Vastu Tips: बारिश से घर में हो रही सीलन, खतरे की घंटी है 4 अशुभ संकेत, धन पर पड़ता है असर

Monsoon Vastu Tips: बारिश का अक्सर छत पर भर जाता है जिससे घर में लगातार नमी और पानी का रिसाव होने लगता है, ये समस्या लोगों के लिए आम है लेकिन वास्तु के अनुसार इसका असर हमारे धन और सेहत पर पड़ता है.घर में सीलन सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित करती है. वास्तु एक्सपर्ट नीतिका शर्मा के अनुसार घर में सीलन आर्थिक,मानसिक और शारीरिक रूप से परिवार के हर सदस्य पर असर डालती है, खासकर किसी विशेष दिशा में लंबे समय तक सीलन बनी रहे, तो उसका असर उस दिशा से जुड़े परेशानियों पर पड़ता है. सीलन से कुंडली में कुछ ग्रह भी दूषित होते हैं. इससे क्या हानि होती है और कैसे बचें जान लें. घर में सीलन से कौन सा ग्रह देता अशुभ फल वास्तु एक्पर्ट के अनुसार सीलन से चंद्रमा, शुक्र, राहु ग्रह कुंडली में दूषित होते हैं. चंद्रमा जल तत्व कारक है,दीवारों पर पानी का रिसाव चंद्रमा को खराब करता है. वहीं नमी के कारण गंदगी जमा होती है, बदबू आती है, राहु अपने पैर पसारने लगता है. जहां गंदगी होती है वहां शुक्र की शुभता नहीं मिलती है. किस दिशा की नमी क्या इशारा करती है उत्तर दिशा में सीलन वास्तु में उत्तर दिशा को धन, व्यापार और नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है. अगर यहां रिसाव है तो कमाई कम हो सकती है. बिजनेस में मनमुताबिक लाभ नहीं मिलता. अच्छी डील हाथ से चले जाने की संभावना रहती है. दक्षिण-पश्चिम दिशा में नमी दक्षिण-पश्चिम दिशा घर की स्थिरता और पारिवारिक संतुलन का प्रतीक मानी जाती है. इस हिस्से में सीलन होने का मतलब वास्तु में वैवाहिक जीवन में क्लेश की होने की ओर इशारा करता है. पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ जाते हैं. पारिवारिक संबंध समस्याएं पैदा होने लगती है. फिजूल खर्च बढ़ सकता है और घर के सदस्यों में आलस्य या थकान महसूस होने लगती है.स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह स्थिति अनुकूल नहीं मानी जाती. पूर्व दिशा में सीलन पूर्व दिशा की दीवारें नम रहती हैं, तो सामाजिक छवि, मान-सम्मान और पारिवारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. खासकर पिता और संतान के बीच मनमुटाव बढ़ जाते हैं. पश्चिम दिशा में सीलन पश्चिम दिशा को उपलब्धियों और परिणामों से जोड़कर देखा जाता है. इस हिस्से में सीलन होने पर मेहनत के बाद भी सफलता में देरी होने की समस्या आने लगती है. कई बार सफलता के शिखर पर पहुंचकर वापिस फिसल जाते हैं. सीलन से मुक्ति के वास्तु उपाय सीलन वाली जगह पर फफूंद या काई न जमने दें. जिस स्थान पर सीलन हो, वहां सफाई करके एक कटोरी में कपूर रखें. मान्यता है कि इससे वातावरण की नकारात्मकता और दुर्गंध कम होती है छत, पाइप या दीवार से हो रहे रिसाव की मरम्मत कराना आवश्यक है. सीलन वाली जगह पर कांच की कटोरी में सेंधा नमक रखने से नमी और नकारात्मक ऊर्जा कम होने की मान्यता है. वैज्ञानिक दृष्टि से भी क्यों जरूरी है सीलन हटाना? सीलन केवल वास्तु का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा मामला है. लगातार नमी रहने पर दीवारों पर फंगस और फफूंद विकसित हो सकती है, जिससे घर की हवा प्रभावित होती है. इससे एलर्जी, अस्थमा, सांस संबंधी परेशानी और त्वचा की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही बदबू और उमस के कारण मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और थकान भी महसूस हो सकती है. (FAQ) FAQ 1. क्या बारिश के मौसम में बढ़ने वाली सीलन से धन हानि के योग बनते हैं? वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लंबे समय तक रहने वाली सीलन और पानी का रिसाव धन के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करने वाला माना जाता है. विशेष रूप से उत्तर और दक्षिण-पश्चिम दिशा में नमी को आर्थिक अस्थिरता से जोड़कर देखा जाता है. FAQ 2. किस दिशा में सीलन होना सबसे ज्यादा अशुभ माना जाता है? वास्तु मान्यताओं के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा में सीलन को सबसे अधिक चिंताजनक माना जाता है. यह दिशा स्थिरता, पारिवारिक सुख और आर्थिक मजबूती का प्रतीक मानी जाती है. इस हिस्से में लगातार नमी रहने पर रिश्तों और वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है. FAQ 3. क्या सीलन की वजह से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है? वास्तु के अनुसार हां. दीवारों में नमी, बदबू और फफूंद सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा पैदा करते हैं. इसलिए घर को साफ, सूखा और हवादार रखने की सलाह दी जाती है. FAQ 4. क्या सीलन का असर परिवार के सभी सदस्यों पर पड़ सकता है? वास्तु मान्यता के अनुसार जिस दिशा में सीलन होती है, उसका प्रभाव उस दिशा से जुड़े जीवन क्षेत्रों और परिवार के सदस्यों पर पड़ सकता है. वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी लगातार नमी एलर्जी, अस्थमा, फंगल संक्रमण और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है. Gajanana Sankashti Chaturthi 2026: सावन की गजानन संकष्टी चतुर्थी कब ? तारीख, मुहूर्त, चंद्रोदय समय देखें Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Jul 31, 2026 - 21:30
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Vastu Tips: बारिश से घर में हो रही सीलन, खतरे की घंटी है 4 अशुभ संकेत, धन पर पड़ता है असर

Monsoon Vastu Tips: बारिश का अक्सर छत पर भर जाता है जिससे घर में लगातार नमी और पानी का रिसाव होने लगता है, ये समस्या लोगों के लिए आम है लेकिन वास्तु के अनुसार इसका असर हमारे धन और सेहत पर पड़ता है.घर में सीलन सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित करती है.

वास्तु एक्सपर्ट नीतिका शर्मा के अनुसार घर में सीलन आर्थिक,मानसिक और शारीरिक रूप से परिवार के हर सदस्य पर असर डालती है, खासकर किसी विशेष दिशा में लंबे समय तक सीलन बनी रहे, तो उसका असर उस दिशा से जुड़े परेशानियों पर पड़ता है. सीलन से कुंडली में कुछ ग्रह भी दूषित होते हैं. इससे क्या हानि होती है और कैसे बचें जान लें.

घर में सीलन से कौन सा ग्रह देता अशुभ फल

वास्तु एक्पर्ट के अनुसार सीलन से चंद्रमा, शुक्र, राहु ग्रह कुंडली में दूषित होते हैं. चंद्रमा जल तत्व कारक है,दीवारों पर पानी का रिसाव चंद्रमा को खराब करता है. वहीं नमी के कारण गंदगी जमा होती है, बदबू आती है, राहु अपने पैर पसारने लगता है. जहां गंदगी होती है वहां शुक्र की शुभता नहीं मिलती है.

किस दिशा की नमी क्या इशारा करती है

उत्तर दिशा में सीलन

वास्तु में उत्तर दिशा को धन, व्यापार और नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है. अगर यहां रिसाव है तो कमाई कम हो सकती है. बिजनेस में मनमुताबिक लाभ नहीं मिलता. अच्छी डील हाथ से चले जाने की संभावना रहती है.

दक्षिण-पश्चिम दिशा में नमी

दक्षिण-पश्चिम दिशा घर की स्थिरता और पारिवारिक संतुलन का प्रतीक मानी जाती है. इस हिस्से में सीलन होने का मतलब वास्तु में वैवाहिक जीवन में क्लेश की होने की ओर इशारा करता है. पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ जाते हैं. पारिवारिक संबंध समस्याएं पैदा होने लगती है. फिजूल खर्च बढ़ सकता है और घर के सदस्यों में आलस्य या थकान महसूस होने लगती है.स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह स्थिति अनुकूल नहीं मानी जाती.

पूर्व दिशा में सीलन

पूर्व दिशा की दीवारें नम रहती हैं, तो सामाजिक छवि, मान-सम्मान और पारिवारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. खासकर पिता और संतान के बीच मनमुटाव बढ़ जाते हैं.

पश्चिम दिशा में सीलन

पश्चिम दिशा को उपलब्धियों और परिणामों से जोड़कर देखा जाता है. इस हिस्से में सीलन होने पर मेहनत के बाद भी सफलता में देरी होने की समस्या आने लगती है. कई बार सफलता के शिखर पर पहुंचकर वापिस फिसल जाते हैं.

सीलन से मुक्ति के वास्तु उपाय

  • सीलन वाली जगह पर फफूंद या काई न जमने दें.
  • जिस स्थान पर सीलन हो, वहां सफाई करके एक कटोरी में कपूर रखें. मान्यता है कि इससे वातावरण की नकारात्मकता और दुर्गंध कम होती है
  • छत, पाइप या दीवार से हो रहे रिसाव की मरम्मत कराना आवश्यक है.
  • सीलन वाली जगह पर कांच की कटोरी में सेंधा नमक रखने से नमी और नकारात्मक ऊर्जा कम होने की मान्यता है.

वैज्ञानिक दृष्टि से भी क्यों जरूरी है सीलन हटाना?

सीलन केवल वास्तु का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा मामला है. लगातार नमी रहने पर दीवारों पर फंगस और फफूंद विकसित हो सकती है, जिससे घर की हवा प्रभावित होती है. इससे एलर्जी, अस्थमा, सांस संबंधी परेशानी और त्वचा की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही बदबू और उमस के कारण मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और थकान भी महसूस हो सकती है.

(FAQ)

FAQ 1. क्या बारिश के मौसम में बढ़ने वाली सीलन से धन हानि के योग बनते हैं?

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लंबे समय तक रहने वाली सीलन और पानी का रिसाव धन के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करने वाला माना जाता है. विशेष रूप से उत्तर और दक्षिण-पश्चिम दिशा में नमी को आर्थिक अस्थिरता से जोड़कर देखा जाता है.

FAQ 2. किस दिशा में सीलन होना सबसे ज्यादा अशुभ माना जाता है?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा में सीलन को सबसे अधिक चिंताजनक माना जाता है. यह दिशा स्थिरता, पारिवारिक सुख और आर्थिक मजबूती का प्रतीक मानी जाती है. इस हिस्से में लगातार नमी रहने पर रिश्तों और वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है.

FAQ 3. क्या सीलन की वजह से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है?

वास्तु के अनुसार हां. दीवारों में नमी, बदबू और फफूंद सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा पैदा करते हैं. इसलिए घर को साफ, सूखा और हवादार रखने की सलाह दी जाती है.

FAQ 4. क्या सीलन का असर परिवार के सभी सदस्यों पर पड़ सकता है?

वास्तु मान्यता के अनुसार जिस दिशा में सीलन होती है, उसका प्रभाव उस दिशा से जुड़े जीवन क्षेत्रों और परिवार के सदस्यों पर पड़ सकता है. वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी लगातार नमी एलर्जी, अस्थमा, फंगल संक्रमण और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है.

Gajanana Sankashti Chaturthi 2026: सावन की गजानन संकष्टी चतुर्थी कब ? तारीख, मुहूर्त, चंद्रोदय समय देखें

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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