Xप्लेन: बीजेपी में संगठनात्मक भूमिका से देश की कमान तक, जन्मदिन पर जानिए कैसा रहा अबतक PM मोदी सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 सितंबर को 76 साल के हो गए हैं. उनका जन्मदिन एक और अहम पड़ाव के साथ आ रहा है. दरअसल पीएम मोदी के सरकार में पहली बार जिम्मेदारी संभालने के 25 साल पूरे हो गए हैं. पीएम मोदी 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने और 2014 में राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले लगभग 13 साल तक इस पद पर रहे. 2014 से अब तक उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर उनका तीसरा कार्यकाल है. भारतीय जनता पार्टी इस मौके पर एक महीने तक चलने वाला 'सेवा संकल्प अभियान' चला रही है, जो 17 सितंबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर तक चलेगा. इस अभियान में ऐसे कार्यक्रम शामिल हैं. पीएम मोदी का राजनीतिक सफर तीन बहुत अलग-अलग चरणों से गुजरा है. बीजेपी में संगठनात्मक भूमिका, गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर लंबा कार्यकाल और एक दशक से ज़्यादा समय तक भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर काम करना. आज उनके जन्मदिन पर आइए उनके सफर पर एक नजर डालते हैं. 1. 2001: गुजरात के सबसे बड़े पद पर अचानक नियुक्ति पहला बड़ा मोड़ 7 अक्टूबर 2001 को आया, जब बीजेपी के संगठन नेता रहे नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया. यह पार्टी संगठन से संवैधानिक पद पर अचानक हुआ बदलाव था. मोदी ने खुद 2025 में लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में इस पल को याद करते हुए कहा था कि उन्हें "अचानक मुख्यमंत्री बनने की ज़िम्मेदारी" दी गई थी. हालात बहुत मुश्किल थे. जनवरी 2001 में गुजरात में ज़बरदस्त भूकंप आया था और नई सरकार के सामने पुनर्निर्माण का बड़ा काम था. पीएम मोदी ने उस वक्त को याद करते हुए कहा था, "उस समय सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी गुजरात का पुनर्वास थी." इस कदम से असल में सरकार के मुखिया के तौर पर लगातार 25 साल की सेवा का वह दौर शुरू हुआ, जिसे बीजेपी 2026 में खास तौर पर रेखांकित कर रही है. 2. 2002 का गुजरात चुनाव 2002 का गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के करियर का एक और अहम मोड़ साबित हुआ. उन्होंने कुछ ही महीने पहले मुख्यमंत्री का पद संभाला था. यह चुनाव उस साल फरवरी में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद हुए सांप्रदायिक हिंसा के माहौल में हुआ था. बीजेपी ने गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से 127 सीटें जीतीं और मोदी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपना पहला पूरा कार्यकाल शुरू किया. इस दौरान मोदी राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में भी रहे. 3. 2007 की गुजरात जीत और ‘गुजरात मॉडल’ 2007 के विधानसभा चुनाव ने बीजेपी में पीएम मोदी की स्थिति को और मज़बूत किया. पार्टी ने 117 सीटें जीतीं, जिससे उन्हें लगातार दूसरी बार बहुमत मिला. अगले कुछ सालों में, गुजरात का निवेश माहौल, इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिकीकरण और प्रशासनिक सुधार उनकी लीडरशिप से जुड़ते चले गए. इसके बाद "गुजरात मॉडल" शब्द पीएम मोदी से जुड़ी राजनीतिक चर्चा का मुख्य हिस्सा बन गया. उनके समर्थकों ने गुजरात को इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया कि इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और प्रशासनिक कुशलता से आर्थिक विकास को तेजी दी जा सकती है. 4. 2012 का गुजरात चुनाव, राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक लॉन्चपैड 2012 का विधानसभा चुनाव एक और अहम पड़ाव था. बीजेपी ने 115 सीटें जीतीं और मोदी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. तब तक, उनकी राजनीतिक पहचान गुजरात से कहीं आगे बढ़ चुकी थी. लगातार तीन चुनावी जीत, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अहमियत और बीजेपी के भीतर उनकी साख ने उन्हें बड़ी भूमिका के लिए एक मज़बूत दावेदार बना दिया. अगले साल एक निर्णायक मोड़ आया. 