कभी दिल्ली में थी किताबों की दुकान, आज है 3000 करोड़ का नेटवर्थ; जानें सुनील गलगोटिया की कहानी
Suneel Galgotia Success Story: दिल्ली एनसीआर में उच्च शिक्षा की बात हो और गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. यूनिवर्सिटी आमतौर पर अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और कैंपस गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहती है. लेकिन इस समय इसका नाम रोबोडॉग को लेकर उठे विवाद के कारण सुर्खियों में है. गलगोटिया की शुरुआत करने वाले सुनील गलगोटिया की कहानी भी बहुत दिलचस्प है. आइए जानते हैं, उन्होंने कैसे अपने करियर की शुरुआत की और किस तरह से गलगोटिया यूनिवर्सिटी तक का सफर तय किया...... सुनील गलगोटिया का सफर आज जिस गलगोटिया यूनिवर्सिटी की चर्चा हो रही है, उसकी नींव सुनील गलगोटिया ने रखी थी. साल 2011 में स्थापित यह विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित है और यहां ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई होती है. मौजूदा समय में इसकी कमान ध्रुव गलगोटिया के हाथों में है. जो सुनील गलगोटिया के बेटे हैं और सीईओ की भूमिका निभा रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े शैक्षणिक संस्थान की शुरुआत एक छोटे से पारिवारिक कारोबार से हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 1930 में दिल्ली के कनॉट प्लेस में ‘ईडी गलगोटिया एंड संस’ नाम से परिवार की किताबों की दुकान थी. बाद में जब सुनील गलगोटिया ने व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली, तो 1980 के दशक में उन्होंने गलगोटिया पब्लिकेशंस की शुरुआत की. इसके बाद सुनील गलगोटिया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और इतना बड़ा व्यापार खड़ा कर दिया. एक बुक स्टोर से 3000 करोड़ के कारोबार तक का सफर साल 2011 में स्थापित गलगोटिया यूनिवर्सिटी आज एक बड़े शिक्षा समूह का हिस्सा बन चुकी है. वर्तमान में इस ग्रुप के तहत 40,000 से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और 40 से अधिक देशों के विद्यार्थी यहां अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने आते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस सफर की शुरुआत एक छोटे से बुक स्टोर से हुई थी, वह आज करीब 3000 करोड़ रुपये के कारोबार में बदल चुका है. यह भी पढ़ें: 216 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के बाद रॉकेट बने इस कंपनी के शेयर, 5% तक उछले भाव; जानिए डिटेल
Suneel Galgotia Success Story: दिल्ली एनसीआर में उच्च शिक्षा की बात हो और गलगोटिया यूनिवर्सिटी का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. यूनिवर्सिटी आमतौर पर अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों और कैंपस गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहती है.
लेकिन इस समय इसका नाम रोबोडॉग को लेकर उठे विवाद के कारण सुर्खियों में है. गलगोटिया की शुरुआत करने वाले सुनील गलगोटिया की कहानी भी बहुत दिलचस्प है. आइए जानते हैं, उन्होंने कैसे अपने करियर की शुरुआत की और किस तरह से गलगोटिया यूनिवर्सिटी तक का सफर तय किया......
सुनील गलगोटिया का सफर
आज जिस गलगोटिया यूनिवर्सिटी की चर्चा हो रही है, उसकी नींव सुनील गलगोटिया ने रखी थी. साल 2011 में स्थापित यह विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित है और यहां ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई होती है. मौजूदा समय में इसकी कमान ध्रुव गलगोटिया के हाथों में है. जो सुनील गलगोटिया के बेटे हैं और सीईओ की भूमिका निभा रहे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े शैक्षणिक संस्थान की शुरुआत एक छोटे से पारिवारिक कारोबार से हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 1930 में दिल्ली के कनॉट प्लेस में ‘ईडी गलगोटिया एंड संस’ नाम से परिवार की किताबों की दुकान थी.
बाद में जब सुनील गलगोटिया ने व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली, तो 1980 के दशक में उन्होंने गलगोटिया पब्लिकेशंस की शुरुआत की. इसके बाद सुनील गलगोटिया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और इतना बड़ा व्यापार खड़ा कर दिया.
एक बुक स्टोर से 3000 करोड़ के कारोबार तक का सफर
साल 2011 में स्थापित गलगोटिया यूनिवर्सिटी आज एक बड़े शिक्षा समूह का हिस्सा बन चुकी है. वर्तमान में इस ग्रुप के तहत 40,000 से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और 40 से अधिक देशों के विद्यार्थी यहां अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने आते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस सफर की शुरुआत एक छोटे से बुक स्टोर से हुई थी, वह आज करीब 3000 करोड़ रुपये के कारोबार में बदल चुका है.
यह भी पढ़ें: 216 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के बाद रॉकेट बने इस कंपनी के शेयर, 5% तक उछले भाव; जानिए डिटेल
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