'देश के 44 फीसदी शहर गंभीर...', वायु प्रदूषण को लेकर जयराम रमेश का मोदी सरकार पर हमला

वायु प्रदूषण को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत में वायु प्रदूषण अब केवल कुछ महानगरों की समस्या नहीं, बल्कि यह एक देशव्यापी संकट बन चुका है, जिस पर सरकार की प्रतिक्रिया बेहद कमजोर और नाकाफी है. जयराम रमेश ने सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के ताज़ा सैटेलाइट आधारित रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि देश के करीब 44 प्रतिशत शहर लगातार गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं. CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 4,041 नगरों में से 1,787 शहरों में पिछले 5 सालों (2019-2024, कोविड वर्ष 2020 को छोड़कर) के दौरान PM 2.5 का वार्षिक स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहा है. इसका मतलब है कि देश का लगभग आधा शहरी भारत जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है. NCAP केवल 130 शहरों तक ही सीमितइतनी व्यापक समस्या के बावजूद सरकार का राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) केवल 130 शहरों तक ही सीमित है. इनमें से भी 28 शहरों में अब तक कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAAQMS) तक नहीं लगाए गए हैं. जिन 102 शहरों में निगरानी की व्यवस्था है, उनमें से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज किया गया है. कुल मिलाकर, NCAP फिलहाल देश के केवल 4 प्रतिशत गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों को ही कवर कर पा रहा है. जयराम रमेश ने कसा तंजजयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिसे सरकार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम कहती है, वह अब “नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम” बनकर रह गया है. उन्होंने NCAP की गहन समीक्षा, पुनर्गठन और बड़े पैमाने पर सुधार की मांग की. कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत के मौजूदा वायु गुणवत्ता मानक बेहद कमजोर हैं. WHO के मुताबिक 24 घंटे की सीमा 15 माइक्रोग्राम से कम और वार्षिक सीमा 5 माइक्रोग्राम से कम होनी चाहिए. यानी भारत के मानक अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों से कई गुना पीछे हैं.  कांग्रेस ने यह भी मांग की कि सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में 2026 के अंत तक FGD सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाए जाएं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता बहाल की जाए और पिछले 10 वर्षों में किए गए जन-विरोधी पर्यावरण संशोधनों को वापस लिया जाए. ये भी पढ़ें Asaduddin Owaisi Statement: 'ये पाकिस्तान नहीं है और न ही एक....', ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत के बयान पर दिया जवाब

Jan 11, 2026 - 15:30
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'देश के 44 फीसदी शहर गंभीर...', वायु प्रदूषण को लेकर जयराम रमेश का मोदी सरकार पर हमला

वायु प्रदूषण को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत में वायु प्रदूषण अब केवल कुछ महानगरों की समस्या नहीं, बल्कि यह एक देशव्यापी संकट बन चुका है, जिस पर सरकार की प्रतिक्रिया बेहद कमजोर और नाकाफी है.

जयराम रमेश ने सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के ताज़ा सैटेलाइट आधारित रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि देश के करीब 44 प्रतिशत शहर लगातार गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं. CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 4,041 नगरों में से 1,787 शहरों में पिछले 5 सालों (2019-2024, कोविड वर्ष 2020 को छोड़कर) के दौरान PM 2.5 का वार्षिक स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहा है. इसका मतलब है कि देश का लगभग आधा शहरी भारत जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है.

NCAP केवल 130 शहरों तक ही सीमित
इतनी व्यापक समस्या के बावजूद सरकार का राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) केवल 130 शहरों तक ही सीमित है. इनमें से भी 28 शहरों में अब तक कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAAQMS) तक नहीं लगाए गए हैं. जिन 102 शहरों में निगरानी की व्यवस्था है, उनमें से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज किया गया है. कुल मिलाकर, NCAP फिलहाल देश के केवल 4 प्रतिशत गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों को ही कवर कर पा रहा है.

जयराम रमेश ने कसा तंज
जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिसे सरकार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम कहती है, वह अब “नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम” बनकर रह गया है. उन्होंने NCAP की गहन समीक्षा, पुनर्गठन और बड़े पैमाने पर सुधार की मांग की. कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत के मौजूदा वायु गुणवत्ता मानक बेहद कमजोर हैं. WHO के मुताबिक 24 घंटे की सीमा 15 माइक्रोग्राम से कम और वार्षिक सीमा 5 माइक्रोग्राम से कम होनी चाहिए. यानी भारत के मानक अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों से कई गुना पीछे हैं. 

कांग्रेस ने यह भी मांग की कि सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में 2026 के अंत तक FGD सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाए जाएं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता बहाल की जाए और पिछले 10 वर्षों में किए गए जन-विरोधी पर्यावरण संशोधनों को वापस लिया जाए.

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