Mauni Amavasya 2026: मौन व्रत बढ़ाता है स्पीच पावर, एक दिन के मौन का चमत्कारी असर जान हैरान रह जाएंगे !

Mauni Amavasya 2026: पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की अंतिम या 15वीं तिथि को अमावस्या पड़ती है. लेकिन सभी में माघ महीने की मौनी अमावस्या को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. यह साल की पहली और सबसे बड़ी अमावस्या है. इस अमावस्या पर विशेष रूप से मौन व्रत रखने का महत्व है. साधु-संत से लेकर साधक सभी आज मौन व्रत का पालन करे हैं. इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है.आज रविवार 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या है.  मौनी अमावस्या का धार्मिक इतिहास धार्मिक व पौराणिक मान्यता है कि, माघी अमावस्या से ही ब्रह्माजी ने स्वयंभुव मनु को उत्पन्न कर सृष्टि बनाने के कार्य की शुरुआत की थी. मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का पालन करते हुए किसी भी तीर्थ स्थल में किए स्नान, व्रत और दान से अक्षयपुण्य मिलता है. एक मान्यता यह भी है कि, मानव जाति के पहले पुरुष मनु महाराज ने इसी दिन मौन रहकर भगवान की तपस्या की थी और अपने मन को शुद्ध किया था. मनु के नाम पर माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं. इस दिन लोग मौन रहकर अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हैं. मौन रहना क्यों जरूरी मौनी अमावस्या पर मौन रहने से पाप कर्मों से बचा जा सकता है, क्योंकि व्यक्ति जब शांत होता है, तब गलत बोलने से भी बचना है. व्यक्ति की सबसे अधिक गलती का कारण उसका जुबान ही है. कई बार गुस्से या क्रोध में बोले गए शब्द पुण्य को कम करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, मौन साधना केवल मन को नियंत्रित ही नहीं करती है, बल्कि इससे स्पीच पावर (enhances speech power) बढ़ती है. मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मानसिक दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाती है. शास्त्रों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर किया गया मौन व्रत वाणी की शक्ति (Speech Power) को बढ़ाता है और मन, बुद्धि व आत्मा को संतुलित करता है. कम बोलने से व्यर्थ के विचार शांत होते हैं, मन एकाग्र होता है और आत्मचिंतन की क्षमता बढ़ती है. इसलिए ऋषि-मुनि मौन को वाणी की तपस्या कहते हैं. मौन व्रत से कैसे बढ़ता है स्पीच पावर केवल धर्म ही बल्कि आधुनिक मनोविज्ञान भी यह मानता है कि, लगातार बोलने से दिमाग थकता है. वहीं मौन रखने से मस्तिष्ट को री-सेट होने का समय मिलता है,शब्दों का चयन बेहतर होता है, आवाज में स्पष्टता और प्रभाव बढ़ता है. इसलिए एक दिन का मौन भविष्य में आपकी बातों को ज्यादा प्रभावशाली बना सकता है. एक दिन के मौन के चमत्कारी लाभ एक दिन का मौन व्रत आपको कई चमत्कारी लाभ प्रदान कर सकता है, बशर्ते इसका सही तरीके से पालन किया जाए. एक दिन के मौन व्रत या अनावश्यक बातों से ब्रेक तनाव और चिंता को कम करता है, निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है, आत्मविश्वास को बढ़ाता है, क्रोध और नकारात्मकता पर नियंत्रण होता है, ध्यान और साधना को बढ़ाता है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Jan 18, 2026 - 13:30
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Mauni Amavasya 2026: मौन व्रत बढ़ाता है स्पीच पावर, एक दिन के मौन का चमत्कारी असर जान हैरान रह जाएंगे !

Mauni Amavasya 2026: पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की अंतिम या 15वीं तिथि को अमावस्या पड़ती है. लेकिन सभी में माघ महीने की मौनी अमावस्या को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. यह साल की पहली और सबसे बड़ी अमावस्या है. इस अमावस्या पर विशेष रूप से मौन व्रत रखने का महत्व है. साधु-संत से लेकर साधक सभी आज मौन व्रत का पालन करे हैं. इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है.आज रविवार 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या है. 

मौनी अमावस्या का धार्मिक इतिहास

धार्मिक व पौराणिक मान्यता है कि, माघी अमावस्या से ही ब्रह्माजी ने स्वयंभुव मनु को उत्पन्न कर सृष्टि बनाने के कार्य की शुरुआत की थी. मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का पालन करते हुए किसी भी तीर्थ स्थल में किए स्नान, व्रत और दान से अक्षयपुण्य मिलता है.

एक मान्यता यह भी है कि, मानव जाति के पहले पुरुष मनु महाराज ने इसी दिन मौन रहकर भगवान की तपस्या की थी और अपने मन को शुद्ध किया था. मनु के नाम पर माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं. इस दिन लोग मौन रहकर अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हैं.

मौन रहना क्यों जरूरी

मौनी अमावस्या पर मौन रहने से पाप कर्मों से बचा जा सकता है, क्योंकि व्यक्ति जब शांत होता है, तब गलत बोलने से भी बचना है. व्यक्ति की सबसे अधिक गलती का कारण उसका जुबान ही है. कई बार गुस्से या क्रोध में बोले गए शब्द पुण्य को कम करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, मौन साधना केवल मन को नियंत्रित ही नहीं करती है, बल्कि इससे स्पीच पावर (enhances speech power) बढ़ती है.

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और मानसिक दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाती है. शास्त्रों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर किया गया मौन व्रत वाणी की शक्ति (Speech Power) को बढ़ाता है और मन, बुद्धि व आत्मा को संतुलित करता है. कम बोलने से व्यर्थ के विचार शांत होते हैं, मन एकाग्र होता है और आत्मचिंतन की क्षमता बढ़ती है. इसलिए ऋषि-मुनि मौन को वाणी की तपस्या कहते हैं.

मौन व्रत से कैसे बढ़ता है स्पीच पावर

केवल धर्म ही बल्कि आधुनिक मनोविज्ञान भी यह मानता है कि, लगातार बोलने से दिमाग थकता है. वहीं मौन रखने से मस्तिष्ट को री-सेट होने का समय मिलता है,शब्दों का चयन बेहतर होता है, आवाज में स्पष्टता और प्रभाव बढ़ता है. इसलिए एक दिन का मौन भविष्य में आपकी बातों को ज्यादा प्रभावशाली बना सकता है.

एक दिन के मौन के चमत्कारी लाभ

एक दिन का मौन व्रत आपको कई चमत्कारी लाभ प्रदान कर सकता है, बशर्ते इसका सही तरीके से पालन किया जाए. एक दिन के मौन व्रत या अनावश्यक बातों से ब्रेक तनाव और चिंता को कम करता है, निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है, आत्मविश्वास को बढ़ाता है, क्रोध और नकारात्मकता पर नियंत्रण होता है, ध्यान और साधना को बढ़ाता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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