5. 2013: मोदी बीजेपी के PM उम्मीदवार बने सितंबर 2013 में, बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया. शायद यही वह पल था, जब गुजरात की राजनीतिक कहानी एक राष्ट्रीय अभियान में बदल गई. बीजेपी के अभियान ने मोदी को एक ऐसे नेता के तौर पर पेश किया, जो विकास पर ध्यान देता है और निर्णायक शासन देने में सक्षम है. 2014 के चुनाव में टेक्नोलॉजी और मतदाताओं के साथ सीधे संवाद पर भी बहुत ज़्यादा ज़ोर दिया गया. इस नतीजे ने भारतीय राजनीति की दिशा ही बदल दी. 6. 2014: गांधीनगर से नई दिल्ली तक का सफ़र 2014 के लोकसभा चुनाव ने पीएम मोदी के करियर की अब तक की सबसे अहम चुनावी जीत दिलाई. बीजेपी ने अकेले 282 सीटें जीतीं और 543 सदस्यों वाली लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को और भी ज़्यादा सीटें मिलीं. मोदी 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बने. लाल किले से उनके पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में एक ऐसी बात कही गई, जो उनकी राजनीतिक पहचान का मुख्य हिस्सा बन गई: "मैं प्रधानमंत्री नहीं हूँ. मैं प्रधान सेवक हूँ." प्रधानमंत्री को "प्रधान सेवक" के तौर पर देखने का यह विचार, मोदी द्वारा अपने पूरे राजनीतिक करियर में इस्तेमाल की जाने वाली सेवा-भाव वाली भाषा के अनुरूप था. उनके पहले कार्यकाल में स्वच्छ भारत मिशन, जन धन योजना, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और अन्य कार्यक्रम शुरू किए गए, जो सरकार के विकास और कल्याणकारी एजेंडे से जुड़ गए. 7. 2019: बीजेपी की बड़ी जीत के साथ वापसी अगर 2014 ने मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया, तो 2019 के चुनाव ने उनके राजनीतिक प्रभाव की मज़बूती को पक्का कर दिया. बीजेपी ने अपनी सीटों की संख्या 282 से बढ़ाकर 303 कर ली, जबकि NDA ने 350 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया. मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने. चुनाव प्रचार मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने, नेतृत्व और सरकार के कामकाज पर केंद्रित रहा. बीजेपी का नारा "सबका साथ, सबका विकास" जिसे बाद में "सबका विश्वास" और "सबका प्रयास" तक बढ़ाया गया सरकार की व्यापक राजनीतिक शब्दावली का हिस्सा बन गया. 8. 2019: अनुच्छेद 370 और एक अलग दूसरा कार्यकाल 2019 की जीत के कुछ ही महीनों के भीतर सरकार ने एक बहुत अहम राजनीतिक फ़ैसला लिया. अगस्त 2019 में, सं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 सितंबर को 76 साल के हो गए हैं. उनका जन्मदिन एक और अहम पड़ाव के साथ आ रहा है. दरअसल पीएम मोदी के सरकार में पहली बार जिम्मेदारी संभालने के 25 साल पूरे हो गए हैं. पीएम मोदी 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने और 2014 में राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले लगभग 13 साल तक इस पद पर रहे. 2014 से अब तक उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर उनका तीसरा कार्यकाल है. भारतीय जनता पार्टी इस मौके पर एक महीने तक चलने वाला 'सेवा संकल्प अभियान' चला रही है, जो 17 सितंबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर तक चलेगा. इस अभियान में ऐसे कार्यक्रम शामिल हैं.
पीएम मोदी का राजनीतिक सफर तीन बहुत अलग-अलग चरणों से गुजरा है. बीजेपी में संगठनात्मक भूमिका, गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर लंबा कार्यकाल और एक दशक से ज़्यादा समय तक भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर काम करना. आज उनके जन्मदिन पर आइए उनके सफर पर एक नजर डालते हैं.
