तेजस बनाने वाला HAL अब बना रहा सिविल विमान, रूस के साथ डील, जानें कब तक बनकर होगा तैयार

मिलिट्री एयरक्राफ्ट बनाने वाली सरकारी एविएशन कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) अब सिविल एविएशन क्षेत्र में कदम रखने जा रही है. हैदराबाद में शुरू हुई विंग्स इंडिया प्रदर्शनी में एचएएल ने रूस के साथ मिलकर बनाए जाने वाला सुपरजेट (एसजे-100) विमान के साथ, ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर और हिंदुस्तान (एच-228) को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है. एचएएल के सीएमडी डीके सुनील कुमार के मुताबिक एसजे-100 यात्री विमान के लिए रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के साथ करार हो गया है और अगले तीन साल में मेक इन इंडिया के तहत ये बेहद खास प्लेन भारत में बनकर तैयार हो जाएगा. इन विमान का निर्माण नासिक (और कानपुर) में किया जाएगा क्योंकि एचएएल की नासिक फैसिलिटी में रूस की मदद से करीब 250 सुखोई फाइटर जेट बनाए गए थे. अब इन विमानों का निर्माण पूरा हो चुका है. उड़ान स्कीम के तहत होगा इस्तेमालइन एसजे-100 (सुखोई सुपरजेट) विमानों का इस्तेमाल उड़ान स्कीम के तहत छोटी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए किया जाएगा. देश की उड़ान स्कीम (टायर-2 और टायर-3 शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने की योजना) के तहत इस वक्त देश में करीब 200 छोटे विमानों की जरूरत है. साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों (जैसे श्रीलंका, मालदीव इत्यादि) को इसमें जोड़ दें तो 350 अतिरिक्त विमानों की आवश्यकता होगी. एसजे-100 विमान में कुल 103 यात्री बैठ सकते हैं और रूस में इस तरह के 200 विमानों को 16 कमर्शियल एयरलाइंस, घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल करती है. एचएएल के मुताबिक कम दूरी की उड़ानों के लिए एसजे-100 एक गेम चेंजर साबित होगा. साथ ही एचएएल और यूएसी की साझेदारी एक दूसरे पर भरोसे का नतीजा है. एचएएल ने भारतीय वायुसेना के लिए रूस से लाइसेंस के जरिए करीब 250 सुखोई लड़ाकू विमान और 600 मिग-21 फाइटर जेट का निर्माण देश में ही किया है, लेकिन रूस से सिविल एयरक्राफ्ट के लिए अपनी तरह का ये पहला समझौता है. क्या-क्या बनाती है एचएएलएचएएल के सीएमडी ने बताया कि आने वाले वर्षों में कंपनी, सिविल सेक्टर के लिए 25 प्रतिशत ऑपरेशन करेगी. अभी ये हिस्सा महज 5-6 प्रतिशत है. फिलहाल, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के अलावा एचएएल, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड, एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव और एचटीटी (ट्रेनर) एयरक्राफ्ट बनाती है. ये सभी मिलिट्री एयरक्राफ्ट हैं. 1961 में हालांकि, एचएएल ने एवरो (एवीआरओ एचएस-748) यात्री विमान को भी बनाया था. लेकिन ये प्रोजेक्ट 1988 में बंद हो गया था. एचएएल ने डोरनियर मिलिट्री एयरक्राफ्ट के सिविल वर्जन, हिंदुस्तान-228 का निर्माण शुरू कर दिया है. 16 सीट वाले इस प्लेन को एलायंस एयरलाइंस ने एचएएल से खरीदा है. साथ में, ये देश का पहला एक्सपोर्ट होने वाले सिविल विमान भी बन गया है. एचएएल ने 02 ऐसे विमान, कैरेबियन देश गुयाना को निर्यात किए हैं और जल्द दूसरे ऑर्डर भी मिलने जा रहे हैं. ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टरएचएएल ने लाइट एडवांस हेलीकॉप्टर (एएलएच) के सिविल वर्जन ध्रुव-एनजी पर काम करना शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) जल्द इस हेलीकॉप्टर का सर्टिफिकेशन जारी कर देगा. ये भी पढ़ें शराब पीकर रैश ड्राइविंग करने पर कन्नड़ एक्टर मयूर पटेल के खिलाफ केस दर्ज, 4 गाड़ियां हुई डैमेज

Jan 29, 2026 - 15:30
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तेजस बनाने वाला HAL अब बना रहा सिविल विमान, रूस के साथ डील, जानें कब तक बनकर होगा तैयार

मिलिट्री एयरक्राफ्ट बनाने वाली सरकारी एविएशन कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) अब सिविल एविएशन क्षेत्र में कदम रखने जा रही है. हैदराबाद में शुरू हुई विंग्स इंडिया प्रदर्शनी में एचएएल ने रूस के साथ मिलकर बनाए जाने वाला सुपरजेट (एसजे-100) विमान के साथ, ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर और हिंदुस्तान (एच-228) को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है.

एचएएल के सीएमडी डीके सुनील कुमार के मुताबिक एसजे-100 यात्री विमान के लिए रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के साथ करार हो गया है और अगले तीन साल में मेक इन इंडिया के तहत ये बेहद खास प्लेन भारत में बनकर तैयार हो जाएगा. इन विमान का निर्माण नासिक (और कानपुर) में किया जाएगा क्योंकि एचएएल की नासिक फैसिलिटी में रूस की मदद से करीब 250 सुखोई फाइटर जेट बनाए गए थे. अब इन विमानों का निर्माण पूरा हो चुका है.

उड़ान स्कीम के तहत होगा इस्तेमाल
इन एसजे-100 (सुखोई सुपरजेट) विमानों का इस्तेमाल उड़ान स्कीम के तहत छोटी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए किया जाएगा. देश की उड़ान स्कीम (टायर-2 और टायर-3 शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने की योजना) के तहत इस वक्त देश में करीब 200 छोटे विमानों की जरूरत है. साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों (जैसे श्रीलंका, मालदीव इत्यादि) को इसमें जोड़ दें तो 350 अतिरिक्त विमानों की आवश्यकता होगी. एसजे-100 विमान में कुल 103 यात्री बैठ सकते हैं और रूस में इस तरह के 200 विमानों को 16 कमर्शियल एयरलाइंस, घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल करती है.

एचएएल के मुताबिक कम दूरी की उड़ानों के लिए एसजे-100 एक गेम चेंजर साबित होगा. साथ ही एचएएल और यूएसी की साझेदारी एक दूसरे पर भरोसे का नतीजा है. एचएएल ने भारतीय वायुसेना के लिए रूस से लाइसेंस के जरिए करीब 250 सुखोई लड़ाकू विमान और 600 मिग-21 फाइटर जेट का निर्माण देश में ही किया है, लेकिन रूस से सिविल एयरक्राफ्ट के लिए अपनी तरह का ये पहला समझौता है.

क्या-क्या बनाती है एचएएल
एचएएल के सीएमडी ने बताया कि आने वाले वर्षों में कंपनी, सिविल सेक्टर के लिए 25 प्रतिशत ऑपरेशन करेगी. अभी ये हिस्सा महज 5-6 प्रतिशत है. फिलहाल, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के अलावा एचएएल, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड, एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव और एचटीटी (ट्रेनर) एयरक्राफ्ट बनाती है. ये सभी मिलिट्री एयरक्राफ्ट हैं. 1961 में हालांकि, एचएएल ने एवरो (एवीआरओ एचएस-748) यात्री विमान को भी बनाया था. लेकिन ये प्रोजेक्ट 1988 में बंद हो गया था.

एचएएल ने डोरनियर मिलिट्री एयरक्राफ्ट के सिविल वर्जन, हिंदुस्तान-228 का निर्माण शुरू कर दिया है. 16 सीट वाले इस प्लेन को एलायंस एयरलाइंस ने एचएएल से खरीदा है. साथ में, ये देश का पहला एक्सपोर्ट होने वाले सिविल विमान भी बन गया है. एचएएल ने 02 ऐसे विमान, कैरेबियन देश गुयाना को निर्यात किए हैं और जल्द दूसरे ऑर्डर भी मिलने जा रहे हैं.

ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर
एचएएल ने लाइट एडवांस हेलीकॉप्टर (एएलएच) के सिविल वर्जन ध्रुव-एनजी पर काम करना शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) जल्द इस हेलीकॉप्टर का सर्टिफिकेशन जारी कर देगा.

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