कैसे हुई थी बिहार लोक सेवा आयोग की शुरुआत? कौन थे इसके पहले चेयरमैन

हर स्टेट में युवाओं का सपना सरकारी नौकरी पाने का होता है. ऐसे में सरकारी पदों पर युवाओं के सिलेक्शन के लिए हर राज्य में एक आयोग होता है. जो कि राज्य के संवैधानिक पदों पर भर्ती और उनके आगे की प्रोसेस को देखता है. आज हम ऐसे ही एक आयोग की बात करने जा रहे हैं. आइए जानते हैं बिहार लोक सेवा आयोग के बारे में... राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले टॉप एग्जाम का आयोजन करने का जिम्मा बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के पास है. हर वर्ष लाखों कैंडिडेट्स BPSC के अलग-अलग एग्जाम में शामिल होते हैं. लेकिन क्या आपको इस आयोग के बारे में पता है. अगर नहीं तो हम बताते हैं. देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए सरकारी नियुक्तियों का विचार पहली बार वर्ष 1853 में सामने आया था. उस समय ब्रिटिश शासन के दौरान सरकारी पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता महसूस की गई. इसके बाद शला 1854 में लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया, जिसने प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को स्वरूप देने का काम किया गया. इसके बाद के वर्षों में सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई सुधार किए गए. इसी क्रम में भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत संघीय लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों के गठन का प्रावधान किया गया. यही व्यवस्था आगे चलकर स्वतंत्र भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अलग-अलग राज्य लोक सेवा आयोगों का आधार बनी.यह भी पढ़ें - इन आसान तरीकों को अपनाएं, एक साल में मिल जाएगी सरकारी नौकरी- आजमा कर देख लें कब बना BPSC? बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की स्थापना 1 अप्रैल 1949 को हुई थी. उस समय यह आयोग उड़ीसा और मध्य प्रदेश राज्यों के लिए कार्यरत संयुक्त आयोग से अलग होकर अस्तित्व में आया था. इसका गठन भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 261(1) के तहत किया गया था. हालांकि, BPSC को वास्तविक संवैधानिक दर्जा 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के बाद मिल सका. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों की व्यवस्था की गई है. इसी प्रावधान के तहत बिहार लोक सेवा आयोग एक कोंस्टीटूशनल बॉडी के रूप में कार्य करता है. पहले कहां था मुख्यालय स्थापना के शुरुआती दिनों में BPSC का मुख्यालय रांची में स्थित था, क्योंकि उस समय रांची बिहार राज्य का हिस्सा हुआ करता था. इसके बाद में राज्य सरकार ने आयोग का मुख्यालय रांची से पटना स्थानांतरित करने का निर्णय लिया. इसके बाद 1 मार्च 1951 को BPSC का मुख्यालय आधिकारिक रूप से पटना स्थानांतरित कर दिया गया. कौन थे पहले चेयरमैन? बिहार लोक सेवा आयोग के पहले चेयरमैन राजंधारी सिन्हा थे. वहीं, आयोग के पहले सचिव राधा कृष्ण चौधरी बने थे. इन दोनों अधिकारियों ने आयोग की प्रारंभिक कार्यप्रणाली को स्थापित करने और इसे एक प्रभावी भर्ती संस्था के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाई थी. फिलहाल बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई हैं. उन्होंने 16 मार्च 2024 को पदभार ग्रहण किया था और वर्तमान में आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं.यह भी पढ़ें - दिल्ली में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, DSSSB ने निकाली कई पदों पर भर्ती; ये है लास्ट डेट

Jun 18, 2026 - 04:30
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कैसे हुई थी बिहार लोक सेवा आयोग की शुरुआत? कौन थे इसके पहले चेयरमैन

हर स्टेट में युवाओं का सपना सरकारी नौकरी पाने का होता है. ऐसे में सरकारी पदों पर युवाओं के सिलेक्शन के लिए हर राज्य में एक आयोग होता है. जो कि राज्य के संवैधानिक पदों पर भर्ती और उनके आगे की प्रोसेस को देखता है. आज हम ऐसे ही एक आयोग की बात करने जा रहे हैं. आइए जानते हैं बिहार लोक सेवा आयोग के बारे में...

राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले टॉप एग्जाम का आयोजन करने का जिम्मा बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के पास है. हर वर्ष लाखों कैंडिडेट्स BPSC के अलग-अलग एग्जाम में शामिल होते हैं. लेकिन क्या आपको इस आयोग के बारे में पता है. अगर नहीं तो हम बताते हैं.

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए सरकारी नियुक्तियों का विचार पहली बार वर्ष 1853 में सामने आया था. उस समय ब्रिटिश शासन के दौरान सरकारी पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता महसूस की गई. इसके बाद शला 1854 में लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया, जिसने प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को स्वरूप देने का काम किया गया.

इसके बाद के वर्षों में सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई सुधार किए गए. इसी क्रम में भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत संघीय लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों के गठन का प्रावधान किया गया. यही व्यवस्था आगे चलकर स्वतंत्र भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अलग-अलग राज्य लोक सेवा आयोगों का आधार बनी.

यह भी पढ़ें - इन आसान तरीकों को अपनाएं, एक साल में मिल जाएगी सरकारी नौकरी- आजमा कर देख लें

कब बना BPSC?

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की स्थापना 1 अप्रैल 1949 को हुई थी. उस समय यह आयोग उड़ीसा और मध्य प्रदेश राज्यों के लिए कार्यरत संयुक्त आयोग से अलग होकर अस्तित्व में आया था. इसका गठन भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 261(1) के तहत किया गया था.

हालांकि, BPSC को वास्तविक संवैधानिक दर्जा 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के बाद मिल सका. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों की व्यवस्था की गई है. इसी प्रावधान के तहत बिहार लोक सेवा आयोग एक कोंस्टीटूशनल बॉडी के रूप में कार्य करता है.

पहले कहां था मुख्यालय

स्थापना के शुरुआती दिनों में BPSC का मुख्यालय रांची में स्थित था, क्योंकि उस समय रांची बिहार राज्य का हिस्सा हुआ करता था. इसके बाद में राज्य सरकार ने आयोग का मुख्यालय रांची से पटना स्थानांतरित करने का निर्णय लिया. इसके बाद 1 मार्च 1951 को BPSC का मुख्यालय आधिकारिक रूप से पटना स्थानांतरित कर दिया गया.

कौन थे पहले चेयरमैन?

बिहार लोक सेवा आयोग के पहले चेयरमैन राजंधारी सिन्हा थे. वहीं, आयोग के पहले सचिव राधा कृष्ण चौधरी बने थे. इन दोनों अधिकारियों ने आयोग की प्रारंभिक कार्यप्रणाली को स्थापित करने और इसे एक प्रभावी भर्ती संस्था के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाई थी. फिलहाल बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई हैं. उन्होंने 16 मार्च 2024 को पदभार ग्रहण किया था और वर्तमान में आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें - दिल्ली में सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, DSSSB ने निकाली कई पदों पर भर्ती; ये है लास्ट डेट

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