गैस सिलेंडर या इंडक्शन? खाना बनाने में किससे आता है कम खर्च, जानकर चौंक जाएंगे!

LPG Vs Induction: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है. भारत में भी इसी कारण एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. सरकार का कहना है कि घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है लेकिन कई जगहों पर सप्लाई अनियमित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसी वजह से अब कई लोग यह सोचने लगे हैं कि क्या खाना बनाने के लिए इंडक्शन कुकटॉप ज्यादा किफायती विकल्प हो सकता है. कई शहरों में एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें देश के कई शहरों जैसे नोएडा, लखनऊ, दिल्ली और पुणे में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों की खबरें सामने आई हैं. उपभोक्ताओं का कहना है कि सिलेंडर बुक कराने और समय पर डिलीवरी पाने में मुश्किल हो रही है. इस समस्या का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है. कई रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय भी गैस सप्लाई में देरी के कारण प्रभावित हो रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ होटल और रेस्टोरेंट को गैस की कमी के चलते अपने मेन्यू से कुछ व्यंजन हटाने तक की नौबत आ गई है. LPG और इंडक्शन में खर्च का अंतर सामान्य घरेलू एलपीजी सिलेंडर में करीब 14.2 किलोग्राम गैस होती है और इसकी कीमत लगभग 950 रुपये के आसपास होती है. लेकिन गैस चूल्हे की दक्षता लगभग 55 प्रतिशत मानी जाती है यानी खाना बनाते समय काफी ऊर्जा गर्मी के रूप में व्यर्थ चली जाती है. दूसरी ओर इंडक्शन कुकटॉप बिजली की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा सीधे खाना पकाने में इस्तेमाल करता है इसलिए इसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है. कई अध्ययनों के अनुसार यदि बिजली का टैरिफ बहुत ज्यादा न हो तो इंडक्शन पर खाना बनाना सस्ता पड़ सकता है. कुछ आकलनों में यह भी कहा गया है कि एक परिवार हर महीने लगभग 180 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की बचत कर सकता है. ऊर्जा अर्थशास्त्र से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिना सब्सिडी वाले एलपीजी की तुलना में इलेक्ट्रिक स्टोव का इस्तेमाल कई मामलों में कम खर्चीला साबित हो सकता है. फिर भी लोग LPG को क्यों देते हैं प्राथमिकता हालांकि इंडक्शन कुकटॉप से खर्च कम हो सकता है लेकिन देश के कई हिस्सों में लोग अब भी एलपीजी सिलेंडर को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं. इसकी एक बड़ी वजह बिजली कटौती है. जब बिजली नहीं होती तब गैस चूल्हा ही काम आता है. इसके अलावा भारतीय खाना पकाने के कई पारंपरिक तरीके जैसे रोटी सेंकना, तड़का लगाना या सीधे आंच पर पकाना गैस चूल्हे पर ज्यादा आसान होता है. इंडक्शन अपनाने में एक और खर्च इंडक्शन कुकटॉप इस्तेमाल करने के लिए खास तरह के बर्तन की जरूरत होती है. भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले कई पारंपरिक बर्तन इंडक्शन के लिए उपयुक्त नहीं होते. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को इंडक्शन अपनाने के लिए नए बर्तन खरीदने पड़ सकते हैं जिससे शुरुआती खर्च बढ़ जाता है. यही वजह है कि लागत कम होने के बावजूद कई परिवार अभी भी एलपीजी सिलेंडर को ही प्राथमिकता देते हैं. इंडक्शन कुकटॉप कुछ परिस्थितियों में सस्ता विकल्प साबित हो सकता है लेकिन बिजली की उपलब्धता, शुरुआती खर्च और खाना बनाने की आदतें भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. यह भी पढ़ें: अगर आपने भी की ये गलती तो AC ऑन करते ही होगा धमाका! जानिए कैसे इन हादसों से बचा जाए

Mar 14, 2026 - 12:30
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गैस सिलेंडर या इंडक्शन? खाना बनाने में किससे आता है कम खर्च, जानकर चौंक जाएंगे!

