उम्र नहीं बढ़ी, लेकिन दिल-दिमाग हो गया बूढ़ा? इस टेस्ट से लगता है पता

हम सभी की एक उम्र वो होती है जो जन्म की तारीख से गिनी जाती है, लेकिन शरीर के अंदर हमारे दिल, दिमाग और बाकी अंगों की एक अलग ही "असली उम्र" होती है. कई बार ऐसा होता है कि इंसान की उम्र तो कम होती है, लेकिन उसका दिमाग समय से पहले ही बूढ़ा होने लगता है. अब इसी बात का पता लगाने के लिए अमेरिका की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजिस्ट टोनी वायस-कोरे और उनकी टीम ने एक खास टेस्ट तैयार किया है. यह एक ब्लड टेस्ट है, जो सिर्फ एक बार खून की जांच करके बता देता है कि शरीर के 11 अलग-अलग अंग, खासकर दिमाग, उम्र के हिसाब से जवान हैं या फिर बूढ़े हो चुके हैं. यह रिसर्च नेचर मेडिसिन नाम की मशहूर साइंस पत्रिका में छपी है और इसे स्वास्थ्य जगत में एक बड़ी खोज माना जा रहा है. टेस्ट कैसे काम करता है और क्या पता चलता है यह टेस्ट खून में मौजूद खास तरह के प्रोटीन को जांचता है. हर अंग अपने अलग प्रोटीन छोड़ता है, और इन्हीं प्रोटीन के लेवल को देखकर वैज्ञानिक पता लगा लेते हैं कि वह अंग अपनी असली उम्र से जवान काम कर रहा है या बूढ़ा. रिसर्च टीम ने करीब 45,000 लोगों पर यह टेस्ट किया, जिनकी सेहत को कई सालों तक फॉलो किया गया. नतीजों में पाया गया कि जिन लोगों का दिमाग अपनी उम्र से कहीं ज्यादा बूढ़ा निकला, उनमें अल्जाइमर बीमारी होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा था. इतना ही नहीं, ऐसे लोगों की अगले 15 सालों में मौत होने की आशंका भी काफी ज्यादा बढ़ गई थी. वहीं दूसरी तरफ, जिन लोगों का दिमाग अपनी उम्र से जवान पाया गया, उनमें मौत का खतरा काफी कम देखा गया। यानी यह टेस्ट सिर्फ यह नहीं बताता कि दिमाग कैसा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले सालों में सेहत को लेकर क्या खतरे हो सकते हैं. यह भी पढ़ेंः घर में किसी को H1N1 है तो बाकी लोग कैसे बचें? इन बातों का रखें ध्यान डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्यों है यह जरूरी वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टेस्ट आने वाले समय में डॉक्टरों के लिए बहुत काम का साबित हो सकता है. अगर किसी व्यक्ति के दिमाग की उम्र समय से पहले बढ़ती दिख रही है, तो डॉक्टर उसे पहले ही सावधान कर सकते हैं और सही इलाज या जीवनशैली में बदलाव की सलाह दे सकते हैं, ताकि आगे चलकर अल्जाइमर जैसी बीमारी से बचा जा सके. खास बात यह है कि यह टेस्ट सिर्फ जीन यानी जेनेटिक जांच पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह बताता है कि समय के साथ शरीर में बदलाव कैसे हो रहे हैं, जिससे इलाज को व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से बनाया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल यह टेस्ट अभी आम अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध नहीं है और इसे मेडिकल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में अभी कुछ समय लग सकता है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज भविष्य में उम्र से जुड़ी बीमारियों को पहले ही पहचानने और रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है.  यह भी पढ़ेंः 4 साल से छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती हैं कफ सिरप, सरकार ने लगाई सख्त पाबंदी

Aug 26, 2026 - 01:30
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उम्र नहीं बढ़ी, लेकिन दिल-दिमाग हो गया बूढ़ा? इस टेस्ट से लगता है पता

हम सभी की एक उम्र वो होती है जो जन्म की तारीख से गिनी जाती है, लेकिन शरीर के अंदर हमारे दिल, दिमाग और बाकी अंगों की एक अलग ही "असली उम्र" होती है. कई बार ऐसा होता है कि इंसान की उम्र तो कम होती है, लेकिन उसका दिमाग समय से पहले ही बूढ़ा होने लगता है. अब इसी बात का पता लगाने के लिए अमेरिका की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजिस्ट टोनी वायस-कोरे और उनकी टीम ने एक खास टेस्ट तैयार किया है. यह एक ब्लड टेस्ट है, जो सिर्फ एक बार खून की जांच करके बता देता है कि शरीर के 11 अलग-अलग अंग, खासकर दिमाग, उम्र के हिसाब से जवान हैं या फिर बूढ़े हो चुके हैं. यह रिसर्च नेचर मेडिसिन नाम की मशहूर साइंस पत्रिका में छपी है और इसे स्वास्थ्य जगत में एक बड़ी खोज माना जा रहा है.

टेस्ट कैसे काम करता है और क्या पता चलता है

यह टेस्ट खून में मौजूद खास तरह के प्रोटीन को जांचता है. हर अंग अपने अलग प्रोटीन छोड़ता है, और इन्हीं प्रोटीन के लेवल को देखकर वैज्ञानिक पता लगा लेते हैं कि वह अंग अपनी असली उम्र से जवान काम कर रहा है या बूढ़ा. रिसर्च टीम ने करीब 45,000 लोगों पर यह टेस्ट किया, जिनकी सेहत को कई सालों तक फॉलो किया गया. नतीजों में पाया गया कि जिन लोगों का दिमाग अपनी उम्र से कहीं ज्यादा बूढ़ा निकला, उनमें अल्जाइमर बीमारी होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा था. इतना ही नहीं, ऐसे लोगों की अगले 15 सालों में मौत होने की आशंका भी काफी ज्यादा बढ़ गई थी. वहीं दूसरी तरफ, जिन लोगों का दिमाग अपनी उम्र से जवान पाया गया, उनमें मौत का खतरा काफी कम देखा गया। यानी यह टेस्ट सिर्फ यह नहीं बताता कि दिमाग कैसा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले सालों में सेहत को लेकर क्या खतरे हो सकते हैं.

यह भी पढ़ेंः घर में किसी को H1N1 है तो बाकी लोग कैसे बचें? इन बातों का रखें ध्यान

डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्यों है यह जरूरी

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टेस्ट आने वाले समय में डॉक्टरों के लिए बहुत काम का साबित हो सकता है. अगर किसी व्यक्ति के दिमाग की उम्र समय से पहले बढ़ती दिख रही है, तो डॉक्टर उसे पहले ही सावधान कर सकते हैं और सही इलाज या जीवनशैली में बदलाव की सलाह दे सकते हैं, ताकि आगे चलकर अल्जाइमर जैसी बीमारी से बचा जा सके. खास बात यह है कि यह टेस्ट सिर्फ जीन यानी जेनेटिक जांच पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह बताता है कि समय के साथ शरीर में बदलाव कैसे हो रहे हैं, जिससे इलाज को व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से बनाया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल यह टेस्ट अभी आम अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध नहीं है और इसे मेडिकल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में अभी कुछ समय लग सकता है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज भविष्य में उम्र से जुड़ी बीमारियों को पहले ही पहचानने और रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है. 

यह भी पढ़ेंः 4 साल से छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती हैं कफ सिरप, सरकार ने लगाई सख्त पाबंदी

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