता है.  हालांकि, डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि बोतल से दूध पिलाने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए कटोरी या चम्मच से दूध पिलाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. वे यह भी साफ करते हैं कि मां का दूध सबसे बेहतर होता है, लेकिन अगर मां गंभीर रूप से बीमार हो या किसी कारण से दूध न पिला सके, तो फॉर्मूला मिल्क दिया जा सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चे को उसकी जरूरत के हिसाब से दूध पिलाना चाहिए. डॉक्टर बताते हैं कि जन्म के पहले दो महीनों में शिशु को सिर्फ मां का दूध या उसका विकल्प ही पर्याप्त होता है. जरूरत पड़ने पर बच्चे को जन्म के दिन से भी फॉर्मूला दिया जा सकता है. WHO की नई गाइडलाइंस क्या कहती हैं? वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अपनी फीडिंग गाइडलाइंस अपडेट की हैं. इसके मुताबिक, जो बच्चे आंशिक या पूरी तरह फॉर्मूला पर निर्भर हैं, उन्हें छह महीने की उम्र के बाद फुल-फैट गाय का दूध दिया जा सकता है. हालांकि WHO यह भी स्पष्ट करता है कि छह महीने के बाद बच्चों को आयरन की जरूरत केवल दूध से पूरी नहीं होती. इसलिए इस उम्र के बाद बच्चों को आयरन से भरपूर ठोस आहार देना जरूरी है. इसमें मांस, अंडे, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स, दालें, पिसे हुए बीज और नट बटर शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन बिना नमक और चीनी मिलाए. इन बातों का रखना चाहिए ध्यान  WHO यह सलाह देता है कि पहले छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध दिया जाए और इसके बाद दो साल या उससे अधिक समय तक ब्रेस्टफीडिंद जारी रखा जाए. छह महीने से कम उम्र के बच्चों को, अगर मां का दूध न मिल पाए, तो केवल शिशु फॉर्मूला ही देना चाहिए. वहीं, 12 महीने से अधिक उम्र के बच्चों के लिए टॉडलर फॉर्मूला की सिफारिश नहीं की जाती. Health Myths And Facts: शरीर और सेहत को लेकर भ्रम में तो नहीं रहते आप, जानें किन गलत बातों को इंसान मान बैठा है सही? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jan 28, 2026 - 17:30
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ब्रेस्ट मिल्क बेस्ट या फॉर्मूला मिल्क... मिशेल ओबामा ने छेड़ी बहस, क्या कहते हैं एक्सपर्ट और WHO?

Michelle Obama On Formula Milk: हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं, खासकर जब बात उसके खान-पान, पोषण और सेहत की हो. नवजात शिशु को मां का दूध देना बेहतर है या फॉर्मूला मिल्क. इस सवाल पर नई मांओं के बीच अक्सर बहस होती रहती है. इसी बीच अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामाने हाल ही में एक बातचीत में खुलासा किया कि वह खुद फॉर्मूला मिल्क पर पली-बढ़ी हैं.

पॉडकास्ट कॉल हर डैडी के एक एपिसोड में, जिसे एलेक्स कूपर होस्ट करती हैं, उसमें मिशेल ओबामा ने कहा कि मैं एक फॉर्मूला बेबी हूं,मेरी लंबाई 5 फीट 11 इंच है और दिमाग बिल्कुल ठीक काम करता है." उनके इस बयान के बाद एक बार फिर फॉर्मूला मिल्क को लेकर चर्चा तेज हो गई.

बेबी फॉर्मूला क्या होता है?

एक्सपर्ट बताते हैं कि बेबी फॉर्मूला मां के दूध का विकल्प होता है, जिसे तब दिया जाता है जब मां किसी कारणवश बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा पाती. ये आमतौर पर गाय के दूध से बने होते हैं, लेकिन इन्हें इस तरह से प्रोसेस किया जाता है कि इनकी संरचना काफी हद तक मां के दूध जैसी हो. जब बच्चे को भूख लगती है, तो उबले हुए पानी में तय मात्रा में फॉर्मूला पाउडर मिलाकर उसे दिया जाता है.

 हालांकि, डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि बोतल से दूध पिलाने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए कटोरी या चम्मच से दूध पिलाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. वे यह भी साफ करते हैं कि मां का दूध सबसे बेहतर होता है, लेकिन अगर मां गंभीर रूप से बीमार हो या किसी कारण से दूध न पिला सके, तो फॉर्मूला मिल्क दिया जा सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चे को उसकी जरूरत के हिसाब से दूध पिलाना चाहिए. डॉक्टर बताते हैं कि जन्म के पहले दो महीनों में शिशु को सिर्फ मां का दूध या उसका विकल्प ही पर्याप्त होता है. जरूरत पड़ने पर बच्चे को जन्म के दिन से भी फॉर्मूला दिया जा सकता है.

WHO की नई गाइडलाइंस क्या कहती हैं?

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अपनी फीडिंग गाइडलाइंस अपडेट की हैं. इसके मुताबिक, जो बच्चे आंशिक या पूरी तरह फॉर्मूला पर निर्भर हैं, उन्हें छह महीने की उम्र के बाद फुल-फैट गाय का दूध दिया जा सकता है. हालांकि WHO यह भी स्पष्ट करता है कि छह महीने के बाद बच्चों को आयरन की जरूरत केवल दूध से पूरी नहीं होती. इसलिए इस उम्र के बाद बच्चों को आयरन से भरपूर ठोस आहार देना जरूरी है. इसमें मांस, अंडे, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स, दालें, पिसे हुए बीज और नट बटर शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन बिना नमक और चीनी मिलाए.

इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

 WHO यह सलाह देता है कि पहले छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध दिया जाए और इसके बाद दो साल या उससे अधिक समय तक ब्रेस्टफीडिंद जारी रखा जाए. छह महीने से कम उम्र के बच्चों को, अगर मां का दूध न मिल पाए, तो केवल शिशु फॉर्मूला ही देना चाहिए. वहीं, 12 महीने से अधिक उम्र के बच्चों के लिए टॉडलर फॉर्मूला की सिफारिश नहीं की जाती.

Health Myths And Facts: शरीर और सेहत को लेकर भ्रम में तो नहीं रहते आप, जानें किन गलत बातों को इंसान मान बैठा है सही?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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