Natural Remedies For Chronic Pain: दवाइयों के बिना भी मिलेगा दर्द से आराम, डॉक्टर ने बताए 7 नेचुरल नुस्खे

Turmeric Anti Inflammatory Benefits: लंबे समय तक चलने वाला दर्द यानी क्रॉनिक पेन बेहद थकाने वाला और परेशान करने वाला हो सकता है. अक्सर ऐसे मामलों में लोग दवाइयों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन कई बार प्राकृतिक उपाय भी दर्द कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं. इन्हें अपनाने से शरीर की सूजन कम होती है, नींद बेहतर होती है और जीवन की गुणवत्ता सुधर सकती है. डॉ. कुनाल सूद, जो एनेस्थीसियोलॉजी और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन एक्सपर्ट हैं, उन्होंने हाल ही में एक वीडियो में ऐसे 7 नेचुरल सप्लीमेंट्स के बारे में बताया, जो क्रॉनिक दर्द को मैनेज करने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि किसी भी सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. हर व्यक्ति का शरीर और मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है, इसलिए डोज भी उसी हिसाब से तय की जानी चाहिए. आइए जानते हैं कौन-से हैं वो 7 प्राकृतिक उपाय - 1. हल्दी (Turmeric) हल्दी में पाया जाने वाला कर्क्यूमिन शरीर में सूजन को कम करता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं. नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द और शरीर की थकान में राहत मिल सकती है. 2. विटामिन D डॉ. सूद बताते हैं कि हमारे शरीर में हर जगह विटामिन D रिसेप्टर्स होते हैं, यहां तक कि नर्वस सिस्टम में भी. रिसर्च के अनुसार यह दर्द की संवेदना को नियंत्रित करने और नसों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाता है और सूजन कम करता है. 3. अश्वगंधा (Ashwagandha) तनाव और चिंता क्रॉनिक पेन को और बढ़ा देते हैं. अश्वगंधा का सेवन तनाव और चिंता को कम करता है, नींद सुधारता है और शरीर को रिकवरी में मदद करता है. 4. फिश ऑयल (Fish Oil) फिश ऑयल में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स सूजन कम करते हैं. रिसर्च बताती है कि यह खासकर आर्थराइटिस के दर्द में फायदेमंद है. 5. मैग्नीशियम (Magnesium) मैग्नीशियम मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन (cramping) को कम करता है. यह नींद को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्या से राहत देता है. 6. सीबीडी (Cannabidiol) सीबीडी तेल कैनाबिस प्लांट से निकाला जाता है. इसमें दर्द कम करने और सूजन घटाने की क्षमता होती है. कुछ रिसर्च के अनुसार यह घुटनों के आर्थराइटिस और नसों के दर्द (neuropathic pain) में मदद कर सकता है. हालांकि, इस पर और रिसर्च की जरूरत है. 7.ग्लूकोसामीन/कॉनड्रोइटिन (Glucosamine/Chondroitin) ये दोनों यौगिक शरीर के कार्टिलेज में पाए जाते हैं. डॉक्टर सूद बताते हैं कि यह सप्लीमेंट्स खासकर आर्थराइटिस से होने वाले सेकेंडरी दर्द को कम करने में सहायक हैं. ध्यान रखने योग्य बातें इन सभी सप्लीमेंट्स को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. शुरुआत हमेशा छोटी खुराक से करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें. हर व्यक्ति के लिए असर अलग हो सकता है, इसलिए धैर्य रखें. क्रॉनिक दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए ये प्राकृतिक उपाय दवाइयों के साथ एक सपोर्ट सिस्टम की तरह काम कर सकते हैं. हल्दी, फिश ऑयल और अश्वगंधा जैसे आयुर्वेदिक और न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स न सिर्फ दर्द कम करते हैं बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं. इसे भी पढ़ें-  Processed Meat And Heart Disease: रोजाना खाते हैं लाल मांस तो हो जाएगी यह बीमारी, नॉन वेज लवर्स को डरा देगी यह स्टडी Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Sep 19, 2025 - 18:30
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Natural Remedies For Chronic Pain: दवाइयों के बिना भी मिलेगा दर्द से आराम, डॉक्टर ने बताए 7 नेचुरल नुस्खे

