Women Health Summer: क्या गर्मी से बिगड़ रहे हैं पीरियड्स? डॉक्टर से जानें क्या है इसका सच

Impact Of High Temperature On Hormones In Women: गर्मियों का मौसम सिर्फ पसीना और थकान ही नहीं लाता, बल्कि कई महिलाओं के लिए शरीर की अंदरूनी लय को भी बदल देता है. आमतौर पर मासिक धर्म को एक नियमित और तय चक्र माना जाता है, लेकिन तेज गर्मी के दौरान यह संतुलन बिगड़ सकता है. कभी पीरियड्स जल्दी आ जाते हैं, कभी देर से, तो कभी फ्लो सामान्य से अलग महसूस होता है. यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि शरीर की नेचुरल प्रतिक्रिया है, जो तापमान, पानी की कमी और तनाव के असर से जुड़ी होती है.  क्या कहते हैं एक्सपर्ट डॉ. श्रुति कोटांगले, कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट ने TOI को बताया कि गर्मी का असर सिर्फ सांस या यूरिन से जुड़ी समस्याओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पीरियड को भी प्रभावित कर सकता है. शरीर में पानी की कमी और बढ़ता तापमान हार्मोनल बदलाव ला सकता है. दरअसल, जब तापमान बढ़ता है तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करता है. इस प्रक्रिया में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं, जो पीरियड्स को नियंत्रित करते हैं.  फ्लो में भी बदलाव गर्मी के दिनों में कई महिलाओं को फ्लो में बदलाव महसूस होता है. किसी महीने ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है, तो कभी बहुत हल्की. इसका कारण शरीर में पानी की कमी और ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव होता है. डिहाइड्रेशन के कारण खून गाढ़ा हो सकता है, जबकि हीट स्ट्रेस गर्भाशय के संकुचन को प्रभावित करता है. डॉ. कोटांगले कहती हैं कि हर महिला में इसका असर अलग होता है, इसलिए फ्लो में बदलाव सामान्य है.  इसे भी पढ़ें - Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद पानी की कमी और डिप्रेशन पानी की कमी और तनाव भी इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाते हैं. गर्मियों में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है, जिससे क्रैम्प्स बढ़ सकती है.ल  इसके साथ ही, गर्मी के कारण कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन भी बढ़ जाता है, जो मूड स्विंग्स, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकता है. यही वजह है कि इस मौसम में कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ज्यादा थकावट और भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस होता है. नींद का भी असर गर्मी का असर नींद पर भी पड़ता है. नींद ठीक न हो तो हार्मोनल संतुलन और बिगड़ जाता है. यह एक चक्र की तरह काम करता है कि गर्मी नींद को प्रभावित करती है, नींद हार्मोन को और हार्मोन पीरियड्स को. अत्यधिक गर्मी पीएमएस के लक्षणों को भी बढ़ा सकती है, जैसे सिरदर्द, उल्टी, शरीर दर्द और बेचैनी. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर महिला को ये बदलाव महसूस हों.  किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस दौरान सबसे जरूरी है सही दिनचर्या अपनाना। पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है कि दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर. तरबूज, खीरा जैसे फल और नारियल पानी, छाछ जैसे पारंपरिक पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. हल्का भोजन, कम कैफीन और नियमित नींद भी शरीर को संतुलित रखते हैं. हल्की एक्सरसाइज या योग से भी आराम मिल सकता है. इसे भी पढ़ें -Pregnancy Care in Summer: बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

May 6, 2026 - 20:30
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Women Health Summer: क्या गर्मी से बिगड़ रहे हैं पीरियड्स? डॉक्टर से जानें क्या है इसका सच

Impact Of High Temperature On Hormones In Women: गर्मियों का मौसम सिर्फ पसीना और थकान ही नहीं लाता, बल्कि कई महिलाओं के लिए शरीर की अंदरूनी लय को भी बदल देता है. आमतौर पर मासिक धर्म को एक नियमित और तय चक्र माना जाता है, लेकिन तेज गर्मी के दौरान यह संतुलन बिगड़ सकता है. कभी पीरियड्स जल्दी आ जाते हैं, कभी देर से, तो कभी फ्लो सामान्य से अलग महसूस होता है. यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि शरीर की नेचुरल प्रतिक्रिया है, जो तापमान, पानी की कमी और तनाव के असर से जुड़ी होती है. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. श्रुति कोटांगले, कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट ने TOI को बताया कि गर्मी का असर सिर्फ सांस या यूरिन से जुड़ी समस्याओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पीरियड को भी प्रभावित कर सकता है. शरीर में पानी की कमी और बढ़ता तापमान हार्मोनल बदलाव ला सकता है. दरअसल, जब तापमान बढ़ता है तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करता है. इस प्रक्रिया में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं, जो पीरियड्स को नियंत्रित करते हैं. 

फ्लो में भी बदलाव

गर्मी के दिनों में कई महिलाओं को फ्लो में बदलाव महसूस होता है. किसी महीने ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है, तो कभी बहुत हल्की. इसका कारण शरीर में पानी की कमी और ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव होता है. डिहाइड्रेशन के कारण खून गाढ़ा हो सकता है, जबकि हीट स्ट्रेस गर्भाशय के संकुचन को प्रभावित करता है. डॉ. कोटांगले कहती हैं कि हर महिला में इसका असर अलग होता है, इसलिए फ्लो में बदलाव सामान्य है. 

इसे भी पढ़ें - Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद

पानी की कमी और डिप्रेशन

पानी की कमी और तनाव भी इस पूरी प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाते हैं. गर्मियों में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है, जिससे क्रैम्प्स बढ़ सकती है.ल  इसके साथ ही, गर्मी के कारण कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन भी बढ़ जाता है, जो मूड स्विंग्स, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकता है. यही वजह है कि इस मौसम में कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ज्यादा थकावट और भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस होता है.

नींद का भी असर

गर्मी का असर नींद पर भी पड़ता है. नींद ठीक न हो तो हार्मोनल संतुलन और बिगड़ जाता है. यह एक चक्र की तरह काम करता है कि गर्मी नींद को प्रभावित करती है, नींद हार्मोन को और हार्मोन पीरियड्स को. अत्यधिक गर्मी पीएमएस के लक्षणों को भी बढ़ा सकती है, जैसे सिरदर्द, उल्टी, शरीर दर्द और बेचैनी. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर महिला को ये बदलाव महसूस हों. 

किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

इस दौरान सबसे जरूरी है सही दिनचर्या अपनाना। पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है कि दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर. तरबूज, खीरा जैसे फल और नारियल पानी, छाछ जैसे पारंपरिक पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. हल्का भोजन, कम कैफीन और नियमित नींद भी शरीर को संतुलित रखते हैं. हल्की एक्सरसाइज या योग से भी आराम मिल सकता है.

इसे भी पढ़ें -Pregnancy Care in Summer: बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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