Telangana Foreign Couple: गोद लिए बेटे की असली मां की तलाश में भारत पहुंचा डेनमार्क का कपल, बोले- 'बच्चा हमारे पास ही रहेगा, सिर्फ...'
तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में एक विदेशी दंपत्ति अपने गोद लिए बेटे की असली मां को खोजने के लिए गांव-गांव घूम रहा है. डेनमार्क के लुईस और रासमस ने अपने बेटे अर्जुन उर्फ दानिश को जन्म देने वाली मां की तलाश में भारत का सफर किया है. इनका मकसद बच्चे को उसके जन्म देने वाले माता-पिता से मिलवाकर उसके दिल का दर्द कम करना है. साल 2016 में जन्म के समय अर्जुन की दोनों हाथों की उंगलियां आधी कटी हुई थीं. शायद गरीबी या परेशानी की वजह से उसके माता-पिता ने उसे आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल में छोड़ दिया था. उसके बाद बच्चा एक अनाथालय चला गया, जहां से ऑनलाइन आवेदन करके डेनमार्क के इस दंपत्ति ने उसे दो साल की उम्र में गोद लिया. अब अर्जुन 9 साल का हो गया है और वह अपने असली मां-बाप को देखने की जिद कर रहा है. गांववालों ने किया स्वागत लुईस और रासमस ने अपने बेटे की इच्छा पूरी करने के लिए इंद्रावल्ली और नारनूर मंडल के कई आदिवासी गांवों में जाकर लोगों से बात की. गांव वालों ने भी इनका ढोल-नगाड़ों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया. मुंबई हाईकोर्ट की वकील अंजलि पवार की मदद से ये लोग इस काम में जुटे हैं. अंजली ने बताया कि दंपत्ति बच्चे को वापस नहीं करना चाहता, बस साल में एक बार उसे उसकी मां से मिलवाना चाहता है, ताकि बच्चा बिना अपनी जड़ों को जाने. विदेशी दंपत्ति ने किया ईनाम का ऐलान विदेशी दंपत्ति ने साफ कहा है कि अगर अर्जुन की मां मिल जाती है तो वे उसे पैसों की मदद भी करेंगे और हमेशा संपर्क में रहेंगे. ये सप्ताह भर आदिलाबाद में रुकेंगे. अगर किसी के पास इस बच्चे के माता-पिता की जानकारी है, तो वह +629822206485 या +918329403661 पर संपर्क कर सकता है. यह मामला साबित करता है कि प्यार और रिश्तों को देश की सीमाएं नहीं रोक सकतीं. ये भी पढ़ें: Union Budget Session: राहुल गांधी ने लोकसभा में ऐसा क्या कहा कि मच गया बवाल, राजनाथ सिंह और अमित शाह ने खड़े होकर किया चैलेंज
तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में एक विदेशी दंपत्ति अपने गोद लिए बेटे की असली मां को खोजने के लिए गांव-गांव घूम रहा है. डेनमार्क के लुईस और रासमस ने अपने बेटे अर्जुन उर्फ दानिश को जन्म देने वाली मां की तलाश में भारत का सफर किया है. इनका मकसद बच्चे को उसके जन्म देने वाले माता-पिता से मिलवाकर उसके दिल का दर्द कम करना है.
साल 2016 में जन्म के समय अर्जुन की दोनों हाथों की उंगलियां आधी कटी हुई थीं. शायद गरीबी या परेशानी की वजह से उसके माता-पिता ने उसे आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल में छोड़ दिया था. उसके बाद बच्चा एक अनाथालय चला गया, जहां से ऑनलाइन आवेदन करके डेनमार्क के इस दंपत्ति ने उसे दो साल की उम्र में गोद लिया. अब अर्जुन 9 साल का हो गया है और वह अपने असली मां-बाप को देखने की जिद कर रहा है.
गांववालों ने किया स्वागत
लुईस और रासमस ने अपने बेटे की इच्छा पूरी करने के लिए इंद्रावल्ली और नारनूर मंडल के कई आदिवासी गांवों में जाकर लोगों से बात की. गांव वालों ने भी इनका ढोल-नगाड़ों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया. मुंबई हाईकोर्ट की वकील अंजलि पवार की मदद से ये लोग इस काम में जुटे हैं. अंजली ने बताया कि दंपत्ति बच्चे को वापस नहीं करना चाहता, बस साल में एक बार उसे उसकी मां से मिलवाना चाहता है, ताकि बच्चा बिना अपनी जड़ों को जाने.
विदेशी दंपत्ति ने किया ईनाम का ऐलान
विदेशी दंपत्ति ने साफ कहा है कि अगर अर्जुन की मां मिल जाती है तो वे उसे पैसों की मदद भी करेंगे और हमेशा संपर्क में रहेंगे. ये सप्ताह भर आदिलाबाद में रुकेंगे. अगर किसी के पास इस बच्चे के माता-पिता की जानकारी है, तो वह +629822206485 या +918329403661 पर संपर्क कर सकता है. यह मामला साबित करता है कि प्यार और रिश्तों को देश की सीमाएं नहीं रोक सकतीं.
What's Your Reaction?