किसी को गिफ्ट में दिया चेक और हो गया बाउंस तब क्या होगा, क्या आप पर हो सकता है केस? जानिए

Cheque Bounce: अगर आपने किसी को गिफ्ट में चेक दिया हो और वह बाउंस हो जाए तो क्या आपके खिलाफ केस हो सकता है. यह सवाल अक्सर लोगों के मान में आता है. अक्सर लोगों को लगता है कि चेक बाउंस होते ही सीधे केस दर्ज हो जाता है, लेकिन कानून ऐसा नहीं कहता. क्योंकि अगर चेक सिर्फ गिफ्ट या फिर मदद के तौर पर दिया गया है तो इस मामले में स्थिति बदल जाती है. नेगोशिएबल इंस्टुमेंट एक्ट की धारा 138 तभी लागू होती है जब चेक किसी देनदारी या फिर लोन को चुकाने के लिए दिया गया हो. लेकिन जरूरी बात यह है कि ऐसे मामलों में कोर्ट को साबित करना पड़ सकता है कि चेक किसी लोन के लिए नहीं दिया गया था.  यह भी पढ़ें - हाइवे पर सफर करने वाले ध्यान दें: ब्लैकलिस्ट हो सकता आपका FASTag, NHAI ने नियमों में लाई सख्ती क्या गिफ्ट में दिया चेक बाउंस होने पर केस हो सकता है? अगर इसकी बात करें तो इसका सीधा जवाब होगा नहीं. अगर आपने किसी को शादी, त्योहार, दान या फिर किसी पर्सनल मदद के लिए चेक दिया है और वो बाउंस हो जाता है तो आमतौर पर धारा 138 के तहत आपराधिक मामला नहीं बनता. क्योंकि कानून कहता है चेक किसी कानूनी लोन के लिए होना चाहिए.गिफ्ट को कानूनी देनदारी नहीं माना जाता है.इसलिए ही हर गिफ्ट चेक बाउंस केस नहीं बनता है. जानिए कब-कब आए ऐसे मामले साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट में विजय बनाम लक्ष्मण का केस सामने आया था. इस केस में शिकायतकर्ता विजय ने दावा किया कि उसने लक्ष्मण (आरोपी) को 1 लाख 15 हजार का पर्सनल लोन दिया था. लक्ष्मण ने इस लोन को चुकाने के लिए एक चेक दिया, जो बैंक में डालने पर पैसे की कमी की वजह से बाउंस हो गया. लक्ष्मण ने कहा कि उसने कोई लोन नहीं लिया था. उसने यह चेक सिर्फ सिक्योरिटी के तौर पर विजय के पिता को दिया था, क्योंकि वह वहां दूध सप्लाई करता था.  कार्ट का फैसला क्या था? सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि विजय यह साबित नहीं कर पाया कि उसने लोन कब और कैसे दिया था. जिस पर कोर्ट ने कहा कि चेक हाथ में होने से यह साबित नहीं होता कि लोन कानूनी रूप से सही है, जिसके बाद कोर्ट ने लक्ष्मण को बरी कर दिया और विजय की शिकायत खारिज कर दी. आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में आया था ऐसा ही मामला ऐसा ही एक ओर केस आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में आया बी कृष्णा रेड्डी बनाम एम.चंद्रशेखर का मामला आया था. इस केस में भी शिकायतकर्ता लोन साबित नहीं कर पाया. जिसके बाद कोर्ट ने साफ कहा कि अगर चेक गिफ्ट या फिर किसी पर्सनल मदद के तौर पर दिया है तो इसे चेक बाउंस अपराध नहीं माना जा सकता. धारा 139 के तहत कोर्ट शुरुआत में मानकर चलता है कि चेक किसी देनदारी के लिए दिया गया था. ऐसे में आपको साबित करना पड़ सकता है जैसे... चेक गिफ्ट के तौर पर दिया गया था. कोई लोन नहीं था. और साथ ही सामने वाले का दावा गलत था. यह भी पढ़ें - 40 मिनट में तय होगा गुरुग्राम से नोएडा का सफर, 15 हजार करोड़ के RRTS प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी खुद को कैसे बचाएं? चेक देने से पहले उस पर कारण लिखे जैसे शादी का गिफ्ट या फिर त्योहार का गिफ्ट गिफ्ट लेटर रखें जैसे बड़ी कम हो तो लिखित नोट जरूर दें. इसका रिकॉर्ड संभालकर रखें जैसे मैसेज, चेट या फिर लेटर सबूत बन सकते हैं.

