कभी चढ़ रहे हैं तो कभी गिर रहे, क्यों फोकस में हैं चावल के स्टॉक्स; ईरान-इजरायल वॉर से जुड़ा कनेक्शन

Rice stocks: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 6 मार्च को शेयर बाजार में चावल के स्टॉक्स फोकस में रहे. इनमें LT Foods Ltd और KRBL Ltd जैसी कंपनियां शामिल रहीं. ईरान-इजरायल में जंग और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण चावल के एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है. शिपमेंट में आई रुकावटों के बाद प्रीमियम बासमती की कीमतें सिर्फ 72 घंटे में 7-10 परसेंट तक गिर गईं. हांलाकि, हालिया रिकवरी के बाद LT Foods Ltd के शेयरों में 9.5 परसेंट का उछाल आया. शुरुआती कारोबार में KRBL Ltd. के स्टॉक्स भी 3.3 परसेंट तक चढ़े. हालांकि, फिर 1.31 परसेंट की गिरावट के साथ कीमत 1.31 परसेंट आ गई. कुल मिलाकर चावलों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है.  मुश्किल में पड़े एक्सपोटर्स खास बात यह है कि गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर करीब 2000 कंटेनर मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन की वजह से फंसे हुए हैं. इनमें से ज्यादातर चावलों के हैं. इसके अलावा, फ्रोजन फूड और दूसरी जल्द खराब होने वाली चीजों से लैस 300 से ज्यादा कंटेनर भी जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर फंसे हुए हैं. बताया जा रहा है कि इन कंटेनरों में अंगूर, प्याज, फल और सब्जियां हैं. मिडिल ईस्ट भारत के चावल एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ा और जरूरी मार्केट है. कारोबारी साल 2025 में भारत ने यहां करीब 60 लाख टन बासमती चावल का एक्सपोर्ट किया था. इसके बाद भारत से चावल सऊदी अरब, ईरान, इराक, यमन, जॉर्डन, कतर और ओमान को एक्सपोर्ट किया जाता है, जो खाड़ी देशों के लिए भारत के बासमती चावल एक्सपोर्ट का करीब 80 परसेंट है. खास बात यह है कि कुल बासमती एक्सपोर्ट का करीब 35 परसेंट अकेले ईरान को जाता है. ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सतीश गोयल ने रॉयटर्स को बताया कि करीब 400,000 टन बासमती चावल अभी पोर्ट पर या रास्ते में फंसा हुआ है क्योंकि एक्सपोर्टर्स को शिपमेंट भेजने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. क्यों फोकस में हैं स्टॉक्स? खाड़ी देशों को निर्यात होने वाले चार लाख टन चावल बीच रास्ते फंसा हुआ है. इससे कीमतों में 6-10 परसेंट की गिरावट आई है. भारत सरकार द्वारा बासमी और गैर-बासमती चावलों के एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों को कम करने और फ्लोर प्राइस को लेकर सकारात्मक रुख के बीच निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है. बता दें कि घरेलू स्तर पर चावल की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने फ्लोर प्राइस तय कर रखा है. उस तय कीमत से कम काेई भी एक्सपोर्टर चावल नहीं बेच सकता है. सरकार ने गैर-बासमती सफेद चावल पर से 490 डॉलर प्रति टन और बासमती चावल के लिए 950 डॉलर प्रति टन के फ्लोर प्राइस को हटा दिया है.  LT Foods Ltd और KRBL Ltd जैसे स्टाॅक्स के सपोर्ट लेवल पर आने की एक बड़ी वजह मुकुल अग्रवाल जैसे निवेशकों की खरीदारी भी है.  शिपमेंट में देरी होने के बाद भी खाड़ी देशों से चावलों की डिमांड में फिलहाल कोई कमी नहीं आई है. डिमांड में स्थिरता होने की वजह से कारोबारियों को उम्मीद है कि तनाव कम होते ही फंसा हुआ स्टॉक क्लियर हो जाएगा.  डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.) ये भी पढ़ें: जंग में छूट रहा साथ... करोड़ों के स्टॉक्स बेच भारतीय शेयर बाजार से चलते बने विदेशी निवेशक, बढ़ रही बिकवाली