1. 2001: गुजरात के सबसे बड़े पद पर अचानक नियुक्ति
पहला बड़ा मोड़ 7 अक्टूबर 2001 को आया, जब बीजेपी के संगठन नेता रहे नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया. यह पार्टी संगठन से संवैधानिक पद पर अचानक हुआ बदलाव था. मोदी ने खुद 2025 में लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में इस पल को याद करते हुए कहा था कि उन्हें "अचानक मुख्यमंत्री बनने की ज़िम्मेदारी" दी गई थी. हालात बहुत मुश्किल थे. जनवरी 2001 में गुजरात में ज़बरदस्त भूकंप आया था और नई सरकार के सामने पुनर्निर्माण का बड़ा काम था. पीएम मोदी ने उस वक्त को याद करते हुए कहा था, "उस समय सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी गुजरात का पुनर्वास थी."
इस कदम से असल में सरकार के मुखिया के तौर पर लगातार 25 साल की सेवा का वह दौर शुरू हुआ, जिसे बीजेपी 2026 में खास तौर पर रेखांकित कर रही है.
2. 2002 का गुजरात चुनाव
2002 का गुजरात विधानसभा चुनाव पीएम मोदी के करियर का एक और अहम मोड़ साबित हुआ. उन्होंने कुछ ही महीने पहले मुख्यमंत्री का पद संभाला था. यह चुनाव उस साल फरवरी में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद हुए सांप्रदायिक हिंसा के माहौल में हुआ था. बीजेपी ने गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में से 127 सीटें जीतीं और मोदी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपना पहला पूरा कार्यकाल शुरू किया. इस दौरान मोदी राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में भी रहे.
3. 2007 की गुजरात जीत और ‘गुजरात मॉडल’
2007 के विधानसभा चुनाव ने बीजेपी में पीएम मोदी की स्थिति को और मज़बूत किया. पार्टी ने 117 सीटें जीतीं, जिससे उन्हें लगातार दूसरी बार बहुमत मिला. अगले कुछ सालों में, गुजरात का निवेश माहौल, इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिकीकरण और प्रशासनिक सुधार उनकी लीडरशिप से जुड़ते चले गए. इसके बाद "गुजरात मॉडल" शब्द पीएम मोदी से जुड़ी राजनीतिक चर्चा का मुख्य हिस्सा बन गया.
उनके समर्थकों ने गुजरात को इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया कि इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और प्रशासनिक कुशलता से आर्थिक विकास को तेजी दी जा सकती है.
4. 2012 का गुजरात चुनाव, राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक लॉन्चपैड
2012 का विधानसभा चुनाव एक और अहम पड़ाव था. बीजेपी ने 115 सीटें जीतीं और मोदी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. तब तक, उनकी राजनीतिक पहचान गुजरात से कहीं आगे बढ़ चुकी थी. लगातार तीन चुनावी जीत, राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अहमियत और बीजेपी के भीतर उनकी साख ने उन्हें बड़ी भूमिका के लिए एक मज़बूत दावेदार बना दिया. अगले साल एक निर्णायक मोड़ आया.
5. 2013: मोदी बीजेपी के PM उम्मीदवार बने सितंबर 2013 में, बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए मोदी को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया. शायद यही वह पल था, जब गुजरात की राजनीतिक कहानी एक राष्ट्रीय अभियान में बदल गई. बीजेपी के अभियान ने मोदी को एक ऐसे नेता के तौर पर पेश किया, जो विकास पर ध्यान देता है और निर्णायक शासन देने में सक्षम है. 2014 के चुनाव में टेक्नोलॉजी और मतदाताओं के साथ सीधे संवाद पर भी बहुत ज़्यादा ज़ोर दिया गया. इस नतीजे ने भारतीय राजनीति की दिशा ही बदल दी.
6. 2014: गांधीनगर से नई दिल्ली तक का सफ़र
2014 के लोकसभा चुनाव ने पीएम मोदी के करियर की अब तक की सबसे अहम चुनावी जीत दिलाई. बीजेपी ने अकेले 282 सीटें जीतीं और 543 सदस्यों वाली लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) को और भी ज़्यादा सीटें मिलीं.
