Sonam Wangchuk Health Update: एक साथ कितना वजन घटने पर मौत होनी तय? समझ लीजिए अपनी बॉडी का हेल्थ मैनेजमेंट

Causes Of Sudden Unexplained Weight Loss: अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन लगातार घट रहा है. शुक्रवार (17 जुलाई) को उनकी भूख हड़ताल का 20वां दिन था, जिसके बाद उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में एडमिट करा दिया गया. 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अन्न त्याग रखा है. डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में उनका वजन 350 ग्राम और कम हुआ है. अब उनका वजन 56.55 किलोग्राम रह गया है. यानी अब तक उनका कुल वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है. मेडिकल टीम की ओर से जारी हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक का ब्लड प्रेशर 108/68 mm Hg, ब्लड शुगर 80 mg/dL, पल्स रेट 72 प्रति मिनट और ऑक्सीजन सैचुरेशन 96 प्रतिशत दर्ज किया गया. डॉक्टरों ने बताया कि उनमें हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं, हालांकि उनकी मेंटल स्थिति सामान्य और सतर्क बनी हुई है. आइए जानते हैं कि एक साथ कितना वजन घटने पर मौत होनी तय है?  इसे भी पढ़ें: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल? लंबे समय तक भूखे रहने पर शरीर में क्या होता है? बीबीसी साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी बार खाना खाने के एक-दो दिन बाद शरीर में लिवर और मसल्स में जमा ग्लाइकोजन लगभग खत्म हो जाता है. इसके बाद शरीर एनर्जी के लिए जमा फैट को तोड़कर केटोन बनाने लगता है. हालांकि ब्रेन और रेड ब्लड सेल्स केवल केटोन से काम नहीं चला सकतीं. इन्हें ग्लूकोज की जरूरत होती है, जिसके लिए शरीर मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है. यही वजह है कि लंबे समय तक भोजन न मिलने पर केवल फैट ही नहीं, बल्कि शरीर की जरूरी मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं. इनमें हार्ट की मांसपेशियां भी शामिल हैं. यदि ये अत्यधिक कमजोर हो जाएं तो हार्ट काम करना बंद कर सकता है और यह स्थिति जानलेवा बन सकती है. कितना वजन घटना जानलेवा माना जाता है? डॉक्टरों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का कुल वजन 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाए तो यह जिंदगी के लिए गंभीर खतरा माना जाता है, चाहे शुरुआत में उसका वजन कितना भी रहा हो. पूरी तरह भोजन बंद होने की स्थिति में आमतौर पर 8 से 12 सप्ताह के भीतर मौत का खतरा पैदा हो सकता है. हालांकि यदि शरीर को थोड़ी-बहुत कैलोरी और पर्याप्त प्रोटीन मिलता रहे तो व्यक्ति अपेक्षाकृत अधिक समय तक जीवित रह सकता है, क्योंकि शरीर एनर्जी के लिए फैट का उपयोग करता रहता है. तेजी से वजन घटना भी बढ़ा सकता है मौत का खतरा हाल ही में बीएमजी जर्नल हार्ट में पब्लिश एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के एक स्टडी में यह भी सामने आया कि मोटापे और हार्ट रोग से जूझ रहे लोगों में वजन का बहुत तेजी से घटना या बढ़ना, दोनों ही मौत के खतरे को बढ़ा सकते हैं. करीब 8,297 लोगों पर लगभग 14 साल तक किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों का वजन 10 किलोग्राम से ज्यादा बढ़ा, उनमें हार्ट संबंधी मौत का खतरा तीन गुना तक बढ़ गया. वहीं जिन लोगों का वजन 10 किलोग्राम से अधिक घटा, उनमें किसी भी कारण से मौत का जोखिम 54 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. डॉक्टर क्या सलाह देते हैं? अध्ययन से जुड़े एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बारबरा पियर्सियोनेक, डॉ. रुडोल्फ शुट्टे और डॉ. जुफेन झांग का कहना है कि खासकर हार्ट रोग से पीड़ित मोटापे के मरीजों के लिए शरीर का वजन स्थिर बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसे भी पढ़ें -  AIIMS Delhi ने रचा इतिहास! 4 महीने के मासूम की दुनिया की सबसे दुर्लभ लंग सर्जरी सफल Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Jul 18, 2026 - 23:30
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Sonam Wangchuk Health Update: एक साथ कितना वजन घटने पर मौत होनी तय? समझ लीजिए अपनी बॉडी का हेल्थ मैनेजमेंट

Causes Of Sudden Unexplained Weight Loss: अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का वजन लगातार घट रहा है. शुक्रवार (17 जुलाई) को उनकी भूख हड़ताल का 20वां दिन था, जिसके बाद उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में एडमिट करा दिया गया. 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अन्न त्याग रखा है. डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में उनका वजन 350 ग्राम और कम हुआ है. अब उनका वजन 56.55 किलोग्राम रह गया है. यानी अब तक उनका कुल वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है.

