देश में आधे से ज्यादा लोगों की थाली में प्रोटीन की कमी, रिपोर्ट में खुलासा
भारतीय थाली में दाल-चावल, रोटी-सब्जी और दूध जैसी चीजें लंबे समय से रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा रही हैं. फिर भी प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के मामले में बड़ी आबादी पीछे है. द स्टेट ऑफ प्रोटीन एंड फाइबर इन अर्बन इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट ने इसी कमी की ओर ध्यान खींचा है. रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 73 प्रतिशत लोगों के रोज के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नहीं पहुंच पा रहा. यानी भोजन पेट भरने के लिए तो पर्याप्त है लेकिन शरीर की जरूरत के हिसाब से उसका पोषण संतुलित नहीं है. यह स्टडी पेप्सिको इंडिया और यूरोमानिटर इंटरनेशनल द्वारा भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (IIMR) के सहयोग से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि जैसे 5 बड़े शहरों में किया गया है. ऐसे में जानिए पूरी रिपोर्ट के बारे में. शहरों में भी बड़ी चुनौती रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरों में 44 प्रतिशत और गांवों में 36 प्रतिशत लोग रोज की प्रोटीन जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं. यह अंतर बताता है कि समस्या केवल खाने की उपलब्धता से जुड़ी नहीं है. भोजन की पसंद, कीमत, जागरूकता और रोजमर्रा की आदतें भी इसके पीछे की वजह है. खासकर शहरों में बाहर का खाना व जल्दी तैयार होने वाले विकल्प और बदलती लाइफस्टाइल के बीच पोषक भोजन को नियमित रखना चुनौती बन रहा है. शहरी लोगों में बड़ी संख्या ऐसी थी जिन्हें रोजाना 41 ग्राम से कम प्रोटीन मिला. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 60 प्रतिशत लोगों को प्रोटीन वाले फूड प्रोडक्ट महंगे लगते है. वहीं 57 प्रतिशत ने सुविधाजनक विकल्पों की कमी को भी वजह बताया. इसका मतलब है कि लोग प्रोटीन को जरूरी मानते हैं, लेकिन उसे रोज की थाली में जोड़ने का आसान और सस्ता तरीका हर किसी के पास नहीं है. प्रोटीन के लिए महंगे विकल्प जरूरी नहीं प्रोटीन के लिए महंगे या खास फूड प्रोडक्ट की तलाश करने की जरूरत नहीं है. भारतीय रसोई में कई ऐसे विकल्प पहले से मौजूद हैं जिन्हें थोड़ी समझदारी के साथ भोजन का हिस्सा बनाकर प्रोटीन की कमी को पूरा किया जा सकता है. दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मेवे प्रोटीन के बेहतरीन सोर्स है. वहीं वेजिटेरियन फूड भोजन लेने वालों के लिए दाल, चना, सोया और दूध से बने फूड प्रोडक्ट हैं. अनाज के साथ दाल या दूसरी प्रोटीन वाली चीज जोड़ने से भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है. यह भी पढ़ें: एक दिन में कितना प्रोटीन जरूरी, उम्र के हिसाब से जानें यहां बच्चों के पोषण पर सबसे ज्यादा ध्यान रिपोर्ट में पांच साल से कम उम्र के हर तीसरे बच्चे में पोषण की कमी की बात सामने आई है. करीब 35 प्रतिशत बच्चे बौनेपन और 32 प्रतिशत कम वजन की समस्या से प्रभावित बताए गए हैं. बचपन में पर्याप्त पोषण न मिलने का असर केवल उस समय की सेहत पर नहीं पड़ता, बल्कि शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और आगे के स्वास्थ्य पर भी असर डालता है. इसलिए बच्चों की थाली में केवल भोजन की मात्रा नहीं, उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है. मिलेट्स से मजबूत हो सकती है थाली रिपोर्ट में श्रीअन्न यानी मिलेट्स को भी उपयोगी विकल्प के रूप में सामने रखा गया है. ज्वार, बाजरा और रागी जैसे अनाज फाइबर और कई पोषक तत्व देते हैं. इन्हें दाल, दूध, दही, अंडे या अन्य प्रोटीन सोर्स के साथ जोड़ा जाए तो रोज का भोजन ज्यादा संतुलित बन सकता है. इसका मतलब है कि आपको अपनी थानी में प्रोटीन की मात्रा बढ़ान के लिए उसे बदलने की बजाय केवल कुछ पोषक चीजों को जोड़ने की जरूरत है. यह भी पढ़ें: मेडिकल सेक्टर में किस खोज के लिए दिया गया नोबेल, इससे क्या फायदा?