Turmeric Anti Inflammatory Benefits: लंबे समय तक चलने वाला दर्द यानी क्रॉनिक पेन बेहद थकाने वाला और परेशान करने वाला हो सकता है. अक्सर ऐसे मामलों में लोग दवाइयों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन कई बार प्राकृतिक उपाय भी दर्द कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं. इन्हें अपनाने से शरीर की सूजन कम होती है, नींद बेहतर होती है और जीवन की गुणवत्ता सुधर सकती है.

डॉ. कुनाल सूद, जो एनेस्थीसियोलॉजी और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन एक्सपर्ट हैं, उन्होंने हाल ही में एक वीडियो में ऐसे 7 नेचुरल सप्लीमेंट्स के बारे में बताया, जो क्रॉनिक दर्द को मैनेज करने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि किसी भी सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. हर व्यक्ति का शरीर और मेडिकल हिस्ट्री अलग होती है, इसलिए डोज भी उसी हिसाब से तय की जानी चाहिए.

आइए जानते हैं कौन-से हैं वो 7 प्राकृतिक उपाय -

1. हल्दी (Turmeric)

हल्दी में पाया जाने वाला कर्क्यूमिन शरीर में सूजन को कम करता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं. नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द और शरीर की थकान में राहत मिल सकती है.

2. विटामिन D

डॉ. सूद बताते हैं कि हमारे शरीर में हर जगह विटामिन D रिसेप्टर्स होते हैं, यहां तक कि नर्वस सिस्टम में भी. रिसर्च के अनुसार यह दर्द की संवेदना को नियंत्रित करने और नसों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही हड्डियों को मजबूत बनाता है और सूजन कम करता है.

3. अश्वगंधा (Ashwagandha)

तनाव और चिंता क्रॉनिक पेन को और बढ़ा देते हैं. अश्वगंधा का सेवन तनाव और चिंता को कम करता है, नींद सुधारता है और शरीर को रिकवरी में मदद करता है.

4. फिश ऑयल (Fish Oil)

फिश ऑयल में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स सूजन कम करते हैं. रिसर्च बताती है कि यह खासकर आर्थराइटिस के दर्द में फायदेमंद है.

5. मैग्नीशियम (Magnesium)

मैग्नीशियम मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन (cramping) को कम करता है. यह नींद को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्या से राहत देता है.

6. सीबीडी (Cannabidiol)

सीबीडी तेल कैनाबिस प्लांट से निकाला जाता है. इसमें दर्द कम करने और सूजन घटाने की क्षमता होती है. कुछ रिसर्च के अनुसार यह घुटनों के आर्थराइटिस और नसों के दर्द (neuropathic pain) में मदद कर सकता है. हालांकि, इस पर और रिसर्च की जरूरत है.

7.ग्लूकोसामीन/कॉनड्रोइटिन (Glucosamine/Chondroitin)

ये दोनों यौगिक शरीर के कार्टिलेज में पाए जाते हैं. डॉक्टर सूद बताते हैं कि यह सप्लीमेंट्स खासकर आर्थराइटिस से होने वाले सेकेंडरी दर्द को कम करने में सहायक हैं.

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इन सभी सप्लीमेंट्स को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
  • शुरुआत हमेशा छोटी खुराक से करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें.
  • हर व्यक्ति के लिए असर अलग हो सकता है, इसलिए धैर्य रखें.

क्रॉनिक दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए ये प्राकृतिक उपाय दवाइयों के साथ एक सपोर्ट सिस्टम की तरह काम कर सकते हैं. हल्दी, फिश ऑयल और अश्वगंधा जैसे आयुर्वेदिक और न्यूट्रिशनल सप्लीमेंट्स न सिर्फ दर्द कम करते हैं बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं.

इसे भी पढ़ें-  Processed Meat And Heart Disease: रोजाना खाते हैं लाल मांस तो हो जाएगी यह बीमारी, नॉन वेज लवर्स को डरा देगी यह स्टडी

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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