PACL घोटाले में ED का एक्शन, 1986 करोड़ की 37 संपत्तियां की अटैच, निवेशकों के पैसों से खरीदी गई थी प्रॉपर्टी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. ED की टीम ने PMLA के तहत करीब 1986.48 करोड़ रुपये की 37 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. ये संपत्तियां पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में स्थित हैं. ED की ये कार्रवाई PACL लिमिटेड (M/s PACL Ltd.) और उससे जुड़ी कंपनियों की ओर से चलाए गए एक बड़े फाइनेंशियल फ्रॉड और अवैध कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम की जांच के तहत की गई है. इस मामले में CBI ने 19 फरवरी, 2014 को FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी. इसके बाद ED ने इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से अपनी जांच शुरू की. ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा? ईडी की जांच में सामने आया है कि PACL और उससे जुड़ी कंपनियों ने खेती की जमीन खरीदने और उसे विकसित करने के नाम पर देशभर के लाखों निवेशकों से 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी. लोगों को कैश डाउन पेमेंट और इंस्टॉलमेंट प्लान्स के जरिए निवेश के लिए लुभाया गया. निवेशकों से ऐसे-ऐसे कागजों पर साइन कराए गए, जिनमें समझौता, पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे भ्रामक दस्तावेज भी शामिल थे. हकीकत ये रही कि ज्यादातर मामलों में निवेशकों को कोई जमीन मिली ही नहीं. आज भी करीब 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं मिले है. पैसों को घुमाने के लिए बनाई कई फ्रंट कंपनियां ED की जांच में ये भी सामने आया कि इस घोटाले को छुपाने के लिए कई फ्रंट कंपनियां बनाई गई और रिवर्स सेल ट्रांजैक्शन्स के जरिए पैसों को इधर-उधर घुमाया गया, ताकि अवैध कमाई को वैध दिखाया जा सके. जांच में खुलासा हुआ कि निवेशकों से वसूली गई रकम को अलग-अलग कंपनियों और खातों के जरिए घुमाकर PACL के मालिक दिवंगत निर्मल सिंह भंगू, उनके परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के बैंक खातों में पहुंचाया गया. इसी पैसों से महंगी अचल संपत्तियां खरीदी गई, जिन्हें अब ED ने अटैच किया है. आरोपी के परिजनों के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी इस केस में कोर्ट ने आरोपी की पत्नी प्रेम कौर, बेटियां बरिंदर कौर और सुखविंदर कौर, दामाद गुरप्रताप सिंह और एक करीबी सहयोगी प्रतीक कुमार के खिलाफ ओपन एंडेड नॉन-बेलेबल वारंट जारी किए हैं. ED ने इस मामले में 2016 में ECIR दर्ज की थी. इसके बाद 2018 में चार्जशीट दाखिल की गई. फिर 2022 और 2025 में दो सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी कोर्ट में पेश की गई. PMLA की विशेष अदालत ने अब तक दाखिल सभी शिकायतों पर संज्ञान ले लिया है. निवेशकों के पैसे से ही खरीदी गई थी संपत्तियां ED के मुताबिक, जिन 37 संपत्तियों को अभी अटैच किया गया है, वे सीधे तौर पर निवेशकों के पैसों से खरीदी गई थी, इसलिए इन्हें Proceeds of Crime माना गया है. इस कार्रवाई के साथ ही ED अब तक भारत और विदेश में कुल करीब 7,589 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच कर चुकी है. ED ने साफ किया है कि PACL मनी लॉन्ड्रिंग केस में आगे भी जांच जारी रहेगी और निवेशकों के पैसे से बनाई गई बाकी संपत्तियों की भी पहचान की जा रही है. यह भी पढ़ेंः Happy Republic Day 2026: नेवी ब्लू कुर्ता, सफेद पायजामा और टाई-डाई पगड़ी, 77वें गणतंत्र दिवस पर पीएम मोदी के लुक की क्यों हो रही चर्चा

Jan 26, 2026 - 23:30
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PACL घोटाले में ED का एक्शन, 1986 करोड़ की 37 संपत्तियां की अटैच, निवेशकों के पैसों से खरीदी गई थी प्रॉपर्टी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. ED की टीम ने PMLA के तहत करीब 1986.48 करोड़ रुपये की 37 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. ये संपत्तियां पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में स्थित हैं.

