क्या है JPSC-JSSC विवाद, क्यों फूट पड़ा छात्रों का गुस्सा?
Jharkhand Student Protest: झारखंड में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा ( JPSC) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है. कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद राज्यभर के प्रतियोगी छात्र राज्य रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आते रहे हैं, इसलिए अब केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की जरूरत है. आखिर कैसे शुरू हुआ यह विवाद? झारखंड में इस विवाद की शुरुआत 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट घोषित होने के बाद हुई. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि आयोग ने कैटेगरी वाइज कट ऑफ जारी नहीं की और चयन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए. सोशल मीडिया पर कुछ ओएमआर शीट्स भी वायरल हुई, जिसके बाद परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप और तेज हो गए. इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच शुरू कराई. जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. इसी बीच जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया, जबकि आयोग ने मुख्य परीक्षा समेत कई भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया. छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? छात्रों का कहना है कि यह मामला केवल 14वीं जेपीएससी परीक्षा का नहीं है. उनका आरोप है कि 2019 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षा विवादों में रही. कहीं पेपर लीक के आरोप लगे, कहीं उत्तर कुंजी पर सवाल उठे तो कहीं रिजल्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई. इसी वजह से अब छात्र पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं. क्या है छात्रों की प्रमुख मांगे? 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए. पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए. 2019 से अब तक सभी विवादित जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच हो. जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो उन्हें दोबारा कराई जाए. भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. ये भी पढ़ें-Jamia Millia Islamia Spot Registration 2026: जामिया में एडमिशन का एक और मौका, खाली सीटों पर करें रजिस्ट्रेशन सरकार ने क्या उठाए कदम? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा में अनियमितताओं को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि सरकार मामले पर नजर बनाए हुए है. छात्रों से बातचीत के लिए चार सदस्य मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया गया. हालांकि छात्रों की मुख्य मांग चौधरी जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच करने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ. इस मामले की जांच राज्य की सीआईडी कर रही है लेकिन छात्रों ने इस जांच को अधूरा बताते हुए खारिज कर दिया. हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई है. याचिकाकर्ताओं ने मॉडल और आंसर की, कट ऑफ और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. आयोग ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और मुख्य परीक्षा फिलहाल स्थगित कर दी गई है. हाई कोर्ट ने आयोग से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को निर्धारित की है. ये भी पढ़ें-UGC ने जारी की 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट, स्टूडेंट्स को किया अलर्ट
Jharkhand Student Protest: झारखंड में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा ( JPSC) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है. कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद राज्यभर के प्रतियोगी छात्र राज्य रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आते रहे हैं, इसलिए अब केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की जरूरत है.
आखिर कैसे शुरू हुआ यह विवाद?
झारखंड में इस विवाद की शुरुआत 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट घोषित होने के बाद हुई. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि आयोग ने कैटेगरी वाइज कट ऑफ जारी नहीं की और चयन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए. सोशल मीडिया पर कुछ ओएमआर शीट्स भी वायरल हुई, जिसके बाद परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप और तेज हो गए. इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच शुरू कराई. जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. इसी बीच जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया, जबकि आयोग ने मुख्य परीक्षा समेत कई भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया.
छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?
छात्रों का कहना है कि यह मामला केवल 14वीं जेपीएससी परीक्षा का नहीं है. उनका आरोप है कि 2019 से अब तक जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षा विवादों में रही. कहीं पेपर लीक के आरोप लगे, कहीं उत्तर कुंजी पर सवाल उठे तो कहीं रिजल्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई. इसी वजह से अब छात्र पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं.
क्या है छात्रों की प्रमुख मांगे?
- 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए.
- पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए.
- 2019 से अब तक सभी विवादित जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच हो.
- जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो उन्हें दोबारा कराई जाए.
- भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए.
- दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.
ये भी पढ़ें-Jamia Millia Islamia Spot Registration 2026: जामिया में एडमिशन का एक और मौका, खाली सीटों पर करें रजिस्ट्रेशन
सरकार ने क्या उठाए कदम?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा में अनियमितताओं को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि सरकार मामले पर नजर बनाए हुए है. छात्रों से बातचीत के लिए चार सदस्य मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया गया. हालांकि छात्रों की मुख्य मांग चौधरी जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच करने पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ. इस मामले की जांच राज्य की सीआईडी कर रही है लेकिन छात्रों ने इस जांच को अधूरा बताते हुए खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला
14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई है. याचिकाकर्ताओं ने मॉडल और आंसर की, कट ऑफ और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. आयोग ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और मुख्य परीक्षा फिलहाल स्थगित कर दी गई है. हाई कोर्ट ने आयोग से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को निर्धारित की है.
ये भी पढ़ें-UGC ने जारी की 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट, स्टूडेंट्स को किया अलर्ट
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