World Ayurveda Day: क्या आयुर्वेद से खत्म की जा सकती है ऑटोइम्यून डिजीज? जानिए क्या करते हैं एक्सपर्ट
World Ayurveda Day: दुनिया के सामने आज सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है (Autoimmune Diseases,) ये ऐसी बीमारियां है, जिनमें शरीर का इम्यून सिस्टम खुद अपनी कोशिकाओं पर हमला करने लगता है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इनके लिए लंबे समय तक चलने वाली दवाइयों और कंट्रोल थेरेपी का सुझाव देता है. लेकिन, क्या आयुर्वेद में इसका कोई स्थायी समाधान है? दरअसल, 23 सितंबर को विश्व आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है. इसी को लेकर हम आपको आज बताने जा रहे हैं कि, आयुर्वेद की दवाइयों के जरिए ऑटोइम्यून डिजीज को खत्म किया जा सकता है या नहीं? आयुर्वेद का नजरिया डॉ. सुभाष गोयल का कहना है कि,आयुर्वेद सिर्फ लक्षण दबाने का इलाज नहीं करता, बल्कि बीमारी की जड़ तक जाकर शरीर का संतुलन बनाता है. उनके अनुसार, ऑटोइम्यून डिजीज जैसे रुमेटॉइड आर्थराइटिस या सोरायसिस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) असंतुलित हो जाती है. हालांकि आयुर्वेद भी इसे पूरी तरह से खत्म करने का दावा नहीं करता. ये भी पढ़े- स्कूलों में पढ़ने वाले 47% बच्चे गर्दन, कमर और जोड़ों के दर्द से परेशान, एम्स की स्टडी में बड़ा खुलासा पंचकर्म थेरेपी और डिटॉक्स आयुर्वेद में पंचकर्म थेरेपी को ऑटोइम्यून डिजीज के मैनेजमेंट में कारगर माना गया है. यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है. खून की शुद्धि और पाचन तंत्र की मजबूती पर काम करता है. मानसिक तनाव कम करने में भी मदद करता है, जो ऑटोइम्यून डिजीज को ट्रिगर करता है. औषधियां और हर्बल उपचार कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां, जो इन बीमारियों में सहायक मानी जाती हैं. गिलोय: इम्यूनिटी को बैलेंस करती है. अश्वगंधा: सूजन कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करती है. हल्दी: Natural anti-inflammatory मानी जाती है. नीम और त्रिफला: शरीर को डिटॉक्स करते हैं. आहार और जीवनशैली में बदलाव डॉ. गोयल बताते हैं कि सिर्फ औषधि ही नहीं, बल्कि भोजन और जीवनशैली भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. तैलीय और जंक फूड से बचें. ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज खाएं. योग और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अभी तक ऑटोइम्यून डिजीज का स्थायी इलाज नहीं खोज पाया है. आयुर्वेद इसे पूरी तरह खत्म करने का दावा तो नहीं करता, लेकिन यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को संतुलित करके लक्षणों को कम करने और जीवन को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. Kerala Brain Eating Amoeba: 60 साल में दुनिया में 488 मौतें... भारत में सिर्फ 9 महीने में ही 19 लोग निगल गई ये खतरनाक बीमारी! Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
World Ayurveda Day: दुनिया के सामने आज सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है (Autoimmune Diseases,) ये ऐसी बीमारियां है, जिनमें शरीर का इम्यून सिस्टम खुद अपनी कोशिकाओं पर हमला करने लगता है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इनके लिए लंबे समय तक चलने वाली दवाइयों और कंट्रोल थेरेपी का सुझाव देता है. लेकिन, क्या आयुर्वेद में इसका कोई स्थायी समाधान है?
दरअसल, 23 सितंबर को विश्व आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है. इसी को लेकर हम आपको आज बताने जा रहे हैं कि, आयुर्वेद की दवाइयों के जरिए ऑटोइम्यून डिजीज को खत्म किया जा सकता है या नहीं?
आयुर्वेद का नजरिया
डॉ. सुभाष गोयल का कहना है कि,आयुर्वेद सिर्फ लक्षण दबाने का इलाज नहीं करता, बल्कि बीमारी की जड़ तक जाकर शरीर का संतुलन बनाता है. उनके अनुसार, ऑटोइम्यून डिजीज जैसे रुमेटॉइड आर्थराइटिस या सोरायसिस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) असंतुलित हो जाती है. हालांकि आयुर्वेद भी इसे पूरी तरह से खत्म करने का दावा नहीं करता.
ये भी पढ़े- स्कूलों में पढ़ने वाले 47% बच्चे गर्दन, कमर और जोड़ों के दर्द से परेशान, एम्स की स्टडी में बड़ा खुलासा
पंचकर्म थेरेपी और डिटॉक्स
- आयुर्वेद में पंचकर्म थेरेपी को ऑटोइम्यून डिजीज के मैनेजमेंट में कारगर माना गया है.
- यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है.
- खून की शुद्धि और पाचन तंत्र की मजबूती पर काम करता है.
- मानसिक तनाव कम करने में भी मदद करता है, जो ऑटोइम्यून डिजीज को ट्रिगर करता है.
औषधियां और हर्बल उपचार
- कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां, जो इन बीमारियों में सहायक मानी जाती हैं.
- गिलोय: इम्यूनिटी को बैलेंस करती है.
- अश्वगंधा: सूजन कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करती है.
- हल्दी: Natural anti-inflammatory मानी जाती है.
- नीम और त्रिफला: शरीर को डिटॉक्स करते हैं.
आहार और जीवनशैली में बदलाव
डॉ. गोयल बताते हैं कि सिर्फ औषधि ही नहीं, बल्कि भोजन और जीवनशैली भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं.
- तैलीय और जंक फूड से बचें.
- ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज खाएं.
- योग और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अभी तक ऑटोइम्यून डिजीज का स्थायी इलाज नहीं खोज पाया है. आयुर्वेद इसे पूरी तरह खत्म करने का दावा तो नहीं करता, लेकिन यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को संतुलित करके लक्षणों को कम करने और जीवन को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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