भारतीय थाली में दाल-चावल, रोटी-सब्जी और दूध जैसी चीजें लंबे समय से रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा रही हैं. फिर भी प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के मामले में बड़ी आबादी पीछे है. द स्टेट ऑफ प्रोटीन एंड फाइबर इन अर्बन इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट ने इसी कमी की ओर ध्यान खींचा है. रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 73 प्रतिशत लोगों के रोज के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नहीं पहुंच पा रहा. यानी भोजन पेट भरने के लिए तो पर्याप्त है लेकिन शरीर की जरूरत के हिसाब से उसका पोषण संतुलित नहीं है.
यह स्टडी पेप्सिको इंडिया और यूरोमानिटर इंटरनेशनल द्वारा भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (IIMR) के सहयोग से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि जैसे 5 बड़े शहरों में किया गया है. ऐसे में जानिए पूरी रिपोर्ट के बारे में.
शहरों में भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरों में 44 प्रतिशत और गांवों में 36 प्रतिशत लोग रोज की प्रोटीन जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं. यह अंतर बताता है कि समस्या केवल खाने की उपलब्धता से जुड़ी नहीं है. भोजन की पसंद, कीमत, जागरूकता और रोजमर्रा की आदतें भी इसके पीछे की वजह है. खासकर शहरों में बाहर का खाना व जल्दी तैयार होने वाले विकल्प और बदलती लाइफस्टाइल के बीच पोषक भोजन को नियमित रखना चुनौती बन रहा है. शहरी लोगों में बड़ी संख्या ऐसी थी जिन्हें रोजाना 41 ग्राम से कम प्रोटीन मिला. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 60 प्रतिशत लोगों को प्रोटीन वाले फूड प्रोडक्ट महंगे लगते है. वहीं 57 प्रतिशत ने सुविधाजनक विकल्पों की कमी को भी वजह बताया. इसका मतलब है कि लोग प्रोटीन को जरूरी मानते हैं, लेकिन उसे रोज की थाली में जोड़ने का आसान और सस्ता तरीका हर किसी के पास नहीं है.
प्रोटीन के लिए महंगे विकल्प जरूरी नहीं
प्रोटीन के लिए महंगे या खास फूड प्रोडक्ट की तलाश करने की जरूरत नहीं है. भारतीय रसोई में कई ऐसे विकल्प पहले से मौजूद हैं जिन्हें थोड़ी समझदारी के साथ भोजन का हिस्सा बनाकर प्रोटीन की कमी को पूरा किया जा सकता है. दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मेवे प्रोटीन के बेहतरीन सोर्स है. वहीं वेजिटेरियन फूड भोजन लेने वालों के लिए दाल, चना, सोया और दूध से बने फूड प्रोडक्ट हैं. अनाज के साथ दाल या दूसरी प्रोटीन वाली चीज जोड़ने से भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है.
यह भी पढ़ें: एक दिन में कितना प्रोटीन जरूरी, उम्र के हिसाब से जानें यहां
बच्चों के पोषण पर सबसे ज्यादा ध्यान
रिपोर्ट में पांच साल से कम उम्र के हर तीसरे बच्चे में पोषण की कमी की बात सामने आई है. करीब 35 प्रतिशत बच्चे बौनेपन और 32 प्रतिशत कम वजन की समस्या से प्रभावित बताए गए हैं. बचपन में पर्याप्त पोषण न मिलने का असर केवल उस समय की सेहत पर नहीं पड़ता, बल्कि शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और आगे के स्वास्थ्य पर भी असर डालता है. इसलिए बच्चों की थाली में केवल भोजन की मात्रा नहीं, उसकी गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है.
मिलेट्स से मजबूत हो सकती है थाली
रिपोर्ट में श्रीअन्न यानी मिलेट्स को भी उपयोगी विकल्प के रूप में सामने रखा गया है. ज्वार, बाजरा और रागी जैसे अनाज फाइबर और कई पोषक तत्व देते हैं. इन्हें दाल, दूध, दही, अंडे या अन्य प्रोटीन सोर्स के साथ जोड़ा जाए तो रोज का भोजन ज्यादा संतुलित बन सकता है. इसका मतलब है कि आपको अपनी थानी में प्रोटीन की मात्रा बढ़ान के लिए उसे बदलने की बजाय केवल कुछ पोषक चीजों को जोड़ने की जरूरत है.
यह भी पढ़ें: मेडिकल सेक्टर में किस खोज के लिए दिया गया नोबेल, इससे क्या फायदा?
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