Meta, X और YouTube कंटेंट हटाने का फैसला कैसे लेते हैं, क्या है पॉलिसी?

Social Media Content Moderation Policy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बीते दिनों एक बड़ी खबर आई. पीएम मोदी के एक पोस्ट को मेटा ने फेसबुक से हटा दिया था, जिसके बाद आपत्ति दर्ज कराई गई. मेटा ने अपनी भूल मानते हुए उस वीडियो को फिर से बहाल कर दिया. हालांकि, मामला तब तक तूल पकड़ चुका था.  इस घटना के बाद से ही फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी चर्चा में बनी हुई है. लोगों के मन में सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी कंटेंट या पोस्ट को हटाने का फैसला कैसे लेते हैं? यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और इसकी पॉलिसी क्या है? चलिए जानते हैं...   Meta, Facebook और Instagram की पॉलिसी मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित रखने के लिए कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का पालन करता है. मेटा के पास कंटेंट की निगरानी करने का एक बहुत बड़ा ढांचा है. मेटा पर अपलोड होने वाले लगभग 90% से ज्यादा आपत्तिजनक कंटेंट को इंसानों के देखने से पहले ही एआई टूल्स पकड़ लेते हैं. यह सिस्टम न्यूडिटी, हिंसा और आतंकी गतिविधियों से जुड़े कंटेंट को तुरंत ब्लॉक कर देता है. एआई के बाद यह पहुंचता है इंसानी टीम के पास. मेटा के पास दुनिया भर में हजारों ऐसे लोग हैं जो अलग-अलग भाषाओं को जानकारी रखते हैं. जब एआई किसी पोस्ट पर पूरी तरह फैसला नहीं ले पाता, तो यह टीम उसे देखकर तय करती है कि पोस्ट रहेगी या हटेगी. साथ ही अगर आपको कोई पोस्ट गलत लगती है, तो आप उसे रिपोर्ट कर सकते हैं. ज्यादा रिपोर्ट आने पर मेटा उस कंटेंट की दोबारा जांच करता है.  X की पॉलिसी एलन मस्क के आने के बाद X की नीतियों में काफी बदलाव आया है. X खुद को फ्री स्पीच यानी अभिव्यक्ति की आजादी का मंच कहता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां कुछ भी पोस्ट किया जा सकता है. X भी अपनी एक पॉलिसी के तहत काम करता है. जैसे कि X पर किसी की निजी जानकारी डालना, बिना मर्जी के किसी की तस्वीर पोस्ट करना या किसी को सीधे तौर पर धमकी देना पूरी तरह बैन है. ऐसा करने पर X तुरंत पोस्ट को हटा देता है. X ने गलत जानकारी को रोकने के लिए एक नया तरीका अपनाया है. अगर कोई पोस्ट भ्रामक है, तो आम यूजर्स ही उस पर फैक्ट-चेक का नोट जोड़ देते हैं. इससे कंटेंट हटता तो नहीं है, लेकिन लोगों को उसकी सच्चाई पता चल जाती है.  यह भी पढ़ें - क्या बंद पड़ा फोन भी आपकी लोकेशन बता सकता है, जानें कैसे? YouTube की पॉलिसी यूट्यूब एक वीडियो प्लेटफॉर्म होने के कारण इसकी नीतियां और भी सख्त है. यूट्यूब पर आप किसी दूसरे का वीडियो या गाना बिना उसकी इजाजत के इस्तेमाल नहीं कर सकते. अगर आप ऐसा करते हैं, तो असली मालिक की शिकायत पर यूट्यूब आपके वीडियो को तुरंत हटा देता है. साथ ही अगर किसी वीडियो से बच्चों को नुकसान पहुंचने की आशंका हो, तो यूट्यूब उसे बिना किसी चेतावनी के हटा देता है. यूट्यूब कभी भी सीधे चैनल बंद नहीं करता. पहली बार गलती होने पर सिर्फ चेतावनी मिलती है. इसके बाद 90 दिनों के भीतर 3 स्ट्राइक आने पर चैनल को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाता है. यह भी पढ़ें - कैसे चलती है Amazon की Robotaxi, ड्राइवर की जरूरत क्यों नहीं पड़ती?

