Waist Size And Health: वजन नहीं, कमर का साइज खोलेगा सेहत का राज! मोटापा मापने में BMI से ज्यादा असरदार फॉर्मूला
Why BMI Is Not Enough To Measure Obesity: सालों से मोटापा मापने के लिए बॉडी मास इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता रहा है. डॉक्टर किसी व्यक्ति की लंबाई और वजन के आधार पर यह तय करते हैं कि वह सामान्य वजन, अधिक वजन या मोटापे की कैटेगरी में आता है या नहीं. हालांकि अब स्वास्थ्य एक्सपर्ट का मानना है कि सिर्फ बॉडी मास इंडेक्स के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही आकलन करना पर्याप्त नहीं है. कई ऐसे लोग होते हैं जिनका बॉडी मास इंडेक्स सामान्य होता है, लेकिन पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों के खतरे में डाल सकती है. किस नए नियम को लागू किया गया? इसी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूलों में बच्चों की जांच के दौरान कमर और लंबाई के अनुपात यानी वेस्ट-टू-हाइट रेशियो को भी शामिल करने की सिफारिश की है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका शरीर में खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी का बेहतर अंदाजा देता है, जो भविष्य में होने वाली कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है. बॉडी मास इंडेक्स से कैसे पता चलता है? बॉडी मास इंडेक्स की गणना व्यक्ति के वजन को उसकी लंबाई के वर्ग से भाग देकर की जाती है. यह तरीका आसान और सस्ता होने की वजह से दुनिया भर में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि यह मांसपेशियों और चर्बी के बीच अंतर नहीं बता पाता. उदाहरण के लिए, किसी खिलाड़ी की मांसपेशियां ज्यादा होने के कारण उसका बॉडी मास इंडेक्स अधिक आ सकता है, जबकि उसके शरीर में अतिरिक्त चर्बी नहीं होती. दूसरी ओर, सामान्यबॉडी मास इंडेक्स वाला व्यक्ति भी पेट पर अधिक फैट जमा होने के कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम झेल सकता है. इसे भी पढ़ें: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल? किस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंता एक्सपर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा चिंता पेट के आसपास जमा चर्बी की होती है. यह चर्बी लीवर, पैंक्रियास और आंतों जैसे महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा होकर शरीर में सूजन बढ़ा सकती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है. कैसे निकलता है इसकै रेशियो? वेस्ट-टू-हाइट रेशियो निकालना भी बेहद आसान है. इसके लिए कमर की माप को लंबाई से भाग दिया जाता है और दोनों माप एक ही इकाई, जैसे सेंटीमीटर में होनी चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी वयस्क की कमर उसकी कुल लंबाई के आधे से कम होनी चाहिए. उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति की लंबाई 170 सेंटीमीटर है तो उसकी कमर 85 सेंटीमीटर से कम रहना बेहतर माना जाता है. हालांकि एक्सपर्ट यह भी स्पष्ट करते हैं कि बॉडी मास इंडेक्स को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है. बड़े स्तर पर लोगों की स्क्रीनिंग और मोटापे का आकलन करने में इसकी उपयोगिता आज भी बनी हुई है. लेकिन अगर बॉडी मास इंडेक्स के साथ वेस्ट-टू-हाइट रेशियो को भी शामिल किया जाए तो व्यक्ति के स्वास्थ्य की ज्यादा सटीक तस्वीर सामने आ सकती है. इन चीजों पर ध्यान देना भी जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही आकलन केवल वजन या कमर की माप से नहीं किया जा सकता. इसके साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, खानपान, शारीरिक गतिविधि, पारिवारिक बीमारी का हिस्ट्री और लाइफस्टाइल जैसी बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है. इसे भी पढ़ें: Monsoon Health Care Tips: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Why BMI Is Not Enough To Measure Obesity: सालों से मोटापा मापने के लिए बॉडी मास इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाता रहा है. डॉक्टर किसी व्यक्ति की लंबाई और वजन के आधार पर यह तय करते हैं कि वह सामान्य वजन, अधिक वजन या मोटापे की कैटेगरी में आता है या नहीं. हालांकि अब स्वास्थ्य एक्सपर्ट का मानना है कि सिर्फ बॉडी मास इंडेक्स के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही आकलन करना पर्याप्त नहीं है. कई ऐसे लोग होते हैं जिनका बॉडी मास इंडेक्स सामान्य होता है, लेकिन पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों के खतरे में डाल सकती है.
किस नए नियम को लागू किया गया?
इसी को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूलों में बच्चों की जांच के दौरान कमर और लंबाई के अनुपात यानी वेस्ट-टू-हाइट रेशियो को भी शामिल करने की सिफारिश की है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका शरीर में खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी का बेहतर अंदाजा देता है, जो भविष्य में होने वाली कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है.
बॉडी मास इंडेक्स से कैसे पता चलता है?
बॉडी मास इंडेक्स की गणना व्यक्ति के वजन को उसकी लंबाई के वर्ग से भाग देकर की जाती है. यह तरीका आसान और सस्ता होने की वजह से दुनिया भर में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि यह मांसपेशियों और चर्बी के बीच अंतर नहीं बता पाता. उदाहरण के लिए, किसी खिलाड़ी की मांसपेशियां ज्यादा होने के कारण उसका बॉडी मास इंडेक्स अधिक आ सकता है, जबकि उसके शरीर में अतिरिक्त चर्बी नहीं होती. दूसरी ओर, सामान्यबॉडी मास इंडेक्स वाला व्यक्ति भी पेट पर अधिक फैट जमा होने के कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिम झेल सकता है.
इसे भी पढ़ें: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल?
किस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंता
एक्सपर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा चिंता पेट के आसपास जमा चर्बी की होती है. यह चर्बी लीवर, पैंक्रियास और आंतों जैसे महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा होकर शरीर में सूजन बढ़ा सकती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है.
कैसे निकलता है इसकै रेशियो?
वेस्ट-टू-हाइट रेशियो निकालना भी बेहद आसान है. इसके लिए कमर की माप को लंबाई से भाग दिया जाता है और दोनों माप एक ही इकाई, जैसे सेंटीमीटर में होनी चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी वयस्क की कमर उसकी कुल लंबाई के आधे से कम होनी चाहिए. उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति की लंबाई 170 सेंटीमीटर है तो उसकी कमर 85 सेंटीमीटर से कम रहना बेहतर माना जाता है.
हालांकि एक्सपर्ट यह भी स्पष्ट करते हैं कि बॉडी मास इंडेक्स को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है. बड़े स्तर पर लोगों की स्क्रीनिंग और मोटापे का आकलन करने में इसकी उपयोगिता आज भी बनी हुई है. लेकिन अगर बॉडी मास इंडेक्स के साथ वेस्ट-टू-हाइट रेशियो को भी शामिल किया जाए तो व्यक्ति के स्वास्थ्य की ज्यादा सटीक तस्वीर सामने आ सकती है.
इन चीजों पर ध्यान देना भी जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही आकलन केवल वजन या कमर की माप से नहीं किया जा सकता. इसके साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, खानपान, शारीरिक गतिविधि, पारिवारिक बीमारी का हिस्ट्री और लाइफस्टाइल जैसी बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है.
इसे भी पढ़ें: Monsoon Health Care Tips: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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