कहां की रहने वाली हैं नोएडा की डीएम IAS मेधा रूपम, जानें कितनी मिलती है सैलरी?
नोएडा में हाल के दिनों में जब औद्योगिक क्षेत्र में तनाव बढ़ा, तो प्रशासन की ओर जिलाधिकारी मेधा रूपम खुद आगे आईं. उन्होंने कर्मचारियों और उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की. ये पहला मौका नहीं है जब नोएडा डीएम चर्चा में हैं, इससे पहले भी कई बार वह चर्चा में आई हैं. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि मेधा रूपम कहां की रहने वाली हैं और उन्होंने कहां से पढ़ाई-लिखाई की है.आईएएस मेधा रूपम उत्तर प्रदेश कैडर की 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. उनका जन्म 21 अक्टूबर 1990 को आगरा में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई केरल के स्कूलों नेवल पब्लिक स्कूल, एर्नाकुलम और सेंट थॉमस स्कूल, तिरुवनंतपुरम में हुई. आगे की पढ़ाई के लिए वे दिल्ली आईं और St. Stephen's College से इकोनॉमिक्स में बीए (ऑनर्स) किया है. सिविल सेवा परीक्षा 2013 में उन्होंने ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की. आईएएस मेधा रूपम केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लेकर तीन स्वर्ण पदक जीते. उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई.यहां रह चुकी है पोस्टिंगमेधा रूपम देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं, लेकिन प्रशासनिक सेवा में उनकी पहचान उनके काम से बनी है. अलग-अलग जिलों में तैनाती के दौरान उन्होंने जमीन पर काम करके अपनी अलग छवि बनाई. 29 जुलाई 2025 से वे गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले मेरठ, बागपत, हापुड़ और कासगंज जैसे जिलों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं. वे गौतम बुद्ध नगर की पहली महिला जिलाधिकारी भी रही हैं. यह भी पढ़ें - UPPSC Success Story: पिता की पंचर दुकान, बेटी का बड़ा सपना; बुलंदशहर की गायत्री बनी अफसरकितनी मिलती है सैलरी?आईएएस अधिकारियों की सैलरी केंद्र सरकार के वेतनमान के अनुसार तय होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार मेधा रूपम जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (लेवल 12) में आती हैं, जहां बेसिक सैलरी लगभग 78,800 रुपये प्रति माह होती है. इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान भत्ता या सरकारी आवास, यात्रा भत्ता, मेडिकल सुविधा, सरकारी वाहन और स्टाफ जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. इन सबको मिलाकर कुल वेतन और सुविधाएं काफी बेहतर हो जाती हैं, साथ ही इस पद का सम्मान और जिम्मेदारी अलग होती है.यह भी पढ़ें - UPSC Success Story: सिर्फ एक साल की तैयारी, बिना कोचिंग बनीं आईएएस; जानें अनन्या की कहानी
नोएडा में हाल के दिनों में जब औद्योगिक क्षेत्र में तनाव बढ़ा, तो प्रशासन की ओर जिलाधिकारी मेधा रूपम खुद आगे आईं. उन्होंने कर्मचारियों और उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की. ये पहला मौका नहीं है जब नोएडा डीएम चर्चा में हैं, इससे पहले भी कई बार वह चर्चा में आई हैं. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि मेधा रूपम कहां की रहने वाली हैं और उन्होंने कहां से पढ़ाई-लिखाई की है.
आईएएस मेधा रूपम उत्तर प्रदेश कैडर की 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. उनका जन्म 21 अक्टूबर 1990 को आगरा में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई केरल के स्कूलों नेवल पब्लिक स्कूल, एर्नाकुलम और सेंट थॉमस स्कूल, तिरुवनंतपुरम में हुई. आगे की पढ़ाई के लिए वे दिल्ली आईं और St. Stephen's College से इकोनॉमिक्स में बीए (ऑनर्स) किया है. सिविल सेवा परीक्षा 2013 में उन्होंने ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की. आईएएस मेधा रूपम केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लेकर तीन स्वर्ण पदक जीते. उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई.
यहां रह चुकी है पोस्टिंग
मेधा रूपम देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं, लेकिन प्रशासनिक सेवा में उनकी पहचान उनके काम से बनी है. अलग-अलग जिलों में तैनाती के दौरान उन्होंने जमीन पर काम करके अपनी अलग छवि बनाई. 29 जुलाई 2025 से वे गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले मेरठ, बागपत, हापुड़ और कासगंज जैसे जिलों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं. वे गौतम बुद्ध नगर की पहली महिला जिलाधिकारी भी रही हैं.
यह भी पढ़ें - UPPSC Success Story: पिता की पंचर दुकान, बेटी का बड़ा सपना; बुलंदशहर की गायत्री बनी अफसर
कितनी मिलती है सैलरी?
आईएएस अधिकारियों की सैलरी केंद्र सरकार के वेतनमान के अनुसार तय होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार मेधा रूपम जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (लेवल 12) में आती हैं, जहां बेसिक सैलरी लगभग 78,800 रुपये प्रति माह होती है. इसके अलावा महंगाई भत्ता, मकान भत्ता या सरकारी आवास, यात्रा भत्ता, मेडिकल सुविधा, सरकारी वाहन और स्टाफ जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. इन सबको मिलाकर कुल वेतन और सुविधाएं काफी बेहतर हो जाती हैं, साथ ही इस पद का सम्मान और जिम्मेदारी अलग होती है.
यह भी पढ़ें - UPSC Success Story: सिर्फ एक साल की तैयारी, बिना कोचिंग बनीं आईएएस; जानें अनन्या की कहानी
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