मेडिकल टीम की ओर से जारी हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक का ब्लड प्रेशर 108/68 mm Hg, ब्लड शुगर 80 mg/dL, पल्स रेट 72 प्रति मिनट और ऑक्सीजन सैचुरेशन 96 प्रतिशत दर्ज किया गया. डॉक्टरों ने बताया कि उनमें हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं, हालांकि उनकी मेंटल स्थिति सामान्य और सतर्क बनी हुई है. आइए जानते हैं कि एक साथ कितना वजन घटने पर मौत होनी तय है? 

इसे भी पढ़ें: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल?

लंबे समय तक भूखे रहने पर शरीर में क्या होता है?

बीबीसी साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी बार खाना खाने के एक-दो दिन बाद शरीर में लिवर और मसल्स में जमा ग्लाइकोजन लगभग खत्म हो जाता है. इसके बाद शरीर एनर्जी के लिए जमा फैट को तोड़कर केटोन बनाने लगता है. हालांकि ब्रेन और रेड ब्लड सेल्स केवल केटोन से काम नहीं चला सकतीं. इन्हें ग्लूकोज की जरूरत होती है, जिसके लिए शरीर मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है. यही वजह है कि लंबे समय तक भोजन न मिलने पर केवल फैट ही नहीं, बल्कि शरीर की जरूरी मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं. इनमें हार्ट की मांसपेशियां भी शामिल हैं. यदि ये अत्यधिक कमजोर हो जाएं तो हार्ट काम करना बंद कर सकता है और यह स्थिति जानलेवा बन सकती है.

कितना वजन घटना जानलेवा माना जाता है?

डॉक्टरों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का कुल वजन 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाए तो यह जिंदगी के लिए गंभीर खतरा माना जाता है, चाहे शुरुआत में उसका वजन कितना भी रहा हो. पूरी तरह भोजन बंद होने की स्थिति में आमतौर पर 8 से 12 सप्ताह के भीतर मौत का खतरा पैदा हो सकता है. हालांकि यदि शरीर को थोड़ी-बहुत कैलोरी और पर्याप्त प्रोटीन मिलता रहे तो व्यक्ति अपेक्षाकृत अधिक समय तक जीवित रह सकता है, क्योंकि शरीर एनर्जी के लिए फैट का उपयोग करता रहता है.

तेजी से वजन घटना भी बढ़ा सकता है मौत का खतरा

हाल ही में बीएमजी जर्नल हार्ट में पब्लिश एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के एक स्टडी में यह भी सामने आया कि मोटापे और हार्ट रोग से जूझ रहे लोगों में वजन का बहुत तेजी से घटना या बढ़ना, दोनों ही मौत के खतरे को बढ़ा सकते हैं. करीब 8,297 लोगों पर लगभग 14 साल तक किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों का वजन 10 किलोग्राम से ज्यादा बढ़ा, उनमें हार्ट संबंधी मौत का खतरा तीन गुना तक बढ़ गया. वहीं जिन लोगों का वजन 10 किलोग्राम से अधिक घटा, उनमें किसी भी कारण से मौत का जोखिम 54 प्रतिशत ज्यादा पाया गया.

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

अध्ययन से जुड़े एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बारबरा पियर्सियोनेक, डॉ. रुडोल्फ शुट्टे और डॉ. जुफेन झांग का कहना है कि खासकर हार्ट रोग से पीड़ित मोटापे के मरीजों के लिए शरीर का वजन स्थिर बनाए रखना बेहद जरूरी है.

इसे भी पढ़ें -  AIIMS Delhi ने रचा इतिहास! 4 महीने के मासूम की दुनिया की सबसे दुर्लभ लंग सर्जरी सफल

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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