Mar 7, 2026 - 15:30
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कभी चढ़ रहे हैं तो कभी गिर रहे, क्यों फोकस में हैं चावल के स्टॉक्स; ईरान-इजरायल वॉर से जुड़ा कनेक्शन

Rice stocks: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 6 मार्च को शेयर बाजार में चावल के स्टॉक्स फोकस में रहे. इनमें LT Foods Ltd और KRBL Ltd जैसी कंपनियां शामिल रहीं. ईरान-इजरायल में जंग और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण चावल के एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है. शिपमेंट में आई रुकावटों के बाद प्रीमियम बासमती की कीमतें सिर्फ 72 घंटे में 7-10 परसेंट तक गिर गईं.

हांलाकि, हालिया रिकवरी के बाद LT Foods Ltd के शेयरों में 9.5 परसेंट का उछाल आया. शुरुआती कारोबार में KRBL Ltd. के स्टॉक्स भी 3.3 परसेंट तक चढ़े. हालांकि, फिर 1.31 परसेंट की गिरावट के साथ कीमत 1.31 परसेंट आ गई. कुल मिलाकर चावलों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. 

मुश्किल में पड़े एक्सपोटर्स

खास बात यह है कि गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर करीब 2000 कंटेनर मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन की वजह से फंसे हुए हैं. इनमें से ज्यादातर चावलों के हैं. इसके अलावा, फ्रोजन फूड और दूसरी जल्द खराब होने वाली चीजों से लैस 300 से ज्यादा कंटेनर भी जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर फंसे हुए हैं. बताया जा रहा है कि इन कंटेनरों में अंगूर, प्याज, फल और सब्जियां हैं.

मिडिल ईस्ट भारत के चावल एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ा और जरूरी मार्केट है. कारोबारी साल 2025 में भारत ने यहां करीब 60 लाख टन बासमती चावल का एक्सपोर्ट किया था. इसके बाद भारत से चावल सऊदी अरब, ईरान, इराक, यमन, जॉर्डन, कतर और ओमान को एक्सपोर्ट किया जाता है, जो खाड़ी देशों के लिए भारत के बासमती चावल एक्सपोर्ट का करीब 80 परसेंट है. खास बात यह है कि कुल बासमती एक्सपोर्ट का करीब 35 परसेंट अकेले ईरान को जाता है.

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सतीश गोयल ने रॉयटर्स को बताया कि करीब 400,000 टन बासमती चावल अभी पोर्ट पर या रास्ते में फंसा हुआ है क्योंकि एक्सपोर्टर्स को शिपमेंट भेजने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

क्यों फोकस में हैं स्टॉक्स?

  • खाड़ी देशों को निर्यात होने वाले चार लाख टन चावल बीच रास्ते फंसा हुआ है. इससे कीमतों में 6-10 परसेंट की गिरावट आई है.
  • भारत सरकार द्वारा बासमी और गैर-बासमती चावलों के एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों को कम करने और फ्लोर प्राइस को लेकर सकारात्मक रुख के बीच निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है. बता दें कि घरेलू स्तर पर चावल की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने फ्लोर प्राइस तय कर रखा है. उस तय कीमत से कम काेई भी एक्सपोर्टर चावल नहीं बेच सकता है. सरकार ने गैर-बासमती सफेद चावल पर से 490 डॉलर प्रति टन और बासमती चावल के लिए 950 डॉलर प्रति टन के फ्लोर प्राइस को हटा दिया है. 
  • LT Foods Ltd और KRBL Ltd जैसे स्टाॅक्स के सपोर्ट लेवल पर आने की एक बड़ी वजह मुकुल अग्रवाल जैसे निवेशकों की खरीदारी भी है. 
  • शिपमेंट में देरी होने के बाद भी खाड़ी देशों से चावलों की डिमांड में फिलहाल कोई कमी नहीं आई है. डिमांड में स्थिरता होने की वजह से कारोबारियों को उम्मीद है कि तनाव कम होते ही फंसा हुआ स्टॉक क्लियर हो जाएगा. 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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जंग में छूट रहा साथ... करोड़ों के स्टॉक्स बेच भारतीय शेयर बाजार से चलते बने विदेशी निवेशक, बढ़ रही बिकवाली

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