Surya Gochar 2026: 17 सितंबर को सूर्य करेंगे कन्या राशि में गोचर, जानें किन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत और किसे रहना होगा सतर्क
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, ग्रहों के राजा सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर मित्र ग्रह की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे. इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर दिखेगा. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का विशेष स्थान है. सूर्य देव को सभी ग्रहों का राजा कहा जाता है. वे हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं. इस गोचर का सभी राशियों पर प्रभाव पड़ता है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य देव 17 सितंबर को कन्या राशि में गोचर करेंगे. सूर्य देव 17 सितंबर को सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर करेंगे. इस राशि में सूर्य देव 17 अक्टूबर तक रहेंगे. खास बात ये है कि ये सूर्य देव के मित्र ग्रह की राशि है. व्यक्ति की कुंडली में सूर्य अच्छे स्वास्थ्य, प्रसिद्धि, नाम, सरकारी नौकरी, सफलता, उच्च पद के कारक होते हैं. ये हर राशि में लगभग एक महीने तक विराजमान रहते हैं. ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन का विशेष महत्व होता है. जब भी कोई ग्रह किसी एक राशि में मौजूद होता है फिर किसी निश्चित समय में दूसरी राशि में परिवर्तन करता है तो इसका प्रभाव सभी जातकों पर शुभ और अशुभ दोनों तरह का होता है. ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से सूर्य हर एक महीने में राशि परिवर्तन करते हैं. कुंडली में सूर्य के शुभ भाव में होने पर व्यक्ति को नौकरी, मान-सम्मान और धन लाभ होता है. ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष में सूर्य को तेज, मान-सम्मान और यश, उच्च पद-प्रतिष्ठा आदि का कारक ग्रह माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जिसका प्रभाव सभी राशि के जातकों पर पड़ता है. सिंह राशि के स्वामी सूर्य तुला राशि में नीच राशिगत तथा मेष राशि में उच्च राशिगत संज्ञक माने गए हैं. उच्च भाव में ग्रह अधिक मजबूत और बलशाली होते हैं, जबकि नीच राशि में ये कमजोर हो जाते हैं. सूर्य का शुभ-अशुभ प्रभाव भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य के शुभ प्रभाव से जॉब और बिजनेस में तरक्की के योग बनते हैं और लीडरशिप करने का मौका भी मिलता है. ज्योतिष में सूर्य को आत्माकारक ग्रह कहा गया है. इसके प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है. पिता, अधिकारी और शासकीय मामलों में सफलता भी सूर्य के शुभ प्रभाव से मिलती है. वहीं सूर्य का अशुभ प्रभाव असफलता देता है, जिसके कारण कामकाज में रुकावटें और परेशानियां बढ़ती हैं. धन हानि और स्थान परिवर्तन भी सूर्य के कारण होता है. सूर्य के अशुभ प्रभाव से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी होती हैं. 4 राशियों के लिए शुभ भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वृष, कन्या, वृश्चिक और मकर राशि वाले लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा: इन राशि वाले लोगों को जॉब और बिजनेस में तरक्की मिल सकती है. प्रॉपर्टी और आर्थिक मामलों में फायदा मिल सकता है. सेहत के लिए समय अच्छा रहेगा और किस्मत का साथ मिल सकता है. पारिवारिक मामलों के लिए भी समय शुभ कहा जा सकता है. इन 4 राशि वालों पर मौजूदा अशुभ ग्रह स्थिति का प्रभाव नहीं पड़ेगा. 4 राशियों के लिए मिला-जुला समय भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि मेष, मिथुन, सिंह और धनु राशि वाले लोगों के लिए मिला-जुला समय रहेगा: इन राशि वाले लोगों को धन लाभ तो होगा, लेकिन खर्चा भी बढ़ जाएगा. कुछ मामलों में सितारों का साथ मिलेगा, वहीं कामकाज में रुकावटें, तनाव और विवाद होने की भी आशंका है. सेहत संबंधी परेशानी भी हो सकती है. 4 राशियों को रहना होगा संभलकर भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि कर्क, तुला, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं: इन 4 राशि वाले लोगों को विशेष रूप से संभलकर रहना होगा. कामकाज में रुकावटें आ सकती हैं और विवाद होने की आशंका है. धन हानि और सेहत संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं. नए काम की शुरुआत करने से बचना होगा, कर्जा न लें और कामकाज में लापरवाही या जल्दबाजी करने से बचें. सूर्य गोचर के उपाय कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार अशुभ प्रभावों से बचने और शुभ फलों की प्राप्ति के लिए ये उपाय करें: भगवान श्री विष्णु की नियमित उपासना करें. बंदर, पहाड़ी गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं. रोज उगते सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना शुरू करें. रविवार के दिन उपवास रखें. रोज गुड़ या मिश्री खाकर और पानी पीकर ही घर से निकलें. जन्मदाता पिता का सम्मान करें, प्रतिदिन उनके चरण छूकर आशीर्वाद लें. भगवान सूर्य की स्तुति के लिए 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करें. Ganesh Chaturthi: घर और ऑफिस की गणेश स्थापना में क्या है बड़ा अंतर? बप्पा को दफ्तर लाते वक्त ध्यान रखें ये जरूरी बातें Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, ग्रहों के राजा सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर मित्र ग्रह की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे. इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर दिखेगा.
