क्यों बजट से पहले भरभराकर गिरा शेयर बाजार? निवेशकों के दबाव में रहने की क्या है वजहें?

Share Market Crash: बजट से पहले कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शेयर बाजार का हाल बेहाल नजर आ रहा है. लगातार तीन सेशन की बढ़त के बाद गुरुवार को शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले. सुबह करीब 9:30 बजे BSE सेंसेक्स 619 अंकों के नुकसान के साथ 81947 के लेवल पर खुला. वहीं, 171 अंकों के नुकसान के साथ निफ्टी भी 25248 पर कारोबार करता नजर आया. गुरुवार को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इकोनॉमिक सर्वे पेश किया, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत ग्रोथ का अनुमान लगाया है. लेकिन बावजूद इसके शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट आई. आइए जानते हैं कि आज शेयर मार्केट क्रैश होने के पीछे के क्या कारण हैं? बिकवाली का दबाव  आज शेयर बाजार में आई गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जनवरी में अब तक 43,686.59 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं. इससे पहले 2025 में लगभग 19 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड आउटफ्लो हुआ है. अकेले 29 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 394 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. इससे बाजार पर दबाव बढ़ता चला जा रहा है. हालांकि, 2,638 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर घरेलू निवेशकों को स्थिति को कुछ हद तक संभाल कर रखा है. रुपये में गिरावट भी एक वजह डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का भी मार्केट सेंटिमेंट पर असर पड़ा है. शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.9125 पर खुला, जो पिछले बंद भाव 91.9550 के लगभग बराबर ही था. गुरुवार को यह अब तक के सबसे निचले स्तर 91.9850 पर पहुंच गया. इस महीने अब तक रुपया लगभग 2.3 गिर चुका है. अब यह धीरे-धीरे सितंबर 2022 के सबसे खराब मंथली परफॉर्मेंस के करीब पहुंचता जा रहा है. रुपये में इस गिरावट से निवेशक सतर्क हो गए हैं क्योंकि कमजोर रुपया कंपनियों के लिए इनपुट लागत बढ़ा सकता है. इससे कई सेक्टर्स पर बोझ बढ़ सकता है.  सेक्टोरल इंडेक्स भी लुढ़का  सेक्टोरल ट्रेंड्स भी मार्केट में आज आई गिरावट की एक बड़ी वजह है. शुरुआती कारोबार में ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स नेगेटिव जोन में कारोबार करते नजर आए. निफ्टी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स में 1 परसेंट से ज्यादा की गिरावट देखी गई. इसके सभी शेयर नीचे नजर आए. मेटल इंडेक्स तो 4 परसेंट के करीब लुढ़ गया. हिंडाल्को और टाटा स्टील जैसे शेयरों को नुकसान पहुंचा. फाइनेंशियल, ऑयल एंड गैस और कैपिटल गुड्स जैसे दूसरे सेक्टर भी दबाव में रहे. इसके अलावा, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत भी चिंता का विषय है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने ग्लोबल बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है. जियोजित के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा कि बजट के नजदीक आने के साथ ही मार्केट अभी 'हेडविंड और टेलविंड' दोनों का सामना कर रहा है# उन्होंने कहा, "जियोपॉलिटिकल मुद्दे ग्लोबल ट्रेड को परेशान कर रहे हैं, जिसमें ट्रंप द्वारा टैरिफ को हथियार बनाने की लगातार धमकियां शामिल हैं। ब्रेंट क्रूड का दाम बढ़कर लगभग 70 रुपये होना भारतीय मैक्रो के लिए एक हेडविंड है." ये भी पढ़ें: बजट से पहले शेयर बाजार धड़ाम, 619 अंक लुढ़का सेंसेक्स; निफ्टी भी 171 अंक नीचे 

Jan 30, 2026 - 16:30
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क्यों बजट से पहले भरभराकर गिरा शेयर बाजार? निवेशकों के दबाव में रहने की क्या है वजहें?

Share Market Crash: बजट से पहले कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शेयर बाजार का हाल बेहाल नजर आ रहा है. लगातार तीन सेशन की बढ़त के बाद गुरुवार को शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले. सुबह करीब 9:30 बजे BSE सेंसेक्स 619 अंकों के नुकसान के साथ 81947 के लेवल पर खुला. वहीं, 171 अंकों के नुकसान के साथ निफ्टी भी 25248 पर कारोबार करता नजर आया.

गुरुवार को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इकोनॉमिक सर्वे पेश किया, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत ग्रोथ का अनुमान लगाया है. लेकिन बावजूद इसके शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट आई. आइए जानते हैं कि आज शेयर मार्केट क्रैश होने के पीछे के क्या कारण हैं?

बिकवाली का दबाव 

आज शेयर बाजार में आई गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने जनवरी में अब तक 43,686.59 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं. इससे पहले 2025 में लगभग 19 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड आउटफ्लो हुआ है. अकेले 29 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 394 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. इससे बाजार पर दबाव बढ़ता चला जा रहा है. हालांकि, 2,638 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर घरेलू निवेशकों को स्थिति को कुछ हद तक संभाल कर रखा है.

रुपये में गिरावट भी एक वजह

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का भी मार्केट सेंटिमेंट पर असर पड़ा है. शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.9125 पर खुला, जो पिछले बंद भाव 91.9550 के लगभग बराबर ही था. गुरुवार को यह अब तक के सबसे निचले स्तर 91.9850 पर पहुंच गया. इस महीने अब तक रुपया लगभग 2.3 गिर चुका है. अब यह धीरे-धीरे सितंबर 2022 के सबसे खराब मंथली परफॉर्मेंस के करीब पहुंचता जा रहा है. रुपये में इस गिरावट से निवेशक सतर्क हो गए हैं क्योंकि कमजोर रुपया कंपनियों के लिए इनपुट लागत बढ़ा सकता है. इससे कई सेक्टर्स पर बोझ बढ़ सकता है. 

सेक्टोरल इंडेक्स भी लुढ़का 

सेक्टोरल ट्रेंड्स भी मार्केट में आज आई गिरावट की एक बड़ी वजह है. शुरुआती कारोबार में ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स नेगेटिव जोन में कारोबार करते नजर आए. निफ्टी इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडेक्स में 1 परसेंट से ज्यादा की गिरावट देखी गई. इसके सभी शेयर नीचे नजर आए. मेटल इंडेक्स तो 4 परसेंट के करीब लुढ़ गया. हिंडाल्को और टाटा स्टील जैसे शेयरों को नुकसान पहुंचा.

फाइनेंशियल, ऑयल एंड गैस और कैपिटल गुड्स जैसे दूसरे सेक्टर भी दबाव में रहे. इसके अलावा, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत भी चिंता का विषय है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने ग्लोबल बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है.

जियोजित के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा कि बजट के नजदीक आने के साथ ही मार्केट अभी 'हेडविंड और टेलविंड' दोनों का सामना कर रहा है# उन्होंने कहा, "जियोपॉलिटिकल मुद्दे ग्लोबल ट्रेड को परेशान कर रहे हैं, जिसमें ट्रंप द्वारा टैरिफ को हथियार बनाने की लगातार धमकियां शामिल हैं। ब्रेंट क्रूड का दाम बढ़कर लगभग 70 रुपये होना भारतीय मैक्रो के लिए एक हेडविंड है."

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बजट से पहले शेयर बाजार धड़ाम, 619 अंक लुढ़का सेंसेक्स; निफ्टी भी 171 अंक नीचे 

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