Processed Food Health Risks: पैकेट बंद खाने में छिपे वो 3 सीक्रेट केमिकल, जो बिना वजन बढ़ाए अंदर ही अंदर सड़ा रहे आपका लिवर
Hidden Chemicals In Packaged Foods: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. चिप्स, बिस्किट, रेडी-टू-ईट मील, डिब्बाबंद सूप, फास्ट फूड और पैक्ड स्नैक्स जैसी चीजें लोगों की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन चुकी हैं. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि कई बार सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि उसकी पैकेजिंग भी सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकती है. रिसर्च के मुताबिक, कुछ पैकेजिंग मटेरियल में मौजूद रसायन धीरे-धीरे खाने में मिल सकते हैंय लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है, जिनमें लिवर भी शामिल है, यूरोपियन यूनियन की संस्था interreg-baltic.eu के अनुसार, कुछ पैकेजिंग मटेरियल में मौजूद केमिकल समय के साथ खाने में मिल सकते हैं और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से शरीर पर निगेटिव असर पड़ सकता है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं. फॉरएवर केमिकल्स फॉरएवर केमिकल्स ऐसे केमिकल्स हैं जिनका इस्तेमाल तेल और पानी को रोकने वाली पैकेजिंग बनाने में किया जाता है. फास्ट फूड रैपर, पिज्जा बॉक्स और माइक्रोवेव पॉपकॉर्न बैग जैसी चीजों में इनका उपयोग किया जाता रहा है. इन्हें फॉरएवर केमिकल्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये शरीर और वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं. कुछ स्टडी में इनका संबंध लिवर, थायरॉयड और इम्यून सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभावों से जोड़ा गया है. बिस्फेनॉल-ए बिस्फेनॉल-ए और इससे जुड़े अन्य बिसफेनॉल्स प्लास्टिक कंटेनर और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों की अंदरूनी परत में इस्तेमाल किए जाते हैं. समय के साथ ये खाने में मिल सकते हैं. रिसर्च बताती है कि ये हार्मोन के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं और लंबे समय तक अधिक संपर्क स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बन सकता है. इसे भी पढ़ें - Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद फ्थैलेट्स फ्थैलेट्स का इस्तेमाल प्लास्टिक को मुलायम और लचीला बनाने के लिए किया जाता है. ये फूड प्रोसेसिंग उपकरणों और कुछ प्लास्टिक पैकेजिंग के जरिए भोजन तक पहुंच सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, ये हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता. क्या है इनका विकल्प अगर इन केमिकल्स के संपर्क को कम करना चाहते हैं, तो प्लास्टिक की जगह कांच, स्टेनलेस स्टील या सिरेमिक के बर्तनों का इस्तेमाल करें. प्लास्टिक कंटेनर में खाना गर्म करने से बचें, क्योंकि गर्मी के कारण केमिकल्स तेजी से भोजन में मिल सकते हैं. इसके साथ ही, इस बात का ध्यान रखें कि जितना संभव हो ताजा और कम प्रोसेस्ड भोजन चुनें. इसे भी पढ़ें- एक फैसला और युवक को मिली नई जिंदगी, AIIMS में 18 साल बाद हुआ ड्यूल ऑर्गन ट्रांसप्लांट Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Hidden Chemicals In Packaged Foods: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. चिप्स, बिस्किट, रेडी-टू-ईट मील, डिब्बाबंद सूप, फास्ट फूड और पैक्ड स्नैक्स जैसी चीजें लोगों की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन चुकी हैं. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि कई बार सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि उसकी पैकेजिंग भी सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकती है.
रिसर्च के मुताबिक, कुछ पैकेजिंग मटेरियल में मौजूद रसायन धीरे-धीरे खाने में मिल सकते हैंय लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है, जिनमें लिवर भी शामिल है, यूरोपियन यूनियन की संस्था interreg-baltic.eu के अनुसार, कुछ पैकेजिंग मटेरियल में मौजूद केमिकल समय के साथ खाने में मिल सकते हैं और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से शरीर पर निगेटिव असर पड़ सकता है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
फॉरएवर केमिकल्स
फॉरएवर केमिकल्स ऐसे केमिकल्स हैं जिनका इस्तेमाल तेल और पानी को रोकने वाली पैकेजिंग बनाने में किया जाता है. फास्ट फूड रैपर, पिज्जा बॉक्स और माइक्रोवेव पॉपकॉर्न बैग जैसी चीजों में इनका उपयोग किया जाता रहा है. इन्हें फॉरएवर केमिकल्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये शरीर और वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं. कुछ स्टडी में इनका संबंध लिवर, थायरॉयड और इम्यून सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभावों से जोड़ा गया है.
बिस्फेनॉल-ए
बिस्फेनॉल-ए और इससे जुड़े अन्य बिसफेनॉल्स प्लास्टिक कंटेनर और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों की अंदरूनी परत में इस्तेमाल किए जाते हैं. समय के साथ ये खाने में मिल सकते हैं. रिसर्च बताती है कि ये हार्मोन के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं और लंबे समय तक अधिक संपर्क स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बन सकता है.
इसे भी पढ़ें - Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद
फ्थैलेट्स
फ्थैलेट्स का इस्तेमाल प्लास्टिक को मुलायम और लचीला बनाने के लिए किया जाता है. ये फूड प्रोसेसिंग उपकरणों और कुछ प्लास्टिक पैकेजिंग के जरिए भोजन तक पहुंच सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, ये हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता.
क्या है इनका विकल्प
अगर इन केमिकल्स के संपर्क को कम करना चाहते हैं, तो प्लास्टिक की जगह कांच, स्टेनलेस स्टील या सिरेमिक के बर्तनों का इस्तेमाल करें. प्लास्टिक कंटेनर में खाना गर्म करने से बचें, क्योंकि गर्मी के कारण केमिकल्स तेजी से भोजन में मिल सकते हैं. इसके साथ ही, इस बात का ध्यान रखें कि जितना संभव हो ताजा और कम प्रोसेस्ड भोजन चुनें.
इसे भी पढ़ें- एक फैसला और युवक को मिली नई जिंदगी, AIIMS में 18 साल बाद हुआ ड्यूल ऑर्गन ट्रांसप्लांट
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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