Thaaipusam 2026: कब है थाईपुसम? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और भगवान मुरुगन की कृपा पाने उपाय?
Thaipusam Date and Time 2026: भगवान मुरुगन के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र दिन थाईपुसम 2026 इस साल 1 फरवरी, रविवार के दिन मनाया जाएगा. थाई पूसम, थाईपूयम या थाईप्पूयम के नाम से जाने वाला यह पवित्र पर्व खासतौर से भारत और विदेशों में रहने वाले तमिल समुदाय के लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है. थाईपुसम का पर्व तमिल सौर महीने थाई में मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांगों में मकर महीनों के बराबर होता है. यह पर्व उस शक्तिशाली पल का प्रतीक है, जब देवी पार्वती ने भगवान मुरुगन को दिव्य वेल (भाला) आशीर्वाद स्वरूप प्रदान किया, जिससे वे राक्षस सोरापदम का अंत करने के साथ ब्रह्मांड में संतुलन ला सकें. Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती की तो सालभर रहेगी परेशानी! पूजा से पहले जरूर जान लें नियम? त्योहार तिथि और समय थाईपुसम रविवार, 1 फरवरी, 2026 पूसम नक्षत्र का प्रारंभ 1 फरवरी 2026 को सुबह 01.34 मिनट पर पूसम नक्षत्र का समाप्त 1 फरवरी 2026 को रात 11.58 बजे पूसम नक्षत्रम पूरे दिन बना रहता है, इस वजह से थाईपुसम पूजा, व्रत और अनुष्ठानों के लिए पूरा दिन शुभ रहने वाला है. थाईपुसम पर्व क्या है? थाईपुसम पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र भगवान मुरुगन को समर्पित है, जो साह, ज्ञान और दैवीय शक्ति के प्रतीक हैं. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय और जीवन से अज्ञान, अंहकार और नकारात्मक शक्तियों के अंत का प्रतीक है. हिंदू वैदिक परंपराओं में वेल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक हैं, जो अंधकार और भ्रम की स्थिति को भेदने का काम करता है. थाईपुसम 2026 का महत्व थाईपुसम कई वजहों से विशेष महत्व रखता है, यह पर्व उस समय मनाया जाता है जब पूर्णिमा थाई महीने में पूसम नक्षत्र के साथ आती है. यह दुर्लभ खगोलीय संयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा कोो बढ़ाने का काम करता है. थाईपुसम अनुष्ठान और रीति-रिवाज थाईपुसम पर्व के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान मुरुगन की पूजा के लिए मंदिर जाते हैं. दूध, शहद, चंदन और पवित्र जल का प्रयोग कर विशेष अभिषेक किया जाता है. इस दौरान कई भक्त व्रत रखते हैं और सात्विक जीवनशैली को अपनाते हैं, जिसमें वे केवल शाकाहारी भोजन या फल ही ग्रहण करते हैं. मुरुगन भगवान के मंत्रों का जाप करने के साथ शोभायात्राओं में भागा लिया जाता है. कई इलाकों में खासतौर पर तमिलनाडु, मलेशिया और सिंगापुर में भक्त कावड़ी लाने जैसे धार्मिक अनुष्ठान का पालन करते हैं, जो विनम्रता और समर्पण का प्रतीक हैं. ये अनुष्ठान गहरी आस्था और अनुशासन को दर्शाती है. थाईपुसम का उत्सव तमिलनाडु में भव्य रूप में मनाया जाता है. 2026 में रविवार को यह पर्व पड़ रहा है और पूसम नक्षत्र पूरे दिन बना रहेगा, इसलिए भक्तों के पास बिना किसी दिक्कत के अनुष्ठान व्रत और मंदिर दर्शन पर्याप्त समय मिलेगा. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Thaipusam Date and Time 2026: भगवान मुरुगन के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र दिन थाईपुसम 2026 इस साल 1 फरवरी, रविवार के दिन मनाया जाएगा. थाई पूसम, थाईपूयम या थाईप्पूयम के नाम से जाने वाला यह पवित्र पर्व खासतौर से भारत और विदेशों में रहने वाले तमिल समुदाय के लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है.
थाईपुसम का पर्व तमिल सौर महीने थाई में मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांगों में मकर महीनों के बराबर होता है. यह पर्व उस शक्तिशाली पल का प्रतीक है, जब देवी पार्वती ने भगवान मुरुगन को दिव्य वेल (भाला) आशीर्वाद स्वरूप प्रदान किया, जिससे वे राक्षस सोरापदम का अंत करने के साथ ब्रह्मांड में संतुलन ला सकें.
त्योहार तिथि और समय
| थाईपुसम | रविवार, 1 फरवरी, 2026 |
| पूसम नक्षत्र का प्रारंभ | 1 फरवरी 2026 को सुबह 01.34 मिनट पर |
| पूसम नक्षत्र का समाप्त | 1 फरवरी 2026 को रात 11.58 बजे |
पूसम नक्षत्रम पूरे दिन बना रहता है, इस वजह से थाईपुसम पूजा, व्रत और अनुष्ठानों के लिए पूरा दिन शुभ रहने वाला है.
थाईपुसम पर्व क्या है?
थाईपुसम पर्व भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र भगवान मुरुगन को समर्पित है, जो साह, ज्ञान और दैवीय शक्ति के प्रतीक हैं. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय और जीवन से अज्ञान, अंहकार और नकारात्मक शक्तियों के अंत का प्रतीक है.
हिंदू वैदिक परंपराओं में वेल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक हैं, जो अंधकार और भ्रम की स्थिति को भेदने का काम करता है.
थाईपुसम 2026 का महत्व
थाईपुसम कई वजहों से विशेष महत्व रखता है, यह पर्व उस समय मनाया जाता है जब पूर्णिमा थाई महीने में पूसम नक्षत्र के साथ आती है. यह दुर्लभ खगोलीय संयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा कोो बढ़ाने का काम करता है.
थाईपुसम अनुष्ठान और रीति-रिवाज
थाईपुसम पर्व के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान मुरुगन की पूजा के लिए मंदिर जाते हैं. दूध, शहद, चंदन और पवित्र जल का प्रयोग कर विशेष अभिषेक किया जाता है.
इस दौरान कई भक्त व्रत रखते हैं और सात्विक जीवनशैली को अपनाते हैं, जिसमें वे केवल शाकाहारी भोजन या फल ही ग्रहण करते हैं. मुरुगन भगवान के मंत्रों का जाप करने के साथ शोभायात्राओं में भागा लिया जाता है.
कई इलाकों में खासतौर पर तमिलनाडु, मलेशिया और सिंगापुर में भक्त कावड़ी लाने जैसे धार्मिक अनुष्ठान का पालन करते हैं, जो विनम्रता और समर्पण का प्रतीक हैं. ये अनुष्ठान गहरी आस्था और अनुशासन को दर्शाती है.
थाईपुसम का उत्सव तमिलनाडु में भव्य रूप में मनाया जाता है. 2026 में रविवार को यह पर्व पड़ रहा है और पूसम नक्षत्र पूरे दिन बना रहेगा, इसलिए भक्तों के पास बिना किसी दिक्कत के अनुष्ठान व्रत और मंदिर दर्शन पर्याप्त समय मिलेगा.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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