जिस पूर्व आरबीआई गवर्नर के समय हुई नोटबंदी, अब आईएमएफ ने उर्जित पटेल को दी ये बड़ी जिम्मेदारी
Former RBI Governor Urjit Patel Appointed IMF Executive Director: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को तीन साल के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) का एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. केन्या में जन्मे भारतीय अर्थशास्त्री उर्जित पटेल की यह वापसी आईएमएफ में करीब तीन दशक बाद हो रही है. वे पहले भी पांच साल तक आईएमएफ से जुड़े रहे थे. शुरुआत वाशिंगटन डीसी में हुई और फिर 1992 में वे नई दिल्ली में डिप्टी रेसिडेंट रिप्रजेंटेटिव बने. शैक्षणिक पृष्ठभूमि डॉ. पटेल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है. उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री ली, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम.फिल किया और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से बीएससी की पढ़ाई की. सरकार की तरफ से उनकी नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब मौजूदा एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (इंडिया) कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम का कार्यकाल अप्रत्याशित तौर पर छह महीने पहले ही खत्म कर दिया गया. आरबीआई गवर्नर के रूप में कार्यकाल डॉ. पटेल 2014 में आरबीआई के 24वें गवर्नर बने थे और रघुराम राजन की जगह ली थी. वे पहले ऐसे आरबीआई गवर्नर भी रहे जिन्होंने अपने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर दिसंबर 2018 में इस्तीफा दिया. उस समय आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच मतभेद सार्वजनिक तौर पर सामने आए थे. इससे पहले वे आरबीआई में डिप्टी गवर्नर के रूप में मौद्रिक नीति, आर्थिक शोध, डिपॉजिट इंश्योरेंस और सांख्यिकी प्रबंधन जैसे विभागों को संभाल चुके थे. रणनीतिक महत्व: पाकिस्तान का मुद्दा उर्जित पटेल की नियुक्ति ऐसे वक्त पर हुई है जब भारत ने आईएमएफ बेलआउट प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान को दी जा रही वित्तीय मदद की कड़ी आलोचना की है. भारत ने चिंता जताई है कि इस फंड का इस्तेमाल इस्लामाबाद की तरफ से सीमा पार आतंकवाद और युद्ध जैसे गतिविधियों में किया जा सकता है. ऐसे में पटेल की मौजूदगी आईएमएफ में भारत के हितों को और मजबूती से रखने के लिहाज से अहम मानी जा रही है. ये भी पढ़ें: ट्रंप टैरिफ टेंशन के बावजूद बाजार की मजबूत शुरुआत, 130 अंक ऊपर चढ़ा सेंसेक्स, 24550 के करीब निफ्टी

Former RBI Governor Urjit Patel Appointed IMF Executive Director: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को तीन साल के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) का एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. केन्या में जन्मे भारतीय अर्थशास्त्री उर्जित पटेल की यह वापसी आईएमएफ में करीब तीन दशक बाद हो रही है. वे पहले भी पांच साल तक आईएमएफ से जुड़े रहे थे. शुरुआत वाशिंगटन डीसी में हुई और फिर 1992 में वे नई दिल्ली में डिप्टी रेसिडेंट रिप्रजेंटेटिव बने.
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
डॉ. पटेल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है. उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री ली, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम.फिल किया और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से बीएससी की पढ़ाई की. सरकार की तरफ से उनकी नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब मौजूदा एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (इंडिया) कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम का कार्यकाल अप्रत्याशित तौर पर छह महीने पहले ही खत्म कर दिया गया.
आरबीआई गवर्नर के रूप में कार्यकाल
डॉ. पटेल 2014 में आरबीआई के 24वें गवर्नर बने थे और रघुराम राजन की जगह ली थी. वे पहले ऐसे आरबीआई गवर्नर भी रहे जिन्होंने अपने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर दिसंबर 2018 में इस्तीफा दिया. उस समय आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच मतभेद सार्वजनिक तौर पर सामने आए थे. इससे पहले वे आरबीआई में डिप्टी गवर्नर के रूप में मौद्रिक नीति, आर्थिक शोध, डिपॉजिट इंश्योरेंस और सांख्यिकी प्रबंधन जैसे विभागों को संभाल चुके थे.
रणनीतिक महत्व: पाकिस्तान का मुद्दा
उर्जित पटेल की नियुक्ति ऐसे वक्त पर हुई है जब भारत ने आईएमएफ बेलआउट प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान को दी जा रही वित्तीय मदद की कड़ी आलोचना की है. भारत ने चिंता जताई है कि इस फंड का इस्तेमाल इस्लामाबाद की तरफ से सीमा पार आतंकवाद और युद्ध जैसे गतिविधियों में किया जा सकता है. ऐसे में पटेल की मौजूदगी आईएमएफ में भारत के हितों को और मजबूती से रखने के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
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