इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर को कैसे करें कंट्रोल? जानिए 3 आसान लाइफस्टाइल बदलाव
अक्सर पेट के आसपास बढ़ती चर्बी, दिनभर थकान रहना, मीठा खाने की बार-बार इच्छा होना और दिमाग में भारीपन महसूस होना नॉर्मल बात मान ली जाती है. लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये संकेत शरीर में बढ़ रही इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं. समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता है, जब कि ब्लड शुगर का लेवल काफी नहीं बढ़ जाता है. वहीं इसे लेकर एक्सपर्ट्स रोजाना के भारतीय खाने और लाइफस्टाइल की आदतों की ओर ध्यान दिलाया, जो धीरे-धीरे लिवर को फैटी और शरीर को इंसुलिन रेजिस्टेंस बना सकती है. क्या है इंसुलिन रेजिस्टेंस? इंसुलिन वह हार्मोन है जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है. जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति नॉर्मल रिएक्शन देना कम कर देती है, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है. इसके पीछे खराब खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन जैसे कारण हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव कर प्रीडायबिटीज और शुरुआती फैटी लिवर को काफी हद तक सुधारा जा सकता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि फैटी लिवर के दो आम कारण ज्यादा शराब का सेवन और नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज है. नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज का संबंध मोटापा, बैठा-बैठा जीवन, रिफाइंड कार्ब्स और सैचुरेटेड फैट से भरपूर डाइट, इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज जैसी स्थितियों से है.1. देर रात खाना खानाएक्सपर्ट्स के अनुसार देर से डिनर करने से शरीर की सर्कैडियन रिदम प्रभावित होती है. रात के समय इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है, जिससे देर से खाने पर ब्लड शुगर और कॉर्टिसोल का लेवल बढ़ सकता है. वहीं लंबे समय तक ऐसा पैटर्न शुगर कंट्रोल को बिगाड़ सकता है. इसलिए जल्दी डिनर करना और खाने में सब्जियों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है.2. नाश्ते में प्रोटीन की कमीदिन की शुरुआत अगर हाई-प्रोटीन और लो-ग्लाइसेमिक नाश्ते से की जाए, तो यह पूरे दिन के लिए ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है और क्रेविंग्स कम होती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर मील में हेल्दी फैट और फाइबर शामिल कर और शुगर की मात्रा कम रखकर ऊर्जा को स्थिर रखा जा सकता है. साथ ही पर्याप्त नींद और स्ट्रेस का कंट्रोल भी हार्मोन बैलेंस और ब्लड शुगर रेगुलेशन के लिए जरूरी है.3. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न करनास्ट्रेंथ ट्रेनिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर बनाने में मदद करती है. यह ब्लड फ्लो सुधारती है और डायबिटीज से जुड़ी दिक्कतों जैसे नर्व डैमेज और आंखों से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम कर सकती है. इसके अलावा यह वजन कंट्रोल रखने, ब्लड प्रेशर घटाने और कोलेस्ट्रॉल लेवल सुधारने में भी सहायक है, जिससे दिल की बीमारी का खतरा कम होता है. ये भी पढ़ें-हर बार मेकअप के साथ करा लेती हैं हेयर एक्सटेंशन, हो सकता है कैंसर Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
अक्सर पेट के आसपास बढ़ती चर्बी, दिनभर थकान रहना, मीठा खाने की बार-बार इच्छा होना और दिमाग में भारीपन महसूस होना नॉर्मल बात मान ली जाती है. लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये संकेत शरीर में बढ़ रही इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं. समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता है, जब कि ब्लड शुगर का लेवल काफी नहीं बढ़ जाता है. वहीं इसे लेकर एक्सपर्ट्स रोजाना के भारतीय खाने और लाइफस्टाइल की आदतों की ओर ध्यान दिलाया, जो धीरे-धीरे लिवर को फैटी और शरीर को इंसुलिन रेजिस्टेंस बना सकती है.
क्या है इंसुलिन रेजिस्टेंस?
इंसुलिन वह हार्मोन है जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है. जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति नॉर्मल रिएक्शन देना कम कर देती है, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है. इसके पीछे खराब खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन जैसे कारण हो सकते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव कर प्रीडायबिटीज और शुरुआती फैटी लिवर को काफी हद तक सुधारा जा सकता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि फैटी लिवर के दो आम कारण ज्यादा शराब का सेवन और नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज है. नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज का संबंध मोटापा, बैठा-बैठा जीवन, रिफाइंड कार्ब्स और सैचुरेटेड फैट से भरपूर डाइट, इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज जैसी स्थितियों से है.
1. देर रात खाना खाना
एक्सपर्ट्स के अनुसार देर से डिनर करने से शरीर की सर्कैडियन रिदम प्रभावित होती है. रात के समय इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है, जिससे देर से खाने पर ब्लड शुगर और कॉर्टिसोल का लेवल बढ़ सकता है. वहीं लंबे समय तक ऐसा पैटर्न शुगर कंट्रोल को बिगाड़ सकता है. इसलिए जल्दी डिनर करना और खाने में सब्जियों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है.
2. नाश्ते में प्रोटीन की कमी
दिन की शुरुआत अगर हाई-प्रोटीन और लो-ग्लाइसेमिक नाश्ते से की जाए, तो यह पूरे दिन के लिए ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है और क्रेविंग्स कम होती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर मील में हेल्दी फैट और फाइबर शामिल कर और शुगर की मात्रा कम रखकर ऊर्जा को स्थिर रखा जा सकता है. साथ ही पर्याप्त नींद और स्ट्रेस का कंट्रोल भी हार्मोन बैलेंस और ब्लड शुगर रेगुलेशन के लिए जरूरी है.
3. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न करना
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर बनाने में मदद करती है. यह ब्लड फ्लो सुधारती है और डायबिटीज से जुड़ी दिक्कतों जैसे नर्व डैमेज और आंखों से जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम कर सकती है. इसके अलावा यह वजन कंट्रोल रखने, ब्लड प्रेशर घटाने और कोलेस्ट्रॉल लेवल सुधारने में भी सहायक है, जिससे दिल की बीमारी का खतरा कम होता है.
ये भी पढ़ें-हर बार मेकअप के साथ करा लेती हैं हेयर एक्सटेंशन, हो सकता है कैंसर
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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