LPG Vs Induction: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है. भारत में भी इसी कारण एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. सरकार का कहना है कि घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है लेकिन कई जगहों पर सप्लाई अनियमित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसी वजह से अब कई लोग यह सोचने लगे हैं कि क्या खाना बनाने के लिए इंडक्शन कुकटॉप ज्यादा किफायती विकल्प हो सकता है.

कई शहरों में एलपीजी सप्लाई को लेकर शिकायतें

देश के कई शहरों जैसे नोएडा, लखनऊ, दिल्ली और पुणे में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों की खबरें सामने आई हैं. उपभोक्ताओं का कहना है कि सिलेंडर बुक कराने और समय पर डिलीवरी पाने में मुश्किल हो रही है. इस समस्या का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है. कई रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसाय भी गैस सप्लाई में देरी के कारण प्रभावित हो रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ होटल और रेस्टोरेंट को गैस की कमी के चलते अपने मेन्यू से कुछ व्यंजन हटाने तक की नौबत आ गई है.

LPG और इंडक्शन में खर्च का अंतर

सामान्य घरेलू एलपीजी सिलेंडर में करीब 14.2 किलोग्राम गैस होती है और इसकी कीमत लगभग 950 रुपये के आसपास होती है. लेकिन गैस चूल्हे की दक्षता लगभग 55 प्रतिशत मानी जाती है यानी खाना बनाते समय काफी ऊर्जा गर्मी के रूप में व्यर्थ चली जाती है. दूसरी ओर इंडक्शन कुकटॉप बिजली की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा सीधे खाना पकाने में इस्तेमाल करता है इसलिए इसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है. कई अध्ययनों के अनुसार यदि बिजली का टैरिफ बहुत ज्यादा न हो तो इंडक्शन पर खाना बनाना सस्ता पड़ सकता है.

कुछ आकलनों में यह भी कहा गया है कि एक परिवार हर महीने लगभग 180 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की बचत कर सकता है. ऊर्जा अर्थशास्त्र से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक बिना सब्सिडी वाले एलपीजी की तुलना में इलेक्ट्रिक स्टोव का इस्तेमाल कई मामलों में कम खर्चीला साबित हो सकता है.

फिर भी लोग LPG को क्यों देते हैं प्राथमिकता

हालांकि इंडक्शन कुकटॉप से खर्च कम हो सकता है लेकिन देश के कई हिस्सों में लोग अब भी एलपीजी सिलेंडर को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं. इसकी एक बड़ी वजह बिजली कटौती है. जब बिजली नहीं होती तब गैस चूल्हा ही काम आता है. इसके अलावा भारतीय खाना पकाने के कई पारंपरिक तरीके जैसे रोटी सेंकना, तड़का लगाना या सीधे आंच पर पकाना गैस चूल्हे पर ज्यादा आसान होता है.

इंडक्शन अपनाने में एक और खर्च

इंडक्शन कुकटॉप इस्तेमाल करने के लिए खास तरह के बर्तन की जरूरत होती है. भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले कई पारंपरिक बर्तन इंडक्शन के लिए उपयुक्त नहीं होते. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को इंडक्शन अपनाने के लिए नए बर्तन खरीदने पड़ सकते हैं जिससे शुरुआती खर्च बढ़ जाता है. यही वजह है कि लागत कम होने के बावजूद कई परिवार अभी भी एलपीजी सिलेंडर को ही प्राथमिकता देते हैं. इंडक्शन कुकटॉप कुछ परिस्थितियों में सस्ता विकल्प साबित हो सकता है लेकिन बिजली की उपलब्धता, शुरुआती खर्च और खाना बनाने की आदतें भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

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अगर आपने भी की ये गलती तो AC ऑन करते ही होगा धमाका! जानिए कैसे इन हादसों से बचा जाए

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