अब ट्रंप ने इन चीजों पर ठोका 100% टैक्स, नए फरमान से हिल गईं दुनिया
Trump New 100% Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अमेरिका की निर्भरता को कम करने के मकसद से बाहर से मंगाए जाने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है. यह टैरिफ उन संवेदनशील ड्रोनों पर है, जिनका वजन 25 किलोग्राम से ज्यादा है या जिनमें थर्मल इमेजिंग जैसी एडवांस सुरक्षा तकनीक है. राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में नहीं आने वाले छोटे ड्रोनों पर 25% का कम टैरिफ लगेगा. ट्रंप का क्या है मकसद? भले ही यह टैरिफ सभी देशों से आने वाले ड्रोनों पर लागू होता है, लेकिन इसका मुख्य निशाना चीन है. चीनी ड्रोन टेक्नोलॉजी के वर्चस्व को तोड़ने के लिए यह भारी-भरकम टैरिफ सिर्फ उन्हीं श्रेणियों में लगाया गया है, जहां चीन का एकाधिकार है. जैसे कि चीन का ग्लोबल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट मार्केट पर दबदबा है. अमेरिका के कमर्शियल मार्केट में लगभग 80% ड्रोन चीन से ही आते हैं. अमेरिका में हॉलीवुड से लेकर कंटेंट क्रिएशन, रियल एस्टेट और एग्रीकल्चरल सेक्टर में भी चीनी ड्रोन्स का इस्तेमाल होता है. चीनी टेक कंपनी DJI (Da-Jiang Innovations) का दुनिया के कमर्शियल ड्रोन मार्केट्स पर 70% से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है. ट्रंप के निशाने पर चीन व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा कि इन उपायों का मकसद ड्रोन और उनके पार्ट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना है. ज्यादातर नए टैरिफ 3 सितंबर से लागू होने वाले हैं. पिछले हफ्ते चीन ने जबरदस्ती मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में अमेरिका को ड्रोन के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था. चीन ने यह कदम अमेरिका द्वारा चीन और 59 अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाने के कुछ दिनों बाद उठाया. ट्रंप के फैसले का भारत पर असर? ट्रंप ने भले ही भारत को 100% की सबसे सख्त श्रेणी के तहत नहीं रखा है, लेकिन भारतीय ड्रोन एक्सपोटर्स पर भी दबाव कुछ कम नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका भारतीय कमर्शियल और छोटे ड्रोनों पर भी 25% टैरिफ लगा रहा है. हालांकि, इसकी एक अच्छी बात यह है कि अमेरिकी कमर्शियल ड्रोन मार्केट पर चीन का दबदबा कम होगा, तो यह ideaForge, Drone Acharya और Garuda Aerospace जैसी भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजारों में पैर पसारने का एक बढ़िया मौका भी होगा. ये भी पढ़ें: Air India: टर्बुलेंस विवाद के बीच सैलरी हाइक पर Air India का बड़ा फैसला, CEO ने साफ की स्थिति
Trump New 100% Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर अमेरिका की निर्भरता को कम करने के मकसद से बाहर से मंगाए जाने वाले ड्रोन और उनके पार्ट्स पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है.
व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है. यह टैरिफ उन संवेदनशील ड्रोनों पर है, जिनका वजन 25 किलोग्राम से ज्यादा है या जिनमें थर्मल इमेजिंग जैसी एडवांस सुरक्षा तकनीक है. राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में नहीं आने वाले छोटे ड्रोनों पर 25% का कम टैरिफ लगेगा.
ट्रंप का क्या है मकसद?
भले ही यह टैरिफ सभी देशों से आने वाले ड्रोनों पर लागू होता है, लेकिन इसका मुख्य निशाना चीन है. चीनी ड्रोन टेक्नोलॉजी के वर्चस्व को तोड़ने के लिए यह भारी-भरकम टैरिफ सिर्फ उन्हीं श्रेणियों में लगाया गया है, जहां चीन का एकाधिकार है. जैसे कि चीन का ग्लोबल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट मार्केट पर दबदबा है.
अमेरिका के कमर्शियल मार्केट में लगभग 80% ड्रोन चीन से ही आते हैं. अमेरिका में हॉलीवुड से लेकर कंटेंट क्रिएशन, रियल एस्टेट और एग्रीकल्चरल सेक्टर में भी चीनी ड्रोन्स का इस्तेमाल होता है. चीनी टेक कंपनी DJI (Da-Jiang Innovations) का दुनिया के कमर्शियल ड्रोन मार्केट्स पर 70% से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है.
ट्रंप के निशाने पर चीन
व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा कि इन उपायों का मकसद ड्रोन और उनके पार्ट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना है. ज्यादातर नए टैरिफ 3 सितंबर से लागू होने वाले हैं. पिछले हफ्ते चीन ने जबरदस्ती मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में अमेरिका को ड्रोन के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी और छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था. चीन ने यह कदम अमेरिका द्वारा चीन और 59 अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाने के कुछ दिनों बाद उठाया.
ट्रंप के फैसले का भारत पर असर?
ट्रंप ने भले ही भारत को 100% की सबसे सख्त श्रेणी के तहत नहीं रखा है, लेकिन भारतीय ड्रोन एक्सपोटर्स पर भी दबाव कुछ कम नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका भारतीय कमर्शियल और छोटे ड्रोनों पर भी 25% टैरिफ लगा रहा है. हालांकि, इसकी एक अच्छी बात यह है कि अमेरिकी कमर्शियल ड्रोन मार्केट पर चीन का दबदबा कम होगा, तो यह ideaForge, Drone Acharya और Garuda Aerospace जैसी भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजारों में पैर पसारने का एक बढ़िया मौका भी होगा.
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Air India: टर्बुलेंस विवाद के बीच सैलरी हाइक पर Air India का बड़ा फैसला, CEO ने साफ की स्थिति
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