May 10, 2026 - 23:30
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किसी को गिफ्ट में दिया चेक और हो गया बाउंस तब क्या होगा, क्या आप पर हो सकता है केस? जानिए

Cheque Bounce: अगर आपने किसी को गिफ्ट में चेक दिया हो और वह बाउंस हो जाए तो क्या आपके खिलाफ केस हो सकता है. यह सवाल अक्सर लोगों के मान में आता है. अक्सर लोगों को लगता है कि चेक बाउंस होते ही सीधे केस दर्ज हो जाता है, लेकिन कानून ऐसा नहीं कहता. क्योंकि अगर चेक सिर्फ गिफ्ट या फिर मदद के तौर पर दिया गया है तो इस मामले में स्थिति बदल जाती है.

नेगोशिएबल इंस्टुमेंट एक्ट की धारा 138 तभी लागू होती है जब चेक किसी देनदारी या फिर लोन को चुकाने के लिए दिया गया हो. लेकिन जरूरी बात यह है कि ऐसे मामलों में कोर्ट को साबित करना पड़ सकता है कि चेक किसी लोन के लिए नहीं दिया गया था. 

यह भी पढ़ें - हाइवे पर सफर करने वाले ध्यान दें: ब्लैकलिस्ट हो सकता आपका FASTag, NHAI ने नियमों में लाई सख्ती

क्या गिफ्ट में दिया चेक बाउंस होने पर केस हो सकता है?

अगर इसकी बात करें तो इसका सीधा जवाब होगा नहीं. अगर आपने किसी को शादी, त्योहार, दान या फिर किसी पर्सनल मदद के लिए चेक दिया है और वो बाउंस हो जाता है तो आमतौर पर धारा 138 के तहत आपराधिक मामला नहीं बनता.

क्योंकि कानून कहता है

चेक किसी कानूनी लोन के लिए होना चाहिए.
गिफ्ट को कानूनी देनदारी नहीं माना जाता है.
इसलिए ही हर गिफ्ट चेक बाउंस केस नहीं बनता है.

जानिए कब-कब आए ऐसे मामले

साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट में विजय बनाम लक्ष्मण का केस सामने आया था. इस केस में शिकायतकर्ता विजय ने दावा किया कि उसने लक्ष्मण (आरोपी) को 1 लाख 15 हजार का पर्सनल लोन दिया था. लक्ष्मण ने इस लोन को चुकाने के लिए एक चेक दिया, जो बैंक में डालने पर पैसे की कमी की वजह से बाउंस हो गया. लक्ष्मण ने कहा कि उसने कोई लोन नहीं लिया था. उसने यह चेक सिर्फ सिक्योरिटी के तौर पर विजय के पिता को दिया था, क्योंकि वह वहां दूध सप्लाई करता था. 

कार्ट का फैसला क्या था?

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि विजय यह साबित नहीं कर पाया कि उसने लोन कब और कैसे दिया था. जिस पर कोर्ट ने कहा कि चेक हाथ में होने से यह साबित नहीं होता कि लोन कानूनी रूप से सही है, जिसके बाद कोर्ट ने लक्ष्मण को बरी कर दिया और विजय की शिकायत खारिज कर दी.

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में आया था ऐसा ही मामला

ऐसा ही एक ओर केस आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में आया बी कृष्णा रेड्डी बनाम एम.चंद्रशेखर का मामला आया था. इस केस में भी शिकायतकर्ता लोन साबित नहीं कर पाया. जिसके बाद कोर्ट ने साफ कहा कि अगर चेक गिफ्ट या फिर किसी पर्सनल मदद के तौर पर दिया है तो इसे चेक बाउंस अपराध नहीं माना जा सकता.

धारा 139 के तहत कोर्ट शुरुआत में मानकर चलता है कि चेक किसी देनदारी के लिए दिया गया था. ऐसे में आपको साबित करना पड़ सकता है जैसे...

  • चेक गिफ्ट के तौर पर दिया गया था.
  • कोई लोन नहीं था.
  • और साथ ही सामने वाले का दावा गलत था.

यह भी पढ़ें - 40 मिनट में तय होगा गुरुग्राम से नोएडा का सफर, 15 हजार करोड़ के RRTS प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

खुद को कैसे बचाएं?

  • चेक देने से पहले उस पर कारण लिखे जैसे शादी का गिफ्ट या फिर त्योहार का गिफ्ट
  • गिफ्ट लेटर रखें जैसे बड़ी कम हो तो लिखित नोट जरूर दें.
  • इसका रिकॉर्ड संभालकर रखें जैसे मैसेज, चेट या फिर लेटर सबूत बन सकते हैं.

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