UP DGP Salary: यूपी पुलिस के DGP को कितनी सैलरी मिलती है, इस पद तक कैसे पहुंचते हैं IPS?
UP DGP Salary: राज्यों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर के पुलिस बल तैनात रहते हैं. लेकिन राज्य की सुरक्षा की कमान जिस अधिकारी के हाथ में होती है, वही राज्य का सबसे वरिष्ठ पुलिस अफसर माना जाता है. कानून व्यवस्था से लेकर अपराध नियंत्रण और पूरे पुलिस बल के संचालन तक की जिम्मेदारी पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी के पास होती है. ऐसे में कई लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठते हैं कि इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें कौन सी सरकारी सुविधाएं मिलती है. खासकर जब बात उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की होती है तो यह सवाल और बढ़ जाता है. आपको बता दें कि फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण के हाथों में है. वह डीजीपी के रूप में पुलिस प्रशासन का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि यूपी पुलिस के डीजीपी को कितनी सैलरी मिलती है और इस पद तक आईपीएस कैसे पहुंचते हैं. पुलिस विभाग का सबसे बड़ा पद होता है डीजीपी डीजीपी यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस किसी भी राज्य की पुलिस व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकारी होता है. हिंदी में इसे पुलिस महानिदेशक कहा जाता है. कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध नियंत्रण, पुलिस बल का संचालन और सरकार को सुरक्षा संबंधी सलाह देना डीजीपी की प्रमुख जिम्मेदारी में शामिल होता है. भारतीय पुलिस सेवा में यह सबसे ऊंचे पदों में गिना जाता है. इसी वजह से डीजीपी का वेतन भी केंद्र और राज्य सरकार के सर्वोच्च वेतनमानों के अनुसार तय किया जाता है. वर्तमान में कितनी मिलती है सैलरी? वर्तमान में डीजीपी को सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन दिया जाता है. यह पद एपेक्स स्केल के अंतर्गत आता है, जो सरकारी सेवा के सबसे उच्च वेतनमानों में शामिल है. डीजीपी का मूल वेतन लगभग 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह होता है. इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती है. वर्तमान में महंगाई भत्ते को जोड़ने के बाद मूल वेतन में 1 लाख रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त राशि जुड़ जाती है. वहीं अगर अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो मकान किराया भत्ता भी दिया जाता है. अलग-अलग भत्तों और सुविधाओं को मिलाकर डीजीपी की कुल महीने की आय लगभग 3 लाख से 4 लाख तक पहुंच जाती है. ये भी पढ़ें-CBSE 12वीं में रांची की बेटी का कमाल, री-इवैल्यूएशन के बाद हासिल किए 500 में 500 नंबर डीजीपी बनने का रास्ता क्या है? डीजीपी बनने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार को संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होना पड़ता है. आईपीएस अधिकारी बनने के बाद अधिकारी का करियर कई चरणों से होकर गुजरता है. आमतौर पर अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक स्तर से शुरुआत करता है. फिर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक, महानिरीक्षक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और लास्ट में डीजीपी के पद तक पहुंचता है. यह पद लंबे एक्सपीरियंस, अच्छे सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता के आधार पर मिलता है, इसलिए डीजीपी बनने में कई दशक की सेवा लगती है. ये भी पढ़ें-DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी शुरू, CUET स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला
UP DGP Salary: राज्यों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर के पुलिस बल तैनात रहते हैं. लेकिन राज्य की सुरक्षा की कमान जिस अधिकारी के हाथ में होती है, वही राज्य का सबसे वरिष्ठ पुलिस अफसर माना जाता है. कानून व्यवस्था से लेकर अपराध नियंत्रण और पूरे पुलिस बल के संचालन तक की जिम्मेदारी पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी के पास होती है. ऐसे में कई लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठते हैं कि इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी को कितनी सैलरी मिलती है और उन्हें कौन सी सरकारी सुविधाएं मिलती है.
खासकर जब बात उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की होती है तो यह सवाल और बढ़ जाता है. आपको बता दें कि फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण के हाथों में है. वह डीजीपी के रूप में पुलिस प्रशासन का नेतृत्व कर रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि यूपी पुलिस के डीजीपी को कितनी सैलरी मिलती है और इस पद तक आईपीएस कैसे पहुंचते हैं.
पुलिस विभाग का सबसे बड़ा पद होता है डीजीपी
डीजीपी यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस किसी भी राज्य की पुलिस व्यवस्था का सर्वोच्च अधिकारी होता है. हिंदी में इसे पुलिस महानिदेशक कहा जाता है. कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध नियंत्रण, पुलिस बल का संचालन और सरकार को सुरक्षा संबंधी सलाह देना डीजीपी की प्रमुख जिम्मेदारी में शामिल होता है. भारतीय पुलिस सेवा में यह सबसे ऊंचे पदों में गिना जाता है. इसी वजह से डीजीपी का वेतन भी केंद्र और राज्य सरकार के सर्वोच्च वेतनमानों के अनुसार तय किया जाता है.
वर्तमान में कितनी मिलती है सैलरी?
वर्तमान में डीजीपी को सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन दिया जाता है. यह पद एपेक्स स्केल के अंतर्गत आता है, जो सरकारी सेवा के सबसे उच्च वेतनमानों में शामिल है. डीजीपी का मूल वेतन लगभग 2.25 लाख रुपये प्रतिमाह होता है. इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता और दूसरी सरकारी सुविधाएं भी मिलती है. वर्तमान में महंगाई भत्ते को जोड़ने के बाद मूल वेतन में 1 लाख रुपये से ज्यादा की अतिरिक्त राशि जुड़ जाती है. वहीं अगर अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो मकान किराया भत्ता भी दिया जाता है. अलग-अलग भत्तों और सुविधाओं को मिलाकर डीजीपी की कुल महीने की आय लगभग 3 लाख से 4 लाख तक पहुंच जाती है.
ये भी पढ़ें-CBSE 12वीं में रांची की बेटी का कमाल, री-इवैल्यूएशन के बाद हासिल किए 500 में 500 नंबर
डीजीपी बनने का रास्ता क्या है?
डीजीपी बनने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार को संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होना पड़ता है. आईपीएस अधिकारी बनने के बाद अधिकारी का करियर कई चरणों से होकर गुजरता है. आमतौर पर अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक स्तर से शुरुआत करता है. फिर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक, महानिरीक्षक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और लास्ट में डीजीपी के पद तक पहुंचता है. यह पद लंबे एक्सपीरियंस, अच्छे सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठता के आधार पर मिलता है, इसलिए डीजीपी बनने में कई दशक की सेवा लगती है.
ये भी पढ़ें-DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी शुरू, CUET स्कोर के आधार पर मिलेगा दाखिला
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