अमेरिका ने किया कब्जा, राष्ट्रपति भी बनाए गए बंदी; फिर भी 50 परसेंट तक उछल गया वेनेजुएला का शेयर बाजार
Venezuela Stock market Jumps: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और लंबे समय से सत्ता में रहे राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपने नियंत्रण में लेने के बाद जहां वैश्विक स्तर पर बड़े भू-राजनीतिक बदलाव देखे जा रहे हैं, वहीं इसका एक चौंकाने वाला असर वेनेजुएला के शेयर बाजार पर भी पड़ा है. इस सप्ताह वहां के शेयर बाजार में अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों का रुख बेहद सकारात्मक नजर आ रहा है. वेनेजुएला की राजधानी काराकस में शेयर बाजार की चाल को दर्शाने वाले आईबीसी (IBC) इंडेक्स के अनुसार, मंगलवार को एक ही दिन में बाजार करीब 50 प्रतिशत तक उछल गया. लगातार दूसरे दिन तेज उछाल तेजी केवल मंगलवार तक सीमित नहीं रही. सोमवार को आईबीसी इंडेक्स में करीब 16 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी. इससे पहले 29 दिसंबर को इंडेक्स 22 प्रतिशत चढ़ा, जबकि नए साल के बाद 2 जनवरी को 7 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली. इस तरह जनवरी के सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में ही आईबीसी इंडेक्स करीब 87 प्रतिशत तक उछल गया, जो राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बने सकारात्मक निवेशक सेंटिमेंट को दर्शाता है. ऐतिहासिक प्रदर्शन आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 को छोड़ दें तो वेनेजुएला का आईबीसी इंडेक्स पिछले एक साल में 1,644 प्रतिशत तक चढ़ चुका है.वेनेजुएला में संगठित शेयर बाजार कारोबार की शुरुआत 2018 में हुई थी. इसके बाद— 2019 में बाजार 4,400 प्रतिशत, 2020 में 1,380 प्रतिशत चढ़ा. अगले चार वर्षों में भी बाजार ने 100 प्रतिशत से अधिक का वार्षिक रिटर्न दिया. हालांकि, 2024 में तेजी सबसे कम रही, जब इंडेक्स ने करीब 106 प्रतिशत का रिटर्न दिया. राजनीतिक घटनाक्रम बना बड़ी वजह विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयर बाजार में अचानक आई इस तेजी के पीछे राजनीतिक अनिश्चितता और सत्ता परिवर्तन की उम्मीदें सबसे बड़ी वजह हैं. अमेरिका द्वारा हमले के बाद राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मादुरो को अमेरिका में नार्को-टेररिज्म समेत कई गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ सकता है. इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों का ध्यान वेनेजुएला के तेल निर्यात, प्रतिबंधों में संभावित ढील और वॉशिंगटन के साथ भविष्य के रिश्तों पर केंद्रित हो गया है. यही वजह है कि बाजार में तेज खरीदारी देखने को मिल रही है. ये भी पढ़ें: भारतीय रुपये की मजबूती देख डॉलर हुआ पस्त, जानें आज कैसे अमेरिकी करेंसी को मिली शिकस्त
Venezuela Stock market Jumps: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और लंबे समय से सत्ता में रहे राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपने नियंत्रण में लेने के बाद जहां वैश्विक स्तर पर बड़े भू-राजनीतिक बदलाव देखे जा रहे हैं, वहीं इसका एक चौंकाने वाला असर वेनेजुएला के शेयर बाजार पर भी पड़ा है. इस सप्ताह वहां के शेयर बाजार में अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों का रुख बेहद सकारात्मक नजर आ रहा है.
वेनेजुएला की राजधानी काराकस में शेयर बाजार की चाल को दर्शाने वाले आईबीसी (IBC) इंडेक्स के अनुसार, मंगलवार को एक ही दिन में बाजार करीब 50 प्रतिशत तक उछल गया.
लगातार दूसरे दिन तेज उछाल
तेजी केवल मंगलवार तक सीमित नहीं रही. सोमवार को आईबीसी इंडेक्स में करीब 16 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी. इससे पहले 29 दिसंबर को इंडेक्स 22 प्रतिशत चढ़ा, जबकि नए साल के बाद 2 जनवरी को 7 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली.
इस तरह जनवरी के सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में ही आईबीसी इंडेक्स करीब 87 प्रतिशत तक उछल गया, जो राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बने सकारात्मक निवेशक सेंटिमेंट को दर्शाता है.
ऐतिहासिक प्रदर्शन
आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 को छोड़ दें तो वेनेजुएला का आईबीसी इंडेक्स पिछले एक साल में 1,644 प्रतिशत तक चढ़ चुका है.
वेनेजुएला में संगठित शेयर बाजार कारोबार की शुरुआत 2018 में हुई थी. इसके बाद—
- 2019 में बाजार 4,400 प्रतिशत,
- 2020 में 1,380 प्रतिशत चढ़ा.
अगले चार वर्षों में भी बाजार ने 100 प्रतिशत से अधिक का वार्षिक रिटर्न दिया. हालांकि, 2024 में तेजी सबसे कम रही, जब इंडेक्स ने करीब 106 प्रतिशत का रिटर्न दिया.
राजनीतिक घटनाक्रम बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयर बाजार में अचानक आई इस तेजी के पीछे राजनीतिक अनिश्चितता और सत्ता परिवर्तन की उम्मीदें सबसे बड़ी वजह हैं. अमेरिका द्वारा हमले के बाद राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मादुरो को अमेरिका में नार्को-टेररिज्म समेत कई गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ सकता है.
इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों का ध्यान वेनेजुएला के तेल निर्यात, प्रतिबंधों में संभावित ढील और वॉशिंगटन के साथ भविष्य के रिश्तों पर केंद्रित हो गया है. यही वजह है कि बाजार में तेज खरीदारी देखने को मिल रही है.
ये भी पढ़ें: भारतीय रुपये की मजबूती देख डॉलर हुआ पस्त, जानें आज कैसे अमेरिकी करेंसी को मिली शिकस्त
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