Smartphone Camera: फोन में 3-4 कैमरे क्यों दिए जाते हैं? जानें हर कैमरे का काम
Smartphone Camera: मान लीजिए आप अपने दोस्तों के साथ पहाड़ों पर घूमने गए हैं. सामने एक बहुत बड़ा पहाड़ है और आप उसकी पूरी फोटो एक ही फ्रेम में लेना चाहते हैं. जैसे ही आप कैमरा ऑन करते हैं तो पूरा नजारा उसमें कैमरे से कैप्चर नहीं होता. इसके बाद आपको ख्याल आता है कि फोन में एक और कैमरा भी है, जो वाइड एंगल का है. आप उसे यूज करते हैं और पूरा नजारा एक ही फोटो में कैद हो जाता है. यहीं से समझ आता है कि फोन में सिर्फ एक कैमरा काफी नहीं होता है, बल्कि कई स्मार्टफोन्स में 2 के अलावा 3 कैमरे भी होते हैं. हर कैमरे का अपना अलग काम होता है फोन में जो मेन कैमरा होता है, वह रोजमर्रा की फोटो खींचने के लिए सबसे अच्छा होता है, यह सामान्य तौर पर 1x में होता है. इसमें सबसे ज्यादा मेगापिक्सल और सबसे अच्छी लाइट सेंसिंग पावर होती है. हालांकि, अगर आपको किसी बड़ी बिल्डिंग या ग्रुप फोटो लेनी हो, जहां सभी लोग एक ही फ्रेम में आ जाएं तो वहां वाइड एंगल कैमरा काम आता है, जो आमतौर पर 0.5x में होता है. यह कैमरा ज्यादा एरिया को एक साथ कवर कर लेता है. इसी तरह अगर आपको दूर की कोई चीज पास से देखनी हो, जैसे चांद की फोटो या किसी दूर खड़े व्यक्ति की तस्वीर तो उसके लिए टेलीफोटो कैमरा दिया जाता है. यह कैमरा जूम करने पर भी फोटो की क्वालिटी खराब नहीं होने देता, जबकि मेन कैमरे से ज्यादा जूम करने पर फोटो धुंधली हो जाती है. कुछ फोन में मैक्रो कैमरा भी होता है, जो बहुत पास से छोटी चीजों की फोटो लेने के लिए बनाया जाता है. यह भी पढ़ेंः AI ने कर दिखाया कमाल! अब सोलर पावर को मिलेगा बड़ा फायदा डेप्थ कैमरा और पोर्ट्रेट फोटो का कमाल आजकल ज्यादातर फोन में एक डेप्थ सेंसर या डेप्थ कैमरा भी दिया जाता है. इसका काम फोटो खींचना नहीं होता, बल्कि यह पता लगाना होता है कि फोटो में कौन सी चीज पास है और कौन सी दूर. इसी जानकारी की मदद से फोन आपकी पोर्ट्रेट फोटो में बैकग्राउंड को ब्लर कर देता है और सिर्फ इंसान का चेहरा साफ दिखाता है. यह जानना भी जरूरी है कि सिर्फ कैमरों की गिनती ज्यादा होने से फोटो अच्छी नहीं आती. बहुत बार कंपनियां मार्केटिंग के लिए फोन में तीन-चार कैमरे लगा तो देती हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ एक या दो कैमरे ही असल में अच्छी क्वालिटी के होते हैं. बाकी कैमरे सिर्फ कम मेगापिक्सल के हो सकते हैं जो सिर्फ नाम के लिए दिए गए होते हैं. इसलिए फोन खरीदते समय सिर्फ यह मत देखिए कि कितने कैमरे हैं, बल्कि यह भी देखिए कि हर कैमरे का मेगापिक्सल और क्वालिटी कैसी है. यह भी पढ़ेंः World First AI Boss Store : दुनिया का पहला AI बॉस वाला स्टोर 4 महीने में फ्लॉप, 60 लाख का नुकसान
Smartphone Camera: मान लीजिए आप अपने दोस्तों के साथ पहाड़ों पर घूमने गए हैं. सामने एक बहुत बड़ा पहाड़ है और आप उसकी पूरी फोटो एक ही फ्रेम में लेना चाहते हैं. जैसे ही आप कैमरा ऑन करते हैं तो पूरा नजारा उसमें कैमरे से कैप्चर नहीं होता. इसके बाद आपको ख्याल आता है कि फोन में एक और कैमरा भी है, जो वाइड एंगल का है. आप उसे यूज करते हैं और पूरा नजारा एक ही फोटो में कैद हो जाता है. यहीं से समझ आता है कि फोन में सिर्फ एक कैमरा काफी नहीं होता है, बल्कि कई स्मार्टफोन्स में 2 के अलावा 3 कैमरे भी होते हैं.
