कर्नाटक में तुलु बनी दूसरी आधिकारिक भाषा, बेंगलुरु की जगह मंगलुरु में कैबिनेट बैठक
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में बोली जाने वाली तुलु भाषा को उस क्षेत्र में एक अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के तौर पर मान्यता दी जाएगी. मंगलुरु में कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, "आज हमने उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जिलों में तुलु भाषा को लागू करने और इसे राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा घोषित करने का फैसला किया है." 2011 की राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार कर्नाटक में तुलु बोलने वाले मूल निवासियों की संख्या 18 लाख से ज़्यादा थी, जबकि उसी समय राज्य की कुल आबादी 6 करोड़ से अधिक थी. कन्नड़ राज्य में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली और मुख्य आधिकारिक भाषा है. पहली बार मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठकऐसा भी पहली बार हुआ, जब कैबिनेट की बैठक बेंगलुरु के बजाय मंगलुरु में हुई. इस इलाके में बीजेपी के दबदबे को देखते हुए शिवकुमार का अपनी कैबिनेट को मंगलुरु ले जाने का राजनीतिक महत्व और भी साफ हो जाता है. तटीय कर्नाटक खासकर दक्षिण कन्नड़ और उडुपी लंबे समय से राज्य में बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक रहा है. 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में BJP ने इन दो जिलों की 13 में से 11 सीटें जीतीं. पार्टी ने उडुपी की सभी 5 सीटें और दक्षिण कन्नड़ की 8 में से 6 सीटें हासिल कीं. कांग्रेस सिर्फ 2 ही सीटों पर जीत पाई. यह नतीजे तब आए जब कांग्रेस ने पूरे कर्नाटक में 135 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की, जबकि BJP को 66 सीटें मिलीं. बीजेपी का गढ़ है मंगलुरु 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP का दबदबा कायम रहा. पार्टी ने इस इलाके की दोनों संसदीय सीटें जीतीं. दक्षिण कन्नड़ में बृजेश चौटा ने कांग्रेस के पद्मराज आर को 64,000 से ज़्यादा वोटों से हराया और कोटा श्रीनिवास पुजारी ने उडुपी-चिकमगलूर सीट 2.5 लाख से ज़्यादा वोटों से जीती. तुलु भाषा से जुड़े ऐलान पर BJP ने आरोप लगाया कि शिवकुमार BJP के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व का सहारा ले रहे हैं. एक बीजेपी नेता ने PTI से बातचीत में कहा, "शिवकुमार ने हिंदू धर्म में अपने पक्के विश्वास को कभी नहीं छिपाया है. वे अक्सर मंदिरों में जाते हैं, सार्वजनिक रूप से पूजा-पाठ करते हैं और धर्मग्रंथों का जिक्र करते हैं. अब वे सॉफ्ट हिंदुत्व' को बढ़ावा दे रहे हैं." नेता ने अगस्त 2025 की एक घटना का जिक्र करते हुए यह बात कही, जब शिवकुमार ने कर्नाटक विधानसभा के अंदर नमस्ते सदा वत्सले (RSS का गीत) की कुछ पंक्तियां गाई थीं. ये भी पढ़ें ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क पर NIA का शिकंजा, ISIS के 9 आरोपियों पर चार्जशीट
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में बोली जाने वाली तुलु भाषा को उस क्षेत्र में एक अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा के तौर पर मान्यता दी जाएगी. मंगलुरु में कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, "आज हमने उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जिलों में तुलु भाषा को लागू करने और इसे राज्य की दूसरी अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा घोषित करने का फैसला किया है."
2011 की राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार कर्नाटक में तुलु बोलने वाले मूल निवासियों की संख्या 18 लाख से ज़्यादा थी, जबकि उसी समय राज्य की कुल आबादी 6 करोड़ से अधिक थी. कन्नड़ राज्य में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली और मुख्य आधिकारिक भाषा है.
पहली बार मंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक
ऐसा भी पहली बार हुआ, जब कैबिनेट की बैठक बेंगलुरु के बजाय मंगलुरु में हुई. इस इलाके में बीजेपी के दबदबे को देखते हुए शिवकुमार का अपनी कैबिनेट को मंगलुरु ले जाने का राजनीतिक महत्व और भी साफ हो जाता है. तटीय कर्नाटक खासकर दक्षिण कन्नड़ और उडुपी लंबे समय से राज्य में बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक रहा है.
2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में BJP ने इन दो जिलों की 13 में से 11 सीटें जीतीं. पार्टी ने उडुपी की सभी 5 सीटें और दक्षिण कन्नड़ की 8 में से 6 सीटें हासिल कीं. कांग्रेस सिर्फ 2 ही सीटों पर जीत पाई. यह नतीजे तब आए जब कांग्रेस ने पूरे कर्नाटक में 135 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की, जबकि BJP को 66 सीटें मिलीं.
बीजेपी का गढ़ है मंगलुरु
2024 के लोकसभा चुनाव में BJP का दबदबा कायम रहा. पार्टी ने इस इलाके की दोनों संसदीय सीटें जीतीं. दक्षिण कन्नड़ में बृजेश चौटा ने कांग्रेस के पद्मराज आर को 64,000 से ज़्यादा वोटों से हराया और कोटा श्रीनिवास पुजारी ने उडुपी-चिकमगलूर सीट 2.5 लाख से ज़्यादा वोटों से जीती. तुलु भाषा से जुड़े ऐलान पर BJP ने आरोप लगाया कि शिवकुमार BJP के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व का सहारा ले रहे हैं.
एक बीजेपी नेता ने PTI से बातचीत में कहा, "शिवकुमार ने हिंदू धर्म में अपने पक्के विश्वास को कभी नहीं छिपाया है. वे अक्सर मंदिरों में जाते हैं, सार्वजनिक रूप से पूजा-पाठ करते हैं और धर्मग्रंथों का जिक्र करते हैं. अब वे सॉफ्ट हिंदुत्व' को बढ़ावा दे रहे हैं." नेता ने अगस्त 2025 की एक घटना का जिक्र करते हुए यह बात कही, जब शिवकुमार ने कर्नाटक विधानसभा के अंदर नमस्ते सदा वत्सले (RSS का गीत) की कुछ पंक्तियां गाई थीं.
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ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क पर NIA का शिकंजा, ISIS के 9 आरोपियों पर चार्जशीट
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