तेलंगाना में ऑटो LPG की भारी किल्लत, केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

Middle East Tensions: तेलंगाना में ऑटो एलपीजी की गंभीर कमी ने हजारों ऑटो चालकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है. राज्य के मंत्री N Uttam Kumar Reddy ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. मंत्री ने बताया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हो रही है. हालांकि घरेलू एलपीजी की सप्लाई सामान्य रखी गई है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी के वितरण को नियंत्रित किया गया है, जिसका सबसे ज्यादा असर ऑटो एलपीजी सेक्टर पर पड़ा है. राज्य में करीब 1 लाख ऑटो-रिक्शा एलपीजी पर निर्भर हैं, जबकि रोजाना लगभग 55 मीट्रिक टन की कमी दर्ज की जा रही है. एलपीजी वितरण की बात करें तो Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी सार्वजनिक कंपनियों की हिस्सेदारी सिर्फ 20% है, जबकि 80% आपूर्ति निजी कंपनियों के जरिए होती है. मौजूदा संकट में निजी आउटलेट्स पर सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं. मंत्री ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. सार्वजनिक आउटलेट्स पर ऑटो एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाई जाए, निजी वितरकों को भी सार्वजनिक कंपनियों से सप्लाई सुनिश्चित की जाए, और निजी पंपों पर बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाए. फिलहाल कीमतों में भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है, जहां सरकारी पंपों पर एलपीजी करीब 75 रुपये प्रति लीटर है, वहीं निजी पंपों पर यह 93 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है. अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर गहरा असर पड़ सकता है.

Apr 1, 2026 - 11:30
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तेलंगाना में ऑटो LPG की भारी किल्लत, केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

Middle East Tensions: तेलंगाना में ऑटो एलपीजी की गंभीर कमी ने हजारों ऑटो चालकों की आजीविका पर संकट खड़ा कर दिया है. राज्य के मंत्री N Uttam Kumar Reddy ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.

मंत्री ने बताया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, खासकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हो रही है. हालांकि घरेलू एलपीजी की सप्लाई सामान्य रखी गई है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी के वितरण को नियंत्रित किया गया है, जिसका सबसे ज्यादा असर ऑटो एलपीजी सेक्टर पर पड़ा है. राज्य में करीब 1 लाख ऑटो-रिक्शा एलपीजी पर निर्भर हैं, जबकि रोजाना लगभग 55 मीट्रिक टन की कमी दर्ज की जा रही है.

एलपीजी वितरण की बात करें तो Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी सार्वजनिक कंपनियों की हिस्सेदारी सिर्फ 20% है, जबकि 80% आपूर्ति निजी कंपनियों के जरिए होती है. मौजूदा संकट में निजी आउटलेट्स पर सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं.

मंत्री ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. सार्वजनिक आउटलेट्स पर ऑटो एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाई जाए, निजी वितरकों को भी सार्वजनिक कंपनियों से सप्लाई सुनिश्चित की जाए, और निजी पंपों पर बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाए.

फिलहाल कीमतों में भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है, जहां सरकारी पंपों पर एलपीजी करीब 75 रुपये प्रति लीटर है, वहीं निजी पंपों पर यह 93 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है. अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर गहरा असर पड़ सकता है.

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