हर कैमरे का अपना अलग काम होता है
फोन में जो मेन कैमरा होता है, वह रोजमर्रा की फोटो खींचने के लिए सबसे अच्छा होता है, यह सामान्य तौर पर 1x में होता है. इसमें सबसे ज्यादा मेगापिक्सल और सबसे अच्छी लाइट सेंसिंग पावर होती है. हालांकि, अगर आपको किसी बड़ी बिल्डिंग या ग्रुप फोटो लेनी हो, जहां सभी लोग एक ही फ्रेम में आ जाएं तो वहां वाइड एंगल कैमरा काम आता है, जो आमतौर पर 0.5x में होता है. यह कैमरा ज्यादा एरिया को एक साथ कवर कर लेता है.
इसी तरह अगर आपको दूर की कोई चीज पास से देखनी हो, जैसे चांद की फोटो या किसी दूर खड़े व्यक्ति की तस्वीर तो उसके लिए टेलीफोटो कैमरा दिया जाता है. यह कैमरा जूम करने पर भी फोटो की क्वालिटी खराब नहीं होने देता, जबकि मेन कैमरे से ज्यादा जूम करने पर फोटो धुंधली हो जाती है. कुछ फोन में मैक्रो कैमरा भी होता है, जो बहुत पास से छोटी चीजों की फोटो लेने के लिए बनाया जाता है.
यह भी पढ़ेंः AI ने कर दिखाया कमाल! अब सोलर पावर को मिलेगा बड़ा फायदा
डेप्थ कैमरा और पोर्ट्रेट फोटो का कमाल
आजकल ज्यादातर फोन में एक डेप्थ सेंसर या डेप्थ कैमरा भी दिया जाता है. इसका काम फोटो खींचना नहीं होता, बल्कि यह पता लगाना होता है कि फोटो में कौन सी चीज पास है और कौन सी दूर. इसी जानकारी की मदद से फोन आपकी पोर्ट्रेट फोटो में बैकग्राउंड को ब्लर कर देता है और सिर्फ इंसान का चेहरा साफ दिखाता है.
यह जानना भी जरूरी है कि सिर्फ कैमरों की गिनती ज्यादा होने से फोटो अच्छी नहीं आती. बहुत बार कंपनियां मार्केटिंग के लिए फोन में तीन-चार कैमरे लगा तो देती हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ एक या दो कैमरे ही असल में अच्छी क्वालिटी के होते हैं. बाकी कैमरे सिर्फ कम मेगापिक्सल के हो सकते हैं जो सिर्फ नाम के लिए दिए गए होते हैं. इसलिए फोन खरीदते समय सिर्फ यह मत देखिए कि कितने कैमरे हैं, बल्कि यह भी देखिए कि हर कैमरे का मेगापिक्सल और क्वालिटी कैसी है.
यह भी पढ़ेंः World First AI Boss Store : दुनिया का पहला AI बॉस वाला स्टोर 4 महीने में फ्लॉप, 60 लाख का नुकसान
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