मोदी 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री बने. लाल किले से उनके पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में एक ऐसी बात कही गई, जो उनकी राजनीतिक पहचान का मुख्य हिस्सा बन गई: "मैं प्रधानमंत्री नहीं हूँ. मैं प्रधान सेवक हूँ." प्रधानमंत्री को "प्रधान सेवक" के तौर पर देखने का यह विचार, मोदी द्वारा अपने पूरे राजनीतिक करियर में इस्तेमाल की जाने वाली सेवा-भाव वाली भाषा के अनुरूप था. उनके पहले कार्यकाल में स्वच्छ भारत मिशन, जन धन योजना, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और अन्य कार्यक्रम शुरू किए गए, जो सरकार के विकास और कल्याणकारी एजेंडे से जुड़ गए.
7. 2019: बीजेपी की बड़ी जीत के साथ वापसी
अगर 2014 ने मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया, तो 2019 के चुनाव ने उनके राजनीतिक प्रभाव की मज़बूती को पक्का कर दिया. बीजेपी ने अपनी सीटों की संख्या 282 से बढ़ाकर 303 कर ली, जबकि NDA ने 350 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया.
मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने. चुनाव प्रचार मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने, नेतृत्व और सरकार के कामकाज पर केंद्रित रहा. बीजेपी का नारा "सबका साथ, सबका विकास" जिसे बाद में "सबका विश्वास" और "सबका प्रयास" तक बढ़ाया गया सरकार की व्यापक राजनीतिक शब्दावली का हिस्सा बन गया.
8. 2019: अनुच्छेद 370 और एक अलग दूसरा कार्यकाल
2019 की जीत के कुछ ही महीनों के भीतर सरकार ने एक बहुत अहम राजनीतिक फ़ैसला लिया. अगस्त 2019 में, संसद ने उस कानून को मंज़ूरी दी, जिसने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को खत्म कर दिया और पूर्व राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया.
यह कदम बीजेपी का लंबे समय से चला आ रहा वादा था. समर्थकों ने इसे दशकों पुराने राजनीतिक वादे को पूरा करने और जम्मू-कश्मीर को बाकी भारत के साथ और मज़बूती से जोड़ने वाला कदम बताया. विपक्षी दलों और आलोचकों ने फ़ैसला लेने के तरीके और संघवाद, नागरिक स्वतंत्रता और उस क्षेत्र पर इसके असर को लेकर सवाल उठाए. यह उन बड़े फ़ैसलों में से एक था, जिन्होंने मोदी के दूसरे कार्यकाल को परिभाषित किया.
9. 2020-21: महामारी ने मोदी सरकार की परीक्षा ली
COVID-19 ने शायद मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल की सबसे अनोखी प्रशासनिक चुनौती पेश की. मार्च 2020 में भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लागू हुआ. इसके बाद सरकार ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू किया और साथ ही भोजन सहायता और आर्थिक राहत के उपाय भी लागू किए.
महामारी का दौर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (सीधे लाभ हस्तांतरण) और वैक्सीन उत्पादन पर सरकार के ज़ोर से भी गहराई से जुड़ा रहा. COVID-19 से निपटने के सरकार के तौर-तरीकों पर आज भी बहस होती है. समर्थक टीकाकरण और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण के बड़े पैमाने का जिक्र करते हैं, जबकि आलोचकों ने 2020 के लॉकडाउन के गंभीर आर्थिक और मानवीय नतीजों खासकर प्रवासी मज़दूरों के संकट और 2021 में आई विनाशकारी दूसरी लहर पर ज़ोर दिया है.
10. 2024: मोदी का तीसरा कार्यकाल
2024 के लोकसभा चुनाव ने एक और ऐतिहासिक पल देखा. बीजेपी ने 240 सीटें जीतीं, जो अकेले बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों से कम थीं, लेकिन NDA को सरकार बनाने के लिए काफ़ी सीटें मिल गईं. मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.
इसके साथ ही, वे जवाहरलाल नेहरू के बाद आम चुनावों के बाद लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए पद संभालने वाले दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री बन गए. यह नतीजा बीजेपी की पिछली दो संसदीय जीतों से अलग था: इस बार, सरकार बनाने के लिए गठबंधन सहयोगियों की ज़रूरत पड़ी.
फ़रवरी 2025 में संसद में बोलते हुए, PM मोदी ने 2014 से लगातार मिले जनादेश को इस बात का सबूत बताया कि उनकी सरकार के विकास मॉडल को "लोगों ने परखा, समझा और उसका समर्थन किया है."
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