Women Health Issues: भारत में 70% महिलाएं चुपचाप सहती हैं ये तकलीफें, डॉक्टर से जानें कब आपको सावधान होने की जरूरत?

Preventive Tips For Women Reproductive Health: आज हमारी लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है, ऐसे में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं. कई स्वास्थ्य समस्याएं ऐसी हैं जिन्हें महिलाओं से नॉर्मल मानकर सहने की उम्मीद की जाती है. इसमें दर्दभरे पीरियड्स, पीसीओएस, फाइब्रॉइड, एंडोमेट्रियोसिस या बार-बार होने वाले इंफेक्शन लाखों महिलाओं की रोजमर्रा की हकीकत हैं. फिर भी अक्सर कहा जाता है कि ऐसा तो होता है. जबकि लगातार दर्द, इतना अधिक ब्लीडिंग कि रूटीन प्रभावित हो जाए, अचानक वजन बढ़ना, बाल झड़ना या पेल्विक दर्द बिल्कुल भी सामान्य नहीं है. चलिए आपको बताते हैं क्यों. कई बार चुप्पी की वजह परवरिश और झिझक होती है. पीरियड्स या वैजाइनल हेल्थ पर खुलकर बात करने में शर्म महसूस कराई जाती है. कुछ महिलाओं को डर रहता है कि उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाएगा और दुर्भाग्य से कई बार ऐसा होता भी है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में महिला रोग एक्सपर्ट तक पहुंच सीमित है, जबकि शहरों में व्यस्त जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियां अपनी सेहत को पीछे धकेल देती हैं. क्या कहते हैं एक्सपर्ट? अपोलो हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिला सी ने TOI को बताया कि कि महिलाओं का शरीर कई बदलावों से गुजरता है. भारत में अनुमान है कि 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं जीवन में कभी न कभी स्त्री रोग संबंधी समस्या का सामना करती हैं, लेकिन जागरूकता और समय पर जांच की कमी के कारण कई मामले अनदेखे रह जाते हैं. उनके अनुसार, सबसे पहले पीरियड्स को प्राथमिकता दें. नियमित और सहने योग्य पीरियड सामान्य हैं, लेकिन हर घंटे पैड बदलने की जरूरत, बड़े थक्के या सात दिन से ज्यादा ब्लड निकलने के संकेत हो सकते हैं कि जांच जरूरी है. स्वच्छता का ध्यान रखें, पर अत्यधिक केमिकल उत्पादों से बचें क्योंकि वजाइना स्वयं को साफ रखने की क्षमता रखती है. लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना जरूरी पोषण और वजन भी हार्मोन संतुलन से जुड़े हैं. आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर आहार जरूरी है. बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन पीसीओएस और बांझपन जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है. नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं. सक्रिय शारीरिक संबंध रखने वाली महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह अनुसार एचपीवी वैक्सीन पर विचार करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही अहम है, क्योंकि तनाव और नींद की कमी सीधे पीरियड्स को प्रभावित कर सकते हैं. अगर आप लाइफस्टाइल में चेंज करती हैं और हेल्थ की चीजों पर बारीकियों से ध्यान देते हैं, तो आप एक बड़ी बीमारी से बच सकती हैं.  इसे भी पढ़ें- Borderline Blood Sugar: क्या आप भी 110 फास्टिंग शुगर को मान रहे हैं 'नॉर्मल'? एक्सपर्ट ने इसको लेकर दी बड़ी चेतावनी Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Feb 25, 2026 - 14:30
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Women Health Issues: भारत में 70% महिलाएं चुपचाप सहती हैं ये तकलीफें, डॉक्टर से जानें कब आपको सावधान होने की जरूरत?

Preventive Tips For Women Reproductive Health: आज हमारी लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है, ऐसे में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं. कई स्वास्थ्य समस्याएं ऐसी हैं जिन्हें महिलाओं से नॉर्मल मानकर सहने की उम्मीद की जाती है. इसमें दर्दभरे पीरियड्स, पीसीओएस, फाइब्रॉइड, एंडोमेट्रियोसिस या बार-बार होने वाले इंफेक्शन लाखों महिलाओं की रोजमर्रा की हकीकत हैं. फिर भी अक्सर कहा जाता है कि ऐसा तो होता है. जबकि लगातार दर्द, इतना अधिक ब्लीडिंग कि रूटीन प्रभावित हो जाए, अचानक वजन बढ़ना, बाल झड़ना या पेल्विक दर्द बिल्कुल भी सामान्य नहीं है. चलिए आपको बताते हैं क्यों.

कई बार चुप्पी की वजह परवरिश और झिझक होती है. पीरियड्स या वैजाइनल हेल्थ पर खुलकर बात करने में शर्म महसूस कराई जाती है. कुछ महिलाओं को डर रहता है कि उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाएगा और दुर्भाग्य से कई बार ऐसा होता भी है. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में महिला रोग एक्सपर्ट तक पहुंच सीमित है, जबकि शहरों में व्यस्त जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियां अपनी सेहत को पीछे धकेल देती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

अपोलो हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिला सी ने TOI को बताया कि कि महिलाओं का शरीर कई बदलावों से गुजरता है. भारत में अनुमान है कि 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं जीवन में कभी न कभी स्त्री रोग संबंधी समस्या का सामना करती हैं, लेकिन जागरूकता और समय पर जांच की कमी के कारण कई मामले अनदेखे रह जाते हैं.

उनके अनुसार, सबसे पहले पीरियड्स को प्राथमिकता दें. नियमित और सहने योग्य पीरियड सामान्य हैं, लेकिन हर घंटे पैड बदलने की जरूरत, बड़े थक्के या सात दिन से ज्यादा ब्लड निकलने के संकेत हो सकते हैं कि जांच जरूरी है. स्वच्छता का ध्यान रखें, पर अत्यधिक केमिकल उत्पादों से बचें क्योंकि वजाइना स्वयं को साफ रखने की क्षमता रखती है.

लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना जरूरी

पोषण और वजन भी हार्मोन संतुलन से जुड़े हैं. आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर आहार जरूरी है. बहुत कम या बहुत ज्यादा वजन पीसीओएस और बांझपन जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है. नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद हार्मोन संतुलन में मदद करते हैं. सक्रिय शारीरिक संबंध रखने वाली महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह अनुसार एचपीवी वैक्सीन पर विचार करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही अहम है, क्योंकि तनाव और नींद की कमी सीधे पीरियड्स को प्रभावित कर सकते हैं. अगर आप लाइफस्टाइल में चेंज करती हैं और हेल्थ की चीजों पर बारीकियों से ध्यान देते हैं, तो आप एक बड़ी बीमारी से बच सकती हैं. 

इसे भी पढ़ें- Borderline Blood Sugar: क्या आप भी 110 फास्टिंग शुगर को मान रहे हैं 'नॉर्मल'? एक्सपर्ट ने इसको लेकर दी बड़ी चेतावनी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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