कोलकाता से सिलीगुड़ी तक हाहाकार! 12 दिन बाद भी नहीं मिला सिलेंडर, पुलिस को संभालना पड़ा मोर्चा
West Bengal News: राजधानी कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के कई जिलों में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर को लेकर चिंता बढ़ती नजर आ रही है. ऑनलाइन गैस बुकिंग में आ रही परेशानी के कारण आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई लोगों का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग करते समय यह साफ नहीं हो पा रहा कि गैस बुक हुई है या नहीं. बुकिंग की असामान्य रूप से बढ़ी संख्या के कारण सर्वर में भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं. इसी वजह से कोलकाता समेत कई जिलों में सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. कई लोग काम के दिनों में भी अपनी परेशानी लेकर गैस ऑफिस पहुंच रहे हैं. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन गैस सिलेंडर न मिलने से कुछ इलाकों में लोगों का गुस्सा भी देखने को मिला. माथाभंगा में इंडेन गैस डिस्ट्रीब्यूटर के दफ्तर के बाहर ग्राहकों ने विरोध प्रदर्शन किया. लोगों का कहना है कि 10 से 12 दिन पहले गैस बुक करने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला. स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा, जिसके बाद हालात काबू में आए. हालांकि यह समस्या सिर्फ माथाभंगा तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य शहरों में भी यही स्थिति देखी जा रही है. कई शहरों में लंबी कतारें सिलीगुड़ी, राणाघाट, जलपाईगुड़ी, चुंचुड़ा, रामपुरहाट और वर्धमान जैसे इलाकों में भी गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगी हुई हैं. लोग सुबह-सुबह ही एजेंसियों के बाहर पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ऑनलाइन बुकिंग में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है. पैनिक बुकिंग से बढ़ी परेशानी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि अचानक “पैनिक बुकिंग” यानी घबराहट में बड़ी संख्या में बुकिंग होने लगी है. इसी वजह से एलपीजी का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है और सर्वर भी दबाव में आ गया है. एक ग्राहक ने कहा, "वह सुबह 7:30 बजे गैस ऑफिस पहुंचे, क्योंकि ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही थी." एक अन्य ग्राहक ने कहा, "उन्होंने कई दिन पहले बुकिंग की थी, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिला." कुछ लोग 4–5 दिनों से लगातार ऑनलाइन कोशिश कर रहे हैं, फिर भी बुकिंग नहीं हो पा रही. लोगों का कहना है कि वे सुबह 9:30 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अब भी उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि गैस कब मिलेगी. इससे साफ है कि ऑनलाइन सिस्टम की गड़बड़ी और बढ़ती मांग ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है.
West Bengal News: राजधानी कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के कई जिलों में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर को लेकर चिंता बढ़ती नजर आ रही है. ऑनलाइन गैस बुकिंग में आ रही परेशानी के कारण आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई लोगों का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग करते समय यह साफ नहीं हो पा रहा कि गैस बुक हुई है या नहीं.
बुकिंग की असामान्य रूप से बढ़ी संख्या के कारण सर्वर में भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं. इसी वजह से कोलकाता समेत कई जिलों में सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. कई लोग काम के दिनों में भी अपनी परेशानी लेकर गैस ऑफिस पहुंच रहे हैं.
कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन
गैस सिलेंडर न मिलने से कुछ इलाकों में लोगों का गुस्सा भी देखने को मिला. माथाभंगा में इंडेन गैस डिस्ट्रीब्यूटर के दफ्तर के बाहर ग्राहकों ने विरोध प्रदर्शन किया. लोगों का कहना है कि 10 से 12 दिन पहले गैस बुक करने के बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला.
स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा, जिसके बाद हालात काबू में आए. हालांकि यह समस्या सिर्फ माथाभंगा तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य शहरों में भी यही स्थिति देखी जा रही है.
कई शहरों में लंबी कतारें
सिलीगुड़ी, राणाघाट, जलपाईगुड़ी, चुंचुड़ा, रामपुरहाट और वर्धमान जैसे इलाकों में भी गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगी हुई हैं. लोग सुबह-सुबह ही एजेंसियों के बाहर पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि ऑनलाइन बुकिंग में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है.
पैनिक बुकिंग से बढ़ी परेशानी
गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि अचानक “पैनिक बुकिंग” यानी घबराहट में बड़ी संख्या में बुकिंग होने लगी है. इसी वजह से एलपीजी का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है और सर्वर भी दबाव में आ गया है. एक ग्राहक ने कहा, "वह सुबह 7:30 बजे गैस ऑफिस पहुंचे, क्योंकि ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही थी." एक अन्य ग्राहक ने कहा, "उन्होंने कई दिन पहले बुकिंग की थी, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिला." कुछ लोग 4–5 दिनों से लगातार ऑनलाइन कोशिश कर रहे हैं, फिर भी बुकिंग नहीं हो पा रही.
लोगों का कहना है कि वे सुबह 9:30 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अब भी उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि गैस कब मिलेगी. इससे साफ है कि ऑनलाइन सिस्टम की गड़बड़ी और बढ़ती मांग ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है.
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