RSV से हर साल 100000 बच्चों की होती है मौत, WHO के हिसाब से जानें कब लगवाएं इसकी वैक्सीन?

दुनियाभर में छोटे बच्चों के लिए रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस गंभीर खतरा बना हुआ है. अनुमान है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में हर साल करीब 3.3 करोड़ नए संक्रमण सामने आते हैं,  जिनमें लगभग 36 लाख हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं और करीब 1 लाख बच्चों की मौत हो जाती है. इनमें से 97 फीसदी मौतें कम और मीडियम आय वाले देशों में होती है. इसके बढ़ते खतरे को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने पहली बार आरएसवी के बचाव के लिए दो अहम उपायों की सिफारिश की थी, जिसमें पहला गर्भवती महिलाओं के लिए वैक्सीन और दूसरा नवजात शिशु के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इंजेक्शन था. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि आरएसवी से हर साल एक लाख बच्चों की मौत हो जाती है, ऐसे में डब्ल्यूएचओ के हिसाब से इसकी वैक्सीन कब लगवानी चाहिए. क्या है आरएसवी और क्यों है यह खतरनाक? आरएसवी एक तेजी से फैलने वाला वायरस है जो फेफड़े और सांस की नली को संक्रमित करता है. यह खांसी, छींक या लोगों के कॉन्टेक्ट में आने से फैलते हैं. वहीं बड़े लोगों में यह आम सर्दी जैसा लग सकता है, लेकिन 6 महीने से कम उम्र के बच्चों में यह ब्रोंकियोलाइटिस और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. वहीं इसके शुरुआती लक्षणों में बहती नाक, हल्का बुखार, खांसी और दूध पीने में परेशानी शामिल है. अगर बच्चा तेज या कठिनाई से सांस ले रहा है तो सीने में घरघराहट हो या होंठ नीले पड़ने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. डब्ल्यूएचओ के हिसाब से कब लगवाएं वैक्सीन? डब्ल्यूएचओ के अनुसार गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के 28 वें सप्ताह या उसके बाद आरएसवी वैक्सीन दी जा सकती है. यह वैक्सीन मां के शरीर में एंटीबॉडी बनाती है जो प्लेसेंटा के जरिए शिशु तक पहुंचती है. इससे जन्म के बाद शुरुआती महीने में बच्चों को आरएसवी से सुरक्षा मिलती है. वहीं अमेरिका में इस वैक्सीन को 32 से 36 सप्ताह के बीच लगाने की मंजूरी दी गई है. रिसर्च में यह भी पाया गया है कि यह जन्म के बाद पहले 90 दिनों में संक्रमण के खतरे को 80 प्रतिशत तक घटा सकती है और 6 महीने तक महत्वपूर्ण सुरक्षा देता है. नवजात बच्चे के लिए क्या है ऑप्शन? नवजात शिशु के लिए Nirsevimab नामक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी इंजेक्शन उपलब्ध है. इससे जन्म के तुरंत बाद या आरएसवी सीजन से पहले लगाया जा सकता है. वहीं इसकी एक डाेज लगभग 5 महीने तक सुरक्षा प्रदान करती है, खासतौर पर यह उन क्षेत्र में उपयोगी है जहां आरएसवी का प्रकोप मौसमी होता है. इसके अलावा फिलहाल आरसीवी का उपचार मुख्य रूप से सहायक देखभाल तक सीमित है. गंभीर मामलों में हॉस्पिटल में ऑक्सीजन या दूसरी सहायता की जरूरत पड़ सकती है. यही वजह है कि एक्सपर्ट रोकथाम काे सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं. आरएसवी से बचाव के लिए पेरेंट्स क्या करें? गर्भवती महिलाएं अपने डॉक्टर से आरसीवी वैक्सीन के बारे में सलाह लें. नवजात बच्चे के लिए इंजेक्शन की जानकारी लें. बच्चों को भीड़भाड़ से बचाए और बीमार व्यक्ति को बच्चों से दूर रखें. साफ-सफाई और हाथ धोने की आदत बनाए रखें. गंभीर लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर को चेक कराएं. ये भी पढ़ें-Zero Sugar Drinks: भारत में बढ़ा 'शुगर-फ्री' ड्रिंक्स का क्रेज, क्या वाकई सुरक्षित हैं कोक-पेप्सी के ये ड्रिंक्स?

Feb 14, 2026 - 14:30
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