खरीफ सीजन- अल नीनो के असर को लेकर क्या तैयारी? PMO की हाईलेवल रिव्यू मीटिंग
अल नीनों के प्रभाव और खरीफ सीजन को लेकर पीएमो में मंगलवार को हाई लेवल मीटिंग हुई. मीटिंग पीएम मोदी के प्रधान सचिव डॉ.पीके मिश्रा की अध्यक्षता में हुई. सेवा तीर्थ में हुई इस बैठक में कई मंत्रालयों और डिपार्टमेंट की तरफ से की गई तैयारियों की समीक्षा की गई. मीटिंग में खेती, बिजली, सहकारिता, पेयजल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आर्थिक कार्य, पशुपालन, ग्रामीण विकास, पृथ्वी विज्ञान, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), सूचना एवं प्रसारण, उपभोक्ता मामले, वित्तीय सेवाएं, उर्वरक मंत्रालय तथा केंद्रीय जल आयोग सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिव और सीनियर अधिकारी मौजूद रहे. मौसम विभाग ने मीटिंग में क्या जानकारी दी ? मीटिंग की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जून और 7 जुलाई तक की वर्षा की स्थिति की जानकारी दी. मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचा, लेकिन 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद देशभर में वर्षा की कमी घटकर माइनस 12 प्रतिशत रह गई है. उन्होंने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज की गई है. 'मित्र आप ऐसा मत किया करिए...', अखिलेश यादव को ओम प्रकाश राजभर ने दे दी यह क्या सलाह? IMD की मानें तो जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है. हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि एल नीनो वाले हर साल में सामान्य से कम बारिश होना जरूरी नहीं है. स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है क्योंकि जुलाई में पूरे मानसून की 30 प्रतिशत से अधिक बारिश होती है. कृषि सचिव ने खरीफ फसलों पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें वर्षा, जलाशयों का जलस्तर, बुआई, कृषि इनपुट, बाजार की स्थिति तथा कीट एवं रोगों की निगरानी की जा रही है. उन्होंने बताया कि देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजना को अपडेट किया गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए 'भारतीय कृषि में एल नीनो जोखिम प्रबंधन' संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया भी जारी की है. मीटिंग में बताया गया कि जलवायु अनुकूल फसल किस्मों और नई तकनीकों की बदौलत कम वर्षा के बावजूद पिछले वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन स्थिर बना हुआ है. किसानों को इन योजनाओं से जोड़ने को कहा गया मीटिंग में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे को संवेदनशील राज्यों में तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा कृषि, वित्तीय सेवाएं और सहकारिता विभागों को समयबद्ध तरीके से अधिकतम किसानों को इन योजनाओं से जोड़ने को कहा गया. पशुपालन एवं डेयरी विभाग को सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का राज्य और जिला स्तर पर आकलन करने के निर्देश दिए गए।पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बताया कि संवेदनशील जिलों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. विभाग को जिला स्तर पर सूक्ष्म योजना और निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए. जल संसाधन विभाग ने भूजल और जलाशयों की स्थिति की जानकारी दी. फिलहाल स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन पूरे मानसून के दौरान लगातार निगरानी रखने पर जोर दिया गया. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि हीटवेव, अधिक आर्द्रता और डेंगू के संभावित प्रकोप को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है. निर्देश दिए गए कि सभी अलर्ट और सलाह जिला एवं स्थानीय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए. इस मुस्लिम देश के राष्ट्रपति हैं PM मोदी के फैन, भरे मंच से की जमकर तारीफ, बोले- 'वो ऐसे नेता जिनकी...'
अल नीनों के प्रभाव और खरीफ सीजन को लेकर पीएमो में मंगलवार को हाई लेवल मीटिंग हुई. मीटिंग पीएम मोदी के प्रधान सचिव डॉ.पीके मिश्रा की अध्यक्षता में हुई. सेवा तीर्थ में हुई इस बैठक में कई मंत्रालयों और डिपार्टमेंट की तरफ से की गई तैयारियों की समीक्षा की गई.
मीटिंग में खेती, बिजली, सहकारिता, पेयजल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, आर्थिक कार्य, पशुपालन, ग्रामीण विकास, पृथ्वी विज्ञान, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), सूचना एवं प्रसारण, उपभोक्ता मामले, वित्तीय सेवाएं, उर्वरक मंत्रालय तथा केंद्रीय जल आयोग सहित 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिव और सीनियर अधिकारी मौजूद रहे.
मौसम विभाग ने मीटिंग में क्या जानकारी दी ?
मीटिंग की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जून और 7 जुलाई तक की वर्षा की स्थिति की जानकारी दी. मौसम विभाग के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून लगभग 10 दिन की देरी से पहुंचा, लेकिन 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद देशभर में वर्षा की कमी घटकर माइनस 12 प्रतिशत रह गई है. उन्होंने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज की गई है.
'मित्र आप ऐसा मत किया करिए...', अखिलेश यादव को ओम प्रकाश राजभर ने दे दी यह क्या सलाह?
IMD की मानें तो जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है. हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि एल नीनो वाले हर साल में सामान्य से कम बारिश होना जरूरी नहीं है. स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है क्योंकि जुलाई में पूरे मानसून की 30 प्रतिशत से अधिक बारिश होती है.
कृषि सचिव ने खरीफ फसलों पर अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें वर्षा, जलाशयों का जलस्तर, बुआई, कृषि इनपुट, बाजार की स्थिति तथा कीट एवं रोगों की निगरानी की जा रही है.
उन्होंने बताया कि देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजना को अपडेट किया गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए 'भारतीय कृषि में एल नीनो जोखिम प्रबंधन' संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया भी जारी की है.
मीटिंग में बताया गया कि जलवायु अनुकूल फसल किस्मों और नई तकनीकों की बदौलत कम वर्षा के बावजूद पिछले वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन स्थिर बना हुआ है.
किसानों को इन योजनाओं से जोड़ने को कहा गया
मीटिंग में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे को संवेदनशील राज्यों में तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा कृषि, वित्तीय सेवाएं और सहकारिता विभागों को समयबद्ध तरीके से अधिकतम किसानों को इन योजनाओं से जोड़ने को कहा गया. पशुपालन एवं डेयरी विभाग को सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का राज्य और जिला स्तर पर आकलन करने के निर्देश दिए गए।पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बताया कि संवेदनशील जिलों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
विभाग को जिला स्तर पर सूक्ष्म योजना और निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए. जल संसाधन विभाग ने भूजल और जलाशयों की स्थिति की जानकारी दी. फिलहाल स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन पूरे मानसून के दौरान लगातार निगरानी रखने पर जोर दिया गया. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि हीटवेव, अधिक आर्द्रता और डेंगू के संभावित प्रकोप को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है. निर्देश दिए गए कि सभी अलर्ट और सलाह जिला एवं स्थानीय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए.
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