PM मोदी ने सचिवों के साथ की हाईलेवल मीटिंग, जानें क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की. पीएम मोदी ने वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भावी कार्य एजेंडे की समीक्षा की. बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को और तेज करना था. पीएम मोदी ने सभी मंत्रालयों और विभागों में मजबूत टीम भावना विकसित करने पर जोर देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य के साथ काम करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सरकार के अंदर Horizontal और Vertical दोनों तरह की कार्यगत बाधाओं को समाप्त करना आवश्यक है, ताकि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और एकीकृत परिणाम दे सकें. बैठक में सचिवों से पीएम मोदी ने क्या कहा? नागरिक-केंद्रित सुशासन के महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘भारत के नागरिक ही शासन व्यवस्था के केंद्र में होने चाहिए. हर निर्णय और हर नीति का मार्गदर्शन आम नागरिक के हितों और आकांक्षाओं से होना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘भारत अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए.’ उन्होंने तकनीकी आत्मनिर्भरता और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के निर्माण के महत्व पर बल दिया. उन्होंने कहा, ‘ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से है. इनोवेशन, विविधीकरण और क्षमता निर्माण में तेजी के माध्यम से भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा.’   रिफॉर्म्स सिर्फ एक शब्द नहीं प्रभावी शासन की जरूरत- पीएम मोदी प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार (रिफॉर्म्स) सिर्फ एक प्रचलित शब्द नहीं, बल्कि प्रभावी शासन के लिए निरंतर आवश्यकता हैं. उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और संस्थागत दक्षता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा पर भी समान रूप से मजबूत ध्यान देना आवश्यक है, ताकि डिजिटल प्रणालियों और अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.’  उन्होंने उभरते साइबर खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में युवा इनोवेटर्स (Innovators) और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया और कहा कि इसे एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने सक्रिय और प्रभावी संवाद की जरूरत पर दिया जोर प्रधानमंत्री मोदी ने उन रणनीतिक क्षेत्रों में, जहां देश बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, सक्रिय और प्रभावी संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि इन प्रयासों को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार और निराधार आशंकाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके. उन्होंने कहा, ‘उभरते और भविष्य के उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने के लिए उद्योग जगत के सहयोग से नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए. सरकार को हमेशा युवा सोच वाली, गतिशील और दूरदर्शी बने रहना चाहिए, ताकि वह नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप फुर्ती और नवाचार के साथ स्वयं को लगातार ढालती रहे.’ बैठक के दौरान सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुतियां और चर्चा की. बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.  यह भी पढ़ेंः ‘जो पड़ोसी देश में हुआ, वो हरकत यहां न हो जाए’, ओवैसी ने चेताया

Jul 29, 2026 - 06:30
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PM मोदी ने सचिवों के साथ की हाईलेवल मीटिंग, जानें क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की. पीएम मोदी ने वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भावी कार्य एजेंडे की समीक्षा की. बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को और तेज करना था.

पीएम मोदी ने सभी मंत्रालयों और विभागों में मजबूत टीम भावना विकसित करने पर जोर देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य के साथ काम करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सरकार के अंदर Horizontal और Vertical दोनों तरह की कार्यगत बाधाओं को समाप्त करना आवश्यक है, ताकि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और एकीकृत परिणाम दे सकें.

बैठक में सचिवों से पीएम मोदी ने क्या कहा?

नागरिक-केंद्रित सुशासन के महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘भारत के नागरिक ही शासन व्यवस्था के केंद्र में होने चाहिए. हर निर्णय और हर नीति का मार्गदर्शन आम नागरिक के हितों और आकांक्षाओं से होना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘भारत अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए.’ उन्होंने तकनीकी आत्मनिर्भरता और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के निर्माण के महत्व पर बल दिया.

उन्होंने कहा, ‘ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से है. इनोवेशन, विविधीकरण और क्षमता निर्माण में तेजी के माध्यम से भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा.’  

रिफॉर्म्स सिर्फ एक शब्द नहीं प्रभावी शासन की जरूरत- पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार (रिफॉर्म्स) सिर्फ एक प्रचलित शब्द नहीं, बल्कि प्रभावी शासन के लिए निरंतर आवश्यकता हैं. उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और संस्थागत दक्षता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा पर भी समान रूप से मजबूत ध्यान देना आवश्यक है, ताकि डिजिटल प्रणालियों और अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.’ 

उन्होंने उभरते साइबर खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में युवा इनोवेटर्स (Innovators) और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया और कहा कि इसे एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए.

पीएम मोदी ने सक्रिय और प्रभावी संवाद की जरूरत पर दिया जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने उन रणनीतिक क्षेत्रों में, जहां देश बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, सक्रिय और प्रभावी संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि इन प्रयासों को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार और निराधार आशंकाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके.

उन्होंने कहा, ‘उभरते और भविष्य के उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने के लिए उद्योग जगत के सहयोग से नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए. सरकार को हमेशा युवा सोच वाली, गतिशील और दूरदर्शी बने रहना चाहिए, ताकि वह नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप फुर्ती और नवाचार के साथ स्वयं को लगातार ढालती रहे.’

बैठक के दौरान सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुतियां और चर्चा की. बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. 

यह भी पढ़ेंः ‘जो पड़ोसी देश में हुआ, वो हरकत यहां न हो जाए’, ओवैसी ने चेताया

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