WHO approved ORS: कंपनियां अब नहीं बेच पाएंगी फेक 'ORS' ड्रिंक, FSSAI ने दिया सख्त आदेश

FSSAI Order about ORS: बीमार होने पर क्या आप भी ORS के नाम से कोई भी ड्रिंक खरीद लेते हैं तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत अब कोई भी कंपनी अपने प्रॉडक्ट को 'ORS' नाम से नहीं बेच सकेगी, जब तक कि वह असली ORS न हो. यह आदेश 14 अक्टूबर से ही लागू कर दिया गया है.  FSSAI ने क्यों उठाया यह कदम? ORS मतलब Oral Rehydration Salts एक साधारण घोल है जो दस्त, उल्टी, डिहाइड्रेशन या गर्मी से होने वाली पानी की कमी को ठीक करता है. यह खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए रामबाण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इसका फॉर्मूला कई साल पहले तय किया था. इसके लिए एक लीटर साफ पानी में 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाना होता है. इसमें कोई फ्लेवर, रंग या कोई एक्स्ट्रा केमिकल नहीं होता है. यह घोल सोडियम, पोटैशियम और ग्लूकोज का बैलेंस बनाता है, जो पानी को जल्दी अब्सॉर्ब करने में मदद करता है. डॉक्टर कहते हैं कि सही ORS से जान भी बच सकती है, क्योंकि डिहाइड्रेशन से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं. बाजार में क्या हो रहा खेल? कई कंपनियां स्मार्ट बनकर अपने एनर्जी ड्रिंक्स, फ्लेवर्ड पाउडर या रेडी-टू-ड्रिंक बोतलों को ORS का नाम दे रही थीं. इसके तहत पैकेट पर बड़ा-बड़ा 'ORS Drink' या 'ORS Powder' लिख दिया जाता था, लेकिन उसके अंदर ग्लूकोज की जगह कोई सस्ता शुगर, स्वाद के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर्स जैसे ऑरेंज, लेमन या नींबू का टेस्ट, और रंग डाल दिया जाता था. लोग इसे असली ORS समझकर खरीद लेते हैं, लेकिन यह शरीर को फायदा देने की जगह नुकसान पहुंचा सकता है. दरअसल, गलत कंपोजिशन से इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ जाता है. FSSAI ने क्यों लिया एक्शन? FSSAI को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ORS के नाम पर बिक रहे ऐसे प्रॉडक्ट्स से काफी लोग बीमार हो चुके हैं. FSSAI के अधिकारी कहते हैं कि यह धोखाधड़ी है. कंपनियां मार्केटिंग के लिए ORS का नाम इस्तेमाल कर रही थीं, क्योंकि ORS एक मेडिकल टर्म है, जो लोगों को भरोसा दिलाता है. WHO के स्टैंडर्ड्स के मुताबिक, ORS में ग्लूकोज एनहाइड्रस 13.5 ग्राम, सोडियम क्लोराइड 2.6 ग्राम, पोटैशियम क्लोराइड 1.5 ग्राम और सोडियम साइट्रेट 2.9 ग्राम प्रति लीटर होना चाहिए. घर का बनने वाला ORS भी इसी पर बेस्ड होता है, लेकिन मार्केट वाले प्रॉडक्ट्स में यह सब नहीं होता. इस फैसले के बाद ग्राहक अब पैकेट देखकर जान पाएंगे कि वह असली ORS है या नहीं. इसे भी पढ़ें: क्या आप भी रोज लेते हैं शॉवर तो अपने फेफड़ों को बना रहे इंफेक्शन का शिकार? यह बैक्टीरिया बना खतरा Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Oct 16, 2025 - 15:30
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WHO approved ORS: कंपनियां अब नहीं बेच पाएंगी फेक 'ORS' ड्रिंक, FSSAI ने दिया सख्त आदेश

FSSAI Order about ORS: बीमार होने पर क्या आप भी ORS के नाम से कोई भी ड्रिंक खरीद लेते हैं तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत अब कोई भी कंपनी अपने प्रॉडक्ट को 'ORS' नाम से नहीं बेच सकेगी, जब तक कि वह असली ORS न हो. यह आदेश 14 अक्टूबर से ही लागू कर दिया गया है. 

FSSAI ने क्यों उठाया यह कदम?

ORS मतलब Oral Rehydration Salts एक साधारण घोल है जो दस्त, उल्टी, डिहाइड्रेशन या गर्मी से होने वाली पानी की कमी को ठीक करता है. यह खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए रामबाण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने इसका फॉर्मूला कई साल पहले तय किया था. इसके लिए एक लीटर साफ पानी में 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाना होता है. इसमें कोई फ्लेवर, रंग या कोई एक्स्ट्रा केमिकल नहीं होता है. यह घोल सोडियम, पोटैशियम और ग्लूकोज का बैलेंस बनाता है, जो पानी को जल्दी अब्सॉर्ब करने में मदद करता है. डॉक्टर कहते हैं कि सही ORS से जान भी बच सकती है, क्योंकि डिहाइड्रेशन से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं.

बाजार में क्या हो रहा खेल?

कई कंपनियां स्मार्ट बनकर अपने एनर्जी ड्रिंक्स, फ्लेवर्ड पाउडर या रेडी-टू-ड्रिंक बोतलों को ORS का नाम दे रही थीं. इसके तहत पैकेट पर बड़ा-बड़ा 'ORS Drink' या 'ORS Powder' लिख दिया जाता था, लेकिन उसके अंदर ग्लूकोज की जगह कोई सस्ता शुगर, स्वाद के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर्स जैसे ऑरेंज, लेमन या नींबू का टेस्ट, और रंग डाल दिया जाता था. लोग इसे असली ORS समझकर खरीद लेते हैं, लेकिन यह शरीर को फायदा देने की जगह नुकसान पहुंचा सकता है. दरअसल, गलत कंपोजिशन से इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ जाता है.

FSSAI ने क्यों लिया एक्शन?

FSSAI को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ORS के नाम पर बिक रहे ऐसे प्रॉडक्ट्स से काफी लोग बीमार हो चुके हैं. FSSAI के अधिकारी कहते हैं कि यह धोखाधड़ी है. कंपनियां मार्केटिंग के लिए ORS का नाम इस्तेमाल कर रही थीं, क्योंकि ORS एक मेडिकल टर्म है, जो लोगों को भरोसा दिलाता है. WHO के स्टैंडर्ड्स के मुताबिक, ORS में ग्लूकोज एनहाइड्रस 13.5 ग्राम, सोडियम क्लोराइड 2.6 ग्राम, पोटैशियम क्लोराइड 1.5 ग्राम और सोडियम साइट्रेट 2.9 ग्राम प्रति लीटर होना चाहिए. घर का बनने वाला ORS भी इसी पर बेस्ड होता है, लेकिन मार्केट वाले प्रॉडक्ट्स में यह सब नहीं होता. इस फैसले के बाद ग्राहक अब पैकेट देखकर जान पाएंगे कि वह असली ORS है या नहीं.

इसे भी पढ़ें: क्या आप भी रोज लेते हैं शॉवर तो अपने फेफड़ों को बना रहे इंफेक्शन का शिकार? यह बैक्टीरिया बना खतरा

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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