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का विशेष स्थान है. सूर्य देव को सभी ग्रहों का राजा कहा जाता है. वे हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं. इस गोचर का सभी राशियों पर प्रभाव पड़ता है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य देव 17 सितंबर को कन्या राशि में गोचर करेंगे. सूर्य देव 17 सितंबर को सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर करेंगे. इस राशि में सूर्य देव 17 अक्टूबर तक रहेंगे. खास बात ये है कि ये सूर्य देव के मित्र ग्रह की राशि है.
व्यक्ति की कुंडली में सूर्य अच्छे स्वास्थ्य, प्रसिद्धि, नाम, सरकारी नौकरी, सफलता, उच्च पद के कारक होते हैं. ये हर राशि में लगभग एक महीने तक विराजमान रहते हैं. ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन का विशेष महत्व होता है. जब भी कोई ग्रह किसी एक राशि में मौजूद होता है फिर किसी निश्चित समय में दूसरी राशि में परिवर्तन करता है तो इसका प्रभाव सभी जातकों पर शुभ और अशुभ दोनों तरह का होता है. ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से सूर्य हर एक महीने में राशि परिवर्तन करते हैं. कुंडली में सूर्य के शुभ भाव में होने पर व्यक्ति को नौकरी, मान-सम्मान और धन लाभ होता है.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष में सूर्य को तेज, मान-सम्मान और यश, उच्च पद-प्रतिष्ठा आदि का कारक ग्रह माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जिसका प्रभाव सभी राशि के जातकों पर पड़ता है. सिंह राशि के स्वामी सूर्य तुला राशि में नीच राशिगत तथा मेष राशि में उच्च राशिगत संज्ञक माने गए हैं. उच्च भाव में ग्रह अधिक मजबूत और बलशाली होते हैं, जबकि नीच राशि में ये कमजोर हो जाते हैं.
सूर्य का शुभ-अशुभ प्रभाव
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य के शुभ प्रभाव से जॉब और बिजनेस में तरक्की के योग बनते हैं और लीडरशिप करने का मौका भी मिलता है. ज्योतिष में सूर्य को आत्माकारक ग्रह कहा गया है. इसके प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है. पिता, अधिकारी और शासकीय मामलों में सफलता भी सूर्य के शुभ प्रभाव से मिलती है.
वहीं सूर्य का अशुभ प्रभाव असफलता देता है, जिसके कारण कामकाज में रुकावटें और परेशानियां बढ़ती हैं. धन हानि और स्थान परिवर्तन भी सूर्य के कारण होता है. सूर्य के अशुभ प्रभाव से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी होती हैं.
4 राशियों के लिए शुभ
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वृष, कन्या, वृश्चिक और मकर राशि वाले लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा:
इन राशि वाले लोगों को जॉब और बिजनेस में तरक्की मिल सकती है.
प्रॉपर्टी और आर्थिक मामलों में फायदा मिल सकता है.
सेहत के लिए समय अच्छा रहेगा और किस्मत का साथ मिल सकता है.
पारिवारिक मामलों के लिए भी समय शुभ कहा जा सकता है. इन 4 राशि वालों पर मौजूदा अशुभ ग्रह स्थिति का प्रभाव नहीं पड़ेगा.
4 राशियों के लिए मिला-जुला समय
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि मेष, मिथुन, सिंह और धनु राशि वाले लोगों के लिए मिला-जुला समय रहेगा:
इन राशि वाले लोगों को धन लाभ तो होगा, लेकिन खर्चा भी बढ़ जाएगा.
कुछ मामलों में सितारों का साथ मिलेगा, वहीं कामकाज में रुकावटें, तनाव और विवाद होने की भी आशंका है.
सेहत संबंधी परेशानी भी हो सकती है.
4 राशियों को रहना होगा संभलकर
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि कर्क, तुला, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं:
इन 4 राशि वाले लोगों को विशेष रूप से संभलकर रहना होगा.
कामकाज में रुकावटें आ सकती हैं और विवाद होने की आशंका है.
धन हानि और सेहत संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं.
नए काम की शुरुआत करने से बचना होगा, कर्जा न लें और कामकाज में लापरवाही या जल्दबाजी करने से बचें.
सूर्य गोचर के उपाय
कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार अशुभ प्रभावों से बचने और शुभ फलों की प्राप्ति के लिए ये उपाय करें:
- भगवान श्री विष्णु की नियमित उपासना करें.
- बंदर, पहाड़ी गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं.
- रोज उगते सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना शुरू करें.
- रविवार के दिन उपवास रखें.
- रोज गुड़ या मिश्री खाकर और पानी पीकर ही घर से निकलें.
- जन्मदाता पिता का सम्मान करें, प्रतिदिन उनके चरण छूकर आशीर्वाद लें.
- भगवान सूर्य की स्तुति के लिए 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करें.
Ganesh Chaturthi: घर और ऑफिस की गणेश स्थापना में क्या है बड़ा अंतर? बप्पा को दफ्तर लाते वक्त ध्यान रखें ये जरूरी बातें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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