Aug 4, 2026 - 07:30
 0
Meta, X और YouTube कंटेंट हटाने का फैसला कैसे लेते हैं, क्या है पॉलिसी?

Social Media Content Moderation Policy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बीते दिनों एक बड़ी खबर आई. पीएम मोदी के एक पोस्ट को मेटा ने फेसबुक से हटा दिया था, जिसके बाद आपत्ति दर्ज कराई गई. मेटा ने अपनी भूल मानते हुए उस वीडियो को फिर से बहाल कर दिया. हालांकि, मामला तब तक तूल पकड़ चुका था. 

इस घटना के बाद से ही फेसबुक, एक्स और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन पॉलिसी चर्चा में बनी हुई है. लोगों के मन में सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी कंटेंट या पोस्ट को हटाने का फैसला कैसे लेते हैं? यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और इसकी पॉलिसी क्या है? चलिए जानते हैं...  

Meta, Facebook और Instagram की पॉलिसी

मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित रखने के लिए कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का पालन करता है. मेटा के पास कंटेंट की निगरानी करने का एक बहुत बड़ा ढांचा है. मेटा पर अपलोड होने वाले लगभग 90% से ज्यादा आपत्तिजनक कंटेंट को इंसानों के देखने से पहले ही एआई टूल्स पकड़ लेते हैं. यह सिस्टम न्यूडिटी, हिंसा और आतंकी गतिविधियों से जुड़े कंटेंट को तुरंत ब्लॉक कर देता है. एआई के बाद यह पहुंचता है इंसानी टीम के पास. मेटा के पास दुनिया भर में हजारों ऐसे लोग हैं जो अलग-अलग भाषाओं को जानकारी रखते हैं. जब एआई किसी पोस्ट पर पूरी तरह फैसला नहीं ले पाता, तो यह टीम उसे देखकर तय करती है कि पोस्ट रहेगी या हटेगी. साथ ही अगर आपको कोई पोस्ट गलत लगती है, तो आप उसे रिपोर्ट कर सकते हैं. ज्यादा रिपोर्ट आने पर मेटा उस कंटेंट की दोबारा जांच करता है. 

X की पॉलिसी

एलन मस्क के आने के बाद X की नीतियों में काफी बदलाव आया है. X खुद को फ्री स्पीच यानी अभिव्यक्ति की आजादी का मंच कहता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां कुछ भी पोस्ट किया जा सकता है. X भी अपनी एक पॉलिसी के तहत काम करता है. जैसे कि X पर किसी की निजी जानकारी डालना, बिना मर्जी के किसी की तस्वीर पोस्ट करना या किसी को सीधे तौर पर धमकी देना पूरी तरह बैन है. ऐसा करने पर X तुरंत पोस्ट को हटा देता है. X ने गलत जानकारी को रोकने के लिए एक नया तरीका अपनाया है. अगर कोई पोस्ट भ्रामक है, तो आम यूजर्स ही उस पर फैक्ट-चेक का नोट जोड़ देते हैं. इससे कंटेंट हटता तो नहीं है, लेकिन लोगों को उसकी सच्चाई पता चल जाती है. 

यह भी पढ़ें - क्या बंद पड़ा फोन भी आपकी लोकेशन बता सकता है, जानें कैसे?

YouTube की पॉलिसी

यूट्यूब एक वीडियो प्लेटफॉर्म होने के कारण इसकी नीतियां और भी सख्त है. यूट्यूब पर आप किसी दूसरे का वीडियो या गाना बिना उसकी इजाजत के इस्तेमाल नहीं कर सकते. अगर आप ऐसा करते हैं, तो असली मालिक की शिकायत पर यूट्यूब आपके वीडियो को तुरंत हटा देता है. साथ ही अगर किसी वीडियो से बच्चों को नुकसान पहुंचने की आशंका हो, तो यूट्यूब उसे बिना किसी चेतावनी के हटा देता है. यूट्यूब कभी भी सीधे चैनल बंद नहीं करता. पहली बार गलती होने पर सिर्फ चेतावनी मिलती है. इसके बाद 90 दिनों के भीतर 3 स्ट्राइक आने पर चैनल को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाता है.

यह भी पढ़ें - कैसे चलती है Amazon की Robotaxi, ड्राइवर की जरूरत क्यों नहीं पड़ती?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow