Transmission diseases: टीबी से लेकर डेंगू तक, हर साल लाखों जान ले रही हैं ट्रांसमिशन बीमारियां, पढ़ें चौंका देने वाली रिपोर्ट

Diseases come under transmission diseases: दुनियाभर में ट्रांसमिशन बीमारियों का खतरा काफी तेजी से बढ़ा है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट्स में इसको लेकर चेतावनी जारी की गई है. टीबी, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से हर साल हजारों, लाखों की संख्या में लोग जान गंवा रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर हालात पर काबू नहीं पाया गया तो आने वाले सालों में इसका असर गंभीर हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन-किन ट्रांसमिशन बीमारियों का खतरा काफी तेजी के साथ बढ़ा है. किन ट्रांसमिशन बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा WHO की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में टीबी एक बार फिर सबसे जानलेवा संक्रामक रोग बन गया. संगठन का अनुमान है कि दुनिया भर में करीब 1.25 मिलियन लोगों की मौत टीबी से हुई. वहीं, 10.8 मिलियन नए मामले सामने आए. कम और मध्यम आय वाले देशों में इसका बोझ सबसे ज्यादा है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं. डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ साल 2023 में दुनिया भर में करीब 1.25 मिलियन लोगों की मौत टीबी से हुई. कम और मिडिल इनकम वाले देशों में इसका खतरा सबसे ज्यादा देखा गया, जहां लोगों को स्वास्थ की जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं. WHO की मई 2024 की रिपोर्ट बताती है कि सिफिलिस से 2022 में करीब 2.3 लाख लोगों की मौत हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गोनोरिया अब ऐसे रूप में सामने आ रहा है जिस पर दवाइयां असर नहीं कर रही हैं, इसलिए इसका इलाज और कठिन हो गया है. इसके साथ ही, नए HIV और हेपेटाइटिस संक्रमण भी उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हो रहे. इन बीमारियों का भी बढ़ा प्रकोप दूसरी तरफ, डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छर से फैलने वाले रोग भी मौतों का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं. WHO के मुताबिक, vector-borne diseases दुनिया के कुल इंफेर रोगों में 17 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं और हर साल लगभग 7 लाख मौतों का कारण बनते हैं. जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ती शहरी आबादी इन बीमारियों के लिए फैलने का अच्छे माहौल बना रही है. मौतें क्यों बढ़ रही हैं? एक्सपर्ट मानते हैं कि मौतों की संख्या बढ़ने के कई बड़े कारण हैं - स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच. एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का उभरना. शहरीकरण और ग्लोबलाइजेशन से संक्रमण का तेजी से फैलना. बीमारी की सही निगरानी व रिपोर्टिंग का अभाव. एक्सपर्ट बताते हैं कि इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए हमें अपने आप को तैयार रखना होता है, जैसे कि लाइफस्टाइल को मेंटेंन करके चलना होता है और एक्सारसाइज और डाइज पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. क्योंकि आजकल की बदलती लाइफस्टाइल के चलते हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है. इसे भी पढ़ें- High Protein Diet Risks: कितना प्रोटीन इनटेक हो जाता है बॉडी में हद से ज्यादा प्रोटीन, इससे सेहत को कितनी हो सकती है दिक्कत? Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Oct 30, 2025 - 15:30
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Transmission diseases: टीबी से लेकर डेंगू तक, हर साल लाखों जान ले रही हैं ट्रांसमिशन बीमारियां, पढ़ें चौंका देने वाली रिपोर्ट

Diseases come under transmission diseases: दुनियाभर में ट्रांसमिशन बीमारियों का खतरा काफी तेजी से बढ़ा है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट्स में इसको लेकर चेतावनी जारी की गई है. टीबी, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से हर साल हजारों, लाखों की संख्या में लोग जान गंवा रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर हालात पर काबू नहीं पाया गया तो आने वाले सालों में इसका असर गंभीर हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि किन-किन ट्रांसमिशन बीमारियों का खतरा काफी तेजी के साथ बढ़ा है.

किन ट्रांसमिशन बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में टीबी एक बार फिर सबसे जानलेवा संक्रामक रोग बन गया. संगठन का अनुमान है कि दुनिया भर में करीब 1.25 मिलियन लोगों की मौत टीबी से हुई. वहीं, 10.8 मिलियन नए मामले सामने आए. कम और मध्यम आय वाले देशों में इसका बोझ सबसे ज्यादा है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं. डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ साल 2023 में दुनिया भर में करीब 1.25 मिलियन लोगों की मौत टीबी से हुई. कम और मिडिल इनकम वाले देशों में इसका खतरा सबसे ज्यादा देखा गया, जहां लोगों को स्वास्थ की जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं. WHO की मई 2024 की रिपोर्ट बताती है कि सिफिलिस से 2022 में करीब 2.3 लाख लोगों की मौत हुई. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गोनोरिया अब ऐसे रूप में सामने आ रहा है जिस पर दवाइयां असर नहीं कर रही हैं, इसलिए इसका इलाज और कठिन हो गया है. इसके साथ ही, नए HIV और हेपेटाइटिस संक्रमण भी उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हो रहे.

इन बीमारियों का भी बढ़ा प्रकोप

दूसरी तरफ, डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छर से फैलने वाले रोग भी मौतों का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं. WHO के मुताबिक, vector-borne diseases दुनिया के कुल इंफेर रोगों में 17 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं और हर साल लगभग 7 लाख मौतों का कारण बनते हैं. जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ती शहरी आबादी इन बीमारियों के लिए फैलने का अच्छे माहौल बना रही है.

मौतें क्यों बढ़ रही हैं?

एक्सपर्ट मानते हैं कि मौतों की संख्या बढ़ने के कई बड़े कारण हैं -

  • स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच.
  • एंटीबायोटिक और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का उभरना.
  • शहरीकरण और ग्लोबलाइजेशन से संक्रमण का तेजी से फैलना.
  • बीमारी की सही निगरानी व रिपोर्टिंग का अभाव.

एक्सपर्ट बताते हैं कि इस तरह की बीमारियों से बचने के लिए हमें अपने आप को तैयार रखना होता है, जैसे कि लाइफस्टाइल को मेंटेंन करके चलना होता है और एक्सारसाइज और डाइज पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. क्योंकि आजकल की बदलती लाइफस्टाइल के चलते हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है.

इसे भी पढ़ें- High Protein Diet Risks: कितना प्रोटीन इनटेक हो जाता है बॉडी में हद से ज्यादा प्रोटीन, इससे सेहत को कितनी हो सकती है दिक्कत?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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