ट्रेड डील पर ट्रंप के दावों में कितना दम? भारत-अमेरिका एग्रीमेंट को लेकर इन सवालों के नहीं मिले जवाब
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा से घरेलू शेयर बाजारों में राहत भरी तेजी आई और निर्यातकों में उत्साह का माहौल बना. हालांकि इस ट्रेड डील के बारे में अभी कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिले हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट से सबसे अहम बात यह सामने आई है कि भारतीय निर्यात पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ शुल्क तत्काल प्रभाव से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार (3 फरवरी) को यह स्पष्ट किया कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक बहुत अच्छा व्यापार समझौता किया है, जो पड़ोसी देशों की तुलना में बेहतर है. भारत के साथ-साथ हाई अमेरिकी टैरिफ का सामना करने वाले देशों में चीन, वियतनाम (20 फीसदी), मलेशिया (19 फीसदी), बांग्लादेश (20 फीसदी) कंबोडिया और थाईलैंड (19 फीसदी) शामिल है. ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में टैरिफ दरों, भारत की तेल खरीद रणनीति, रूसी कच्चे तेल के आयात पर रोक, अमेरिकी सामानों की खरीद बढ़ाने और कई अन्य मुद्दों पर कई दावे किए. भारत ने इनमें से अधिकांश दावों का समर्थन नहीं किया है, जिससे भारत-अमेरिका ट्रेड डील से संबंधित कई सवालों के जवाब अभी भी नहीं मिले हैं. पहला सवाल- क्या भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा? अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'उन्होंने (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) रूस से तेल खरीद बंद करने के साथ-साथ अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है. इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी, जिसमें हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं.' रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि उन्हें भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोकने के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय रिफाइनरियों को सरकार से रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने का कोई निर्देश नहीं मिला है और उन्हें पहले से चल रहे लेन-देन को समाप्त करने के लिए समय की जरूरत होगी. दूसरा सवाल- क्या भारत अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर शून्य कर देगा? ट्रंप ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति मित्रता और सम्मान के कारण और उनके अनुरोध पर तत्काल प्रभाव से हमने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की है. इसके तहत अमेरिका रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर देगा. वे (भारत) भी इसी तरह अमेरिका के खिलाफ अपने शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को शून्य तक कम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे.' वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि भारत को आयातित अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क शून्य किया जाएगा या नहीं. उन्होंने बताया कि ट्रेड डील के अंतिम विवरण पर अभी भी काम चल रहा है और जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा. ट्रंप के व्यापार समझौते की घोषणा के बाद पीएम मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट में भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बाधाओं का जिक्र नहीं था. सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि ट्रेड डील के तहत क्या-क्या होने हैं ये तय हो चुका है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत कृषि उत्पादों के संबंध में कुछ सुरक्षा उपाय बनाए रख रहा है. तीसरा सवाल- क्या भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदेगा? ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी ने 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी एनर्जी, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और कई अन्य उत्पादों के अलावा, अमेरिकी उत्पाद खरीद के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है.' हालांकि ट्रंप के पोस्ट में कृषि उत्पादों का जिक्र है, वहीं पीयूष गोयल का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कृषि और डेयरी क्षेत्रों की रक्षा करेगा. साथ ही, अमेरिका से ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कोयले की खरीद बढ़ाने के संबंध में भारत की ओर से कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है.
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील की घोषणा से घरेलू शेयर बाजारों में राहत भरी तेजी आई और निर्यातकों में उत्साह का माहौल बना. हालांकि इस ट्रेड डील के बारे में अभी कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिले हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट से सबसे अहम बात यह सामने आई है कि भारतीय निर्यात पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ शुल्क तत्काल प्रभाव से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है.
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार (3 फरवरी) को यह स्पष्ट किया कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की रक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक बहुत अच्छा व्यापार समझौता किया है, जो पड़ोसी देशों की तुलना में बेहतर है. भारत के साथ-साथ हाई अमेरिकी टैरिफ का सामना करने वाले देशों में चीन, वियतनाम (20 फीसदी), मलेशिया (19 फीसदी), बांग्लादेश (20 फीसदी) कंबोडिया और थाईलैंड (19 फीसदी) शामिल है.
ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में टैरिफ दरों, भारत की तेल खरीद रणनीति, रूसी कच्चे तेल के आयात पर रोक, अमेरिकी सामानों की खरीद बढ़ाने और कई अन्य मुद्दों पर कई दावे किए. भारत ने इनमें से अधिकांश दावों का समर्थन नहीं किया है, जिससे भारत-अमेरिका ट्रेड डील से संबंधित कई सवालों के जवाब अभी भी नहीं मिले हैं.
पहला सवाल- क्या भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'उन्होंने (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) रूस से तेल खरीद बंद करने के साथ-साथ अमेरिका और वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है. इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी, जिसमें हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं.' रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि उन्हें भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोकने के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय रिफाइनरियों को सरकार से रूसी कच्चे तेल की खरीद रोकने का कोई निर्देश नहीं मिला है और उन्हें पहले से चल रहे लेन-देन को समाप्त करने के लिए समय की जरूरत होगी.
दूसरा सवाल- क्या भारत अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर शून्य कर देगा?
ट्रंप ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति मित्रता और सम्मान के कारण और उनके अनुरोध पर तत्काल प्रभाव से हमने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की है. इसके तहत अमेरिका रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर देगा. वे (भारत) भी इसी तरह अमेरिका के खिलाफ अपने शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को शून्य तक कम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे.'
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि भारत को आयातित अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क शून्य किया जाएगा या नहीं. उन्होंने बताया कि ट्रेड डील के अंतिम विवरण पर अभी भी काम चल रहा है और जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा. ट्रंप के व्यापार समझौते की घोषणा के बाद पीएम मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट में भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बाधाओं का जिक्र नहीं था. सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि ट्रेड डील के तहत क्या-क्या होने हैं ये तय हो चुका है, लेकिन इसे अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत कृषि उत्पादों के संबंध में कुछ सुरक्षा उपाय बनाए रख रहा है.
तीसरा सवाल- क्या भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदेगा?
ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी ने 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी एनर्जी, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और कई अन्य उत्पादों के अलावा, अमेरिकी उत्पाद खरीद के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है.' हालांकि ट्रंप के पोस्ट में कृषि उत्पादों का जिक्र है, वहीं पीयूष गोयल का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कृषि और डेयरी क्षेत्रों की रक्षा करेगा. साथ ही, अमेरिका से ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कोयले की खरीद बढ़ाने के संबंध में भारत की ओर से कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है.
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