ED की ये कार्रवाई PACL लिमिटेड (M/s PACL Ltd.) और उससे जुड़ी कंपनियों की ओर से चलाए गए एक बड़े फाइनेंशियल फ्रॉड और अवैध कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम की जांच के तहत की गई है. इस मामले में CBI ने 19 फरवरी, 2014 को FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी. इसके बाद ED ने इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से अपनी जांच शुरू की.

ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

ईडी की जांच में सामने आया है कि PACL और उससे जुड़ी कंपनियों ने खेती की जमीन खरीदने और उसे विकसित करने के नाम पर देशभर के लाखों निवेशकों से 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी. लोगों को कैश डाउन पेमेंट और इंस्टॉलमेंट प्लान्स के जरिए निवेश के लिए लुभाया गया.

निवेशकों से ऐसे-ऐसे कागजों पर साइन कराए गए, जिनमें समझौता, पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे भ्रामक दस्तावेज भी शामिल थे. हकीकत ये रही कि ज्यादातर मामलों में निवेशकों को कोई जमीन मिली ही नहीं. आज भी करीब 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं मिले है.

पैसों को घुमाने के लिए बनाई कई फ्रंट कंपनियां

ED की जांच में ये भी सामने आया कि इस घोटाले को छुपाने के लिए कई फ्रंट कंपनियां बनाई गई और रिवर्स सेल ट्रांजैक्शन्स के जरिए पैसों को इधर-उधर घुमाया गया, ताकि अवैध कमाई को वैध दिखाया जा सके. जांच में खुलासा हुआ कि निवेशकों से वसूली गई रकम को अलग-अलग कंपनियों और खातों के जरिए घुमाकर PACL के मालिक दिवंगत निर्मल सिंह भंगू, उनके परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के बैंक खातों में पहुंचाया गया. इसी पैसों से महंगी अचल संपत्तियां खरीदी गई, जिन्हें अब ED ने अटैच किया है.

आरोपी के परिजनों के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी

इस केस में कोर्ट ने आरोपी की पत्नी प्रेम कौर, बेटियां बरिंदर कौर और सुखविंदर कौर, दामाद गुरप्रताप सिंह और एक करीबी सहयोगी प्रतीक कुमार के खिलाफ ओपन एंडेड नॉन-बेलेबल वारंट जारी किए हैं. ED ने इस मामले में 2016 में ECIR दर्ज की थी.

इसके बाद 2018 में चार्जशीट दाखिल की गई. फिर 2022 और 2025 में दो सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी कोर्ट में पेश की गई. PMLA की विशेष अदालत ने अब तक दाखिल सभी शिकायतों पर संज्ञान ले लिया है.

निवेशकों के पैसे से ही खरीदी गई थी संपत्तियां

ED के मुताबिक, जिन 37 संपत्तियों को अभी अटैच किया गया है, वे सीधे तौर पर निवेशकों के पैसों से खरीदी गई थी, इसलिए इन्हें Proceeds of Crime माना गया है. इस कार्रवाई के साथ ही ED अब तक भारत और विदेश में कुल करीब 7,589 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच कर चुकी है. ED ने साफ किया है कि PACL मनी लॉन्ड्रिंग केस में आगे भी जांच जारी रहेगी और निवेशकों के पैसे से बनाई गई बाकी संपत्तियों की भी पहचान की जा रही है.

यह भी पढ़ेंः Happy Republic Day 2026: नेवी ब्लू कुर्ता, सफेद पायजामा और टाई-डाई पगड़ी, 77वें गणतंत्र दिवस पर पीएम मोदी के लुक की क्यों